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ए बी और सी ग्रेड की फिल्में क्या होती हैं?

आइये जानते हैं ए बी और सी ग्रेड की फिल्में क्या होती हैं। आपने कई ऐसे सिंगल स्क्रीन थिएटर देखे होंगे, जिनके बाहर कुछ एडल्ट फिल्मों के पोस्टर लगे होते हैं। बेशक उन पोस्टर्स में दिखने वाले कलाकार भारतीय ही होते हैं लेकिन आप उन्हें पहचानते नहीं होंगे। वास्तव में इस तरह के पोस्टर बी या सी ग्रेड फिल्मों के होते हैं।

आप अक्सर सुनते होंगे कि फिल्में ग्रेड्स में बंटी हुई हैं या फिर आप केवल इतना जानते होंगे कि ए ग्रेड फिल्में अच्छी होती हैं और बी या सी ग्रेड की फिल्में अश्लील होती हैं। लेकिन क्या आप यह जानते हैं कि फिल्मों में ग्रेडिंग किस आधार पर तय होती है?

क्या आप जानते हैं कि बी या सी ग्रेड की फिल्मों में दिखने वाले कलाकार इतने चर्चित क्यों नहीं होते हैं? हम आपको ए बी और सी ग्रेड की फिल्मों के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें पढ़ने के बाद आपको सभी सवालों के जवाब मिल जाएंगे।

ए बी और सी ग्रेड की फिल्में क्या होती हैं?

ए बी और सी ग्रेड की फिल्में क्या होती हैं?

इस आधार पर होती है ग्रेडिंग – आपके दिमाग में यह सवाल जरूर होगा कि फिल्मों को किन मापदंडों के आधार पर ग्रेडिंग मिलती है? आपको बता दें कि ग्रेडिंग देने का सबसे बड़ा आधार फिल्म का बजट और तकनीक होती है। इसके अलावा फिल्म में काम कर रहे कलाकारों पर भी यह निर्भर करता है।

जाहिर है बड़ी फिल्म में नामी कलाकार काम करते हैं और उनका बजट ज्यादा होता है और कलाकारों की फीस भी अधिक होती है। हालांकि कम बजट की कई ऐसी फिल्में हैं, जो ए ग्रेड के केटेगरी में रिलीज हुई हैं। इतना ही नहीं ए ग्रेड फिल्मों के कई ऐसे कलाकारों ने भी बी ग्रेड की फिल्मों में काम किया है।

ए ग्रेड की फिल्में – इस श्रेणी में आने वाली फिल्मों का बजट ज्यादा होता है। इन्हें बनाने के लिए बेहतर तकनीक और कैमरों का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें नामी कलाकार, महंगे कॉस्टयूम, बेहतर सेट्स, शानदार म्यूजिकल बैकग्राउंड, बेहतर फोटोग्राफी और एक बेहतर स्क्रिप्ट होती है।

ऐसी फिल्मों को आप अपनी फैमिली के साथ देख सकते हैं। ऐसी फिल्में देश के ज्यादातर सिनेमाघरों में रिलीज होती है। कुल मिलाकर इन फिल्मों को बनाने के लिए जमकर पैसा खर्च किया जाता है।

बी ग्रेड की फिल्में – इस श्रेणी की फिल्मों का बजट बहुत कम होता है और इनमें काम करने वाले कलाकार भी चर्चित नहीं होते हैं। सबसे बड़ी बात इन फिल्मों में कोई स्क्रिप्ट नहीं होती है बल्कि कहानी के नाम पर सिर्फ अश्लीलता भरी होती है।

वास्तव में ऐसी फिल्में बनाने वाले निर्माता ‘देसी’ शब्द पर ज्यादा फोकस करते हैं। उन्हें ऐसा लगता है कि देसी कहानी, देसी कलाकार आदि से उन्हें ज्यादा फायदा मिल सकता है। इस तरह की फिल्में अधिकतर छोटे शहरों में रिलीज होती हैं।

इस तरह की फिल्मों में इस्तेमाल होने वाली तकनीक बहुत सस्ती होती है। इन फिल्मों के टाइटल और पोस्टर कुछ इस तरह तैयार किये जाते हैं, जिससे व्यस्क आकर्षित हों।

सी ग्रेड की फिल्में – इस ग्रेड की फिल्मों का बजट बी ग्रेड की फिल्मों से भी कम होता है। भले ही दर्शक बी ग्रेड की फिल्मों के कुछ कलाकारों को जानते होंगे लेकिन सी ग्रेड की फिल्मों में काम करने वाले कलाकार बिल्कुल अज्ञात होते हैं। इनकी प्रोडक्शन वैल्यू एकदम निचले स्तर की होती है।

कभी-कभी इनकी स्क्रिप्ट ही समझ नहीं आती है। यह फिल्में बी ग्रेड की फिल्मों से छोटी होती हैं। आमतौर पर ए ग्रेड की फिल्म नब्बे से दो घंटे, बी ग्रेड की फिल्में सत्तर से अस्सी मिनट जबकि सी ग्रेड की फिल्में पैंतालीस मिनट तक की होती हैं।

उम्मीद है जागरूक पर ए बी और सी ग्रेड की फिल्में क्या होती हैं कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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