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भारत में अभिव्यक्ति की आजादी से क्या तात्पर्य है?

अभिव्यक्ति की आजादी से तात्पर्य अपने भावों और विचारों को व्‍यक्‍त करने का एक राजनीतिक अधिकार से है। जिसके माध्यम से कोई भी व्‍यक्ति अपने विचारों का स्‍वतंत्र रूप से प्रचार-प्रसार कर सकता है और इतना ही नहीं बल्कि वह किसी भी तरह की सूचना का आदान-प्रदान करने का अधिकार भी रखता है। हालांकि आपको बता दें, यह अधिकार सार्वभौमिक नहीं है और इन पर किसी कारणवश समय-समय पर प्रतिबंद या बदलाव किये जा सकते हैं।

राष्‍ट्र-राज्‍य के पास संविधान और कानूनों के तहत अभिव्‍यक्ति की आजादी को किस हद तक बाधित करना है यह अधिकार सुरक्षित होता है। संयुक्‍त राष्‍ट्र की सार्वभौमिक मानवाधिकारों के घोषणा पत्र में मानवाधिकारों को पूर्ण रूप से परिभाषित किया गया है।

भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) में कहा गया है की “सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार होगा” जिसके तहत कोई भी व्यक्ति किसी भी तरह के विचारों और सूचनाओं का आदान-प्रदान स्वतंत्र रूप से कर सकता है।

आपको बता दें की कुछ विशेष परिस्थितियों में जैसे की बाह्य या आंतरिक आपातकाल या राष्‍ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर अभिव्यक्ति की स्‍वंतत्रता सीमित हो जाती है। ऐसी ही कुछ परिस्थितियों के कारण अभिव्यक्ति को यह स्‍वंतत्रता पूर्ण रूप से नहीं मिलती है।

अभिव्यक्ति की आजादी के अधिकार का उद्देश्य

अनुच्छेद 19 (1) (ए) के तहत मिली अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के माध्यम से कोई भी नागरिक किसी भी माध्यम के द्वारा, किसी भी मुद्दे पर अपनी राय और विचार प्रस्तुत कर सकता है। इन माध्यमों में व्यक्तिगत, लेखन, छपाई, चित्र, सिनेमा इत्यादि शामिल हैं जिसमें संचार की आज़ादी और अपनी राय को सार्वजनिक तौर पर रखने और उसे प्रचारित करने का अधिकार भी शामिल है।

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क्या आपको पता है भारत में प्रेस की स्वतंत्रता को अनुच्छेद 19 के तहत मिली बोलने की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आज़ादी से ही लिया गया है। प्रेस की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए अलग से सविंधान में कोई प्रावधान नहीं है। अतः इस अधिकार को लागू करने का एक ही उद्देश्य था की प्रत्येक नागरिक किसी भी तरह के विचारों और सूचनाओं का आदान-प्रदान स्वतंत्र रूप से कर सके।

इस अधिकार के तहत निम्न स्वतंत्रता प्रधान की गयी है– भारतीय संविधान में मूल अधिकारों में एक स्वतंत्रता का अधिकार भी सम्मिलित है। इस अधिकार की 19, 20, 21 तथा 22 क्रमांक की धाराएँ नागरिकों को बोलने एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सहित कुल 6 प्रकार की स्वतंत्रता प्रदान करतीं हैं।

बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भारतीय संविधान में धारा 19 में सम्मिलित इन 6 स्वतंत्रता के अधिकारों में से एक है। ये वह 6 स्वतंत्रता है जो नागरिकों को इस धारा के तहत प्रधान की गयी है-

  1. 19(क) बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता
  2. 19(ख) शांतिपूर्ण और निराययुद्ध सम्मेलन की स्वतंत्रता
  3. 19(ग) संगम, संघ या सहकारी समिति बनाने की स्वतंत्रता
  4. 19(घ) भारत के राज्य क्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण की स्वतंत्रता
  5. 19(ङ) भारत के राज्यक्षेत्र में सर्वत्र कही भी बस जाने की स्वतंत्रता
  6. 19(छ) कोई भी वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारोबार की स्वतंत्रता

इस के अधिकार के मुख्य तत्व– इस अधिकार के कुछ नियम व निर्देश भी है जिनकी पालना करना जरुरी है। इन नियमों के तहत ही नागरिक इस अधिकार का उपयोग कर सकता है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के मुख्य तत्व निम्नानुसार हैं-

  • यह अधिकार केवल भारत के नागरिकों को उपलब्ध है और किसी भी विदेशी नागरिकों को नहीं।
  • अनुच्छेद 19 (1) (क) के तहत प्रत्येक नागरिक को बोलने की स्वतंत्रता में किसी भी माध्यम से जैसे- की मुंह से बोलकर, लेखन, मुद्रण, चित्र, फिल्म आदि की सहायता से किसी भी मुद्दे पर विचार और राय व्यक्त करने का अधिकार है।
  • हालांकि यह अधिकार निरपेक्ष नहीं है और किसी भी स्थिति में जैसे की भारत की संप्रभुता और अखंडता, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता और नैतिकता और अदालत की अवमानना के हित में उचित प्रतिबंध लगाने के लिए यह सरकार को कानून बनाने की अनुमति देता है।
  • राज्य की कार्रवाई के रूप में किसी भी नागरिक के बोलने की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध उसकी निष्क्रियता या उसके इस अधिकार का गलत उपयोग के कारण लगाया जा सकता है।
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कुछ ऐसे कारण जिनकी वजह से यह अधिकार प्रतिबंध किया जा सकता है– कुछ कारणों की वजह से नागरिक से यह स्वतंत्रता प्रतिबंधित हो सकती है जैसे की-

  • राज्य की सुरक्षा को बाधित करने पर
  • विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध होने पर
  • सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने पर
  • शालीनता और नैतिकता को किसी प्रकार का नुकसान पहुंचाने पर
  • अदालत की अवमानना करना या अथार्त अदालत के आदेशों का पालन ना करने पर
  • राष्ट्र को किसी भी तरह की मानहानि पहुंचाने पर
  • किसी अपराध के लिए उकसाना तथा भारत की संप्रभुता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने पर

इसके अलावा अनुच्छेद 19 का खंड (2) किसी भी व्यक्ति को ऐसे बयान देने से रोकता है जो दूसरे की प्रतिष्ठा को बदनाम करता है या उसे नुकसान पहुँचाता है। भारत में मानहानि एक अपराध है जिसे I.P.C की धारा 499 और 500 के तहत रखा गया है।

अभिव्यक्ति की आजादी (Right to free speech) पूरी तरह से पूर्ण नहीं होता है। इसके अन्तर्गत किसी अन्य व्यक्ति की प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने की स्वतंत्रता नहीं है जो की संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है।

अतः हम यही कहना चाहेंगे की इस अधिकार का गलत उपयोग ना करें और और हमेशा इसके नियमों का पालन करें। ये थी अभिव्यक्ति की आजादी से जुडी कुछ रोचक जानकारी, हमें उम्मीद है आपको जागरूक पर हमारे द्वारा दी गयी जानकारी पसंद आयी होगी।

नोटा क्या है?

References:

Freedom of Expression

Constitution of India-Freedom of speech and expression