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आर्थिक आपातकाल क्या है?

आइये आज जागरूक के माध्यम से जानते है की आर्थिक आपातकाल क्या होता है और यह कब लगाया जाता है? जहां एक तरफ पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है लगभग सभी देश आज इसकी चपेट में है। धीरे-धीरे भारत में भी यह अपने पैर पसार रहा है ऐसे में भारत सरकार हर कदम पर कड़े फैसले ले रही जिस से की इस वायरस का संक्रमण ज्यादा ना फ़ैल पाये।

ऐसे में एक ऐसी खबर जो बहुत ही वायरल हो रही है वह है आर्थिक आपातकालीन की लेकिन ये खबर बिलकुल झूठ है अभी तक भारत सरकार ने ऐसे किसी आपातकालीन की घोषणा नहीं की है लेकिन इस खबर के वायरल होने से जो सवाल खड़ा हुआ है वह है की ये आर्थिक आपातकाल है क्या और इससे क्या देश में क्या फर्क पड़ता है तो आइये आज इन्हीं सवालों के जवाब जानते है।

आर्थिक आपातकाल क्या है?

वैसे आपको बता दें की फिलहाल अभी तक देश में आर्थिक आपातकाल (financial emergency in hindi) किसी के भी द्वारा लागू नहीं किया गया है लेकिन भारत के संविधान में इसका अच्छे से वर्णन किया गया है और अच्छी तरह से परिभाषित भी किया गया है।

अनुच्छेद 360 के तहत राष्ट्रपति द्वारा उस समय आर्थिक आपात की घोषणा की जा सकती हैं, जब लगे कि देश में कोई ऐसा आर्थिक संकट बना हुआ है, जिसके कारण देश के वित्तीय स्थायित्व या साख को खतरा पंहुच सकता है या खतरा है।

आर्थिक आपातकाल (अनुच्छेद 360) का इस्तेमाल कब किया जाता है?

जब कभी देश में किसी कारण कोई आर्थिक संकट जैसे विषम हालात पैदा होते हैं जिसके कारण सरकार दिवालिया होने के कगार पर आ जाए या फिर किसी कारण देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त या नष्ट होने की स्थिति में आ जाए, तो उस समय आर्थिक आपातकाल के अनुच्छेद 360 का उपयोग किया जा सकता है जिसकी घोषणा राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

लेकिन 1978 के 44 वें संविधान संशोधन अधिनियम में के प्रावधान के अनुसार राष्ट्रपति की ‘संतुष्टि’ न्यायिक समीक्षा से परे नहीं है, अर्थात सुप्रीम कोर्ट चाहे तो इस फैसले की समीक्षा कर सकता है। आर्थिक आपातकाल की स्थिति में देश के आम नागरिकों के पैसों और संपत्ति पर देश का अधिकार हो जाता है।

भारतीय संविधान में 3 तरह के आपातकाल का उल्लेख किया गया है जो की निम्न प्रकार है-

  1. राष्ट्रीय आपातकाल (नेशनल इमरजेंसी) अनुच्छेद 352
  2. राष्ट्रपति शासन (स्टेट इमरजेंसी) अनुच्छेद 356
  3. आर्थिक आपातकाल (इकोनॉमिक इमरजेंसी) अनुच्छेद 360

इनमें से आर्थिक आपातकाल को छोड़कर बाकी दोनों आपातकाल देश में पहले लागू हो चुके हैं। आइये इन्हें भी विस्तार से जाने-

राष्ट्रीय आपातकाल (नेशनल इमरजेंसी) अनुच्छेद 352:-

देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा बहुत ही विकट परिस्थितियों में कि जाती है। देश में इस आपातकाल की घोषणा युद्ध, बाहरी आक्रमण और राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर कि जा सकती है। इस आपातकाल को लागू करने के दौरान सरकार को तो असीमित अधिकार प्राप्त होते हैं, और इन अधिकार का उपयोग सरकार किसी भी रूप में किसी भी समय कर सकती है, लेकिन इसके विपरीत देश के सभी आम नागरिकों के सभी अधिकार छीन लिए जाते हैं।

राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कैबिनेट की सिफारिश पर राष्ट्रपति द्वारा कि जाती है। इस आपातकाल के लागू होने के पश्चात संविधान में वर्णित मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 19) स्वतः ही निलंबित हो जाता है लेकिन अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 अस्तित्व में बने रहते हैं।

राष्ट्रपति शासन (स्टेट इमरजेंसी) आर्टिकल 356:-

राज्य में राजनीतिक संकट को ध्यान में रखते हुए भारत के संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत संबंधित राज्य में राष्ट्रपति द्वारा इस आपातकाल स्थिति की घोषणा की जा सकती हैं। किसी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन तब ही लागू होता है जब उस राज्य की राजनीतिक और संवैधानिक व्यवस्था पूर्ण रूप से फेल हो जाये या फिर वह राज्य, केंद्र की कार्यपालिका के किन्हीं निर्देशों का अनुपालन करने में असमर्थ हो जाए।

इन सभी स्थितियों में राज्य के केवल न्यायिक कार्यों को छोड़कर राज्य के सभी प्रशासन अधिकार केंद्र सरकार द्वारा अपने हाथों में ले लिए जाते है। कुछ संशोधनों के साथ इस आपातकाल की सीमा कम से कम 2 महीने और ज्यादा से ज्यादा 3 साल तक हो सकती है। आमतौर पर ऐसा तभी होता है जब राज्य सरकारें संविधान के मुताबिक सरकार चलाने में विफल हो जाए तो उस स्थिति में केंद्र की सिफारिश पर राष्ट्रपति आपातकाल घोषित कर सकता हैं।

आखिर आपातकाल की जरूरत क्यों पड़ती है?

किसी भी देश या फिर राज्य में आपातकाल को लागू करने की घोषणा या फिर फैसला तब ही लिया जाता है जब उस देश और राज्य पर कोई भारी संकट या कोई विकत परिस्थिति आ गयी हो। संविधान निर्माताओं ने आपातकाल जैसी स्थिति की कल्पना ऐसे वक्त को ध्यान में रखते हुए की थी, जिसमें देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा किसी कारण खतरे में हो और इन्ही सभी को ध्यान में रखते हुए कुछ ऐसे प्रावधान तैयार किये गए, जिसके तहत केंद्र सरकार बिना किसी रोक टोक के गंभीर फैसले ले सकती है।

आर्थिक आपातकाल कब तक लागू रहता है?

जिस दिन देश में राष्ट्रपति द्वारा आर्थिक आपातकाल की घोषणा की जाती है उसके दो माह के अंदर ही इसको संसद के दोनों सदनों द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है और इस आर्थिक आपातकाल की घोषणा प्रस्ताव को संसद के किसी भी सदन द्वारा केवल एक साधारण बहुमत के माध्यम से ही पारित किया जा सकता है। एक बार संसद के दोनों सदनों द्वारा इस प्रस्ताव को अनुमोदित किए जाने के बाद, वित्तीय आपातकाल अनिश्चित काल तक जारी रह सकता है, जब तक इसे राष्ट्रपति द्वारा हटाया नहीं जाता।

इस प्रस्ताव के दो प्रावधान है-

  1. इस प्रस्ताव के संचालन की कोई भी अधिकतम अवधि निर्धारित नहीं है।
  2. इस प्रस्ताव की निरंतरता के लिए बार-बार संसदीय अनुमोदन की आवश्यकता नहीं होती है।

आर्थिक आपातकाल की घोषणा को राष्ट्रपति द्वारा किसी भी समय रद्द किया जा सकता है।

आर्थिक आपातकाल के प्रभाव:-

देश में आर्थिक आपातकाल के लागू होने पर निम्न लिखित प्रभाव होते है-

    • इस आपातकाल के दौरान केंद्र के कार्यकारी अधिकार का पूर्ण रूप से विस्तार हो जाता है और वह किसी भी राज्य को अपने अनुसार वित्तीय आदेश दे सकता है।
    • इस आपातकाल के लागू होने पर राज्य की विधायिका द्वारा राष्ट्रपति के विचार के लिए आये सभी धन विधेयकों या अन्य वित्तीय बिलों को रिज़र्व रखा जा सकता है।
    • इस आपातकाल के दौरान राज्य में नौकरी करने वाले सभी व्यक्तियों या वर्गों के वेतन और भत्ते में कमी की जा सकती है। इस दौरान राष्ट्रपति द्वारा, निम्न व्यक्तियों के वेतन एवं भत्तों में कमी करने के आदेश जारी किये जा सकते है-
      1. संघ की सेवा करने वाले सभी व्यक्तियों या किसी भी वर्ग के व्यक्तियों के वेतन एवं भत्तों में कमी
      2. उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के वेतन एवं भत्तों में कमी

वैसे आपको डरने की आवश्यकता नहीं है अभी तक भारत सरकार द्वारा ऐसी किसी आपातकाल की घोषणा नहीं की गयी है और हमें पूरी उम्मीद है की आगे भी ऐसी कोई घोषणा नहीं की जाएगी तो अगर आपके पास ऐसी किसी भी तरह की कोई अफवाह आये तो उस पर ध्यान ना देवे और ना ही किसी और को शेयर करें और इसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराये।

जागरूक टीम को उम्मीद है आर्थिक आपातकाल क्या है (aarthik aapatkal kya hai) से जुड़ी यह जानकारी आपको पसंद आयी होगी।

अधिक जानकारी के लिए यह भी देखें:-

किन हालातों में लागू हो सकता है आपातकाल,क्या होते हैं इसके प्रभाव?

वित्तीय आपातकाल क्या होता है और इसके क्या क्या परिणाम होते हैं?

3 thoughts on “आर्थिक आपातकाल क्या है?”

  1. संविधान के किस अनुच्छेद में राष्ट्रपति को आपातकाल की घोषणा करने का अधिकार है?

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