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AGR क्या है और क्या प्रभाव पड़ रहा है टेलिकॉम कंपनियों पर AGR से?

आइये जानते हैं AGR क्या है और क्या प्रभाव पड़ रहा है टेलिकॉम कंपनियों पर AGR से। ये तो आप सभी अच्छे से जानते है की भारत में लम्बे समय से कई टेलीकॉम कंपनियां दूरसंचार की facilities देती आ रही है और संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा इन टेलीकॉम कंपनियों से यूजेज और लाइसेंसिग फीस के रूप में एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) लिया जाता है। जिसे दो भागों में वसूल किया जाता है– पहला स्पेक्ट्रम यूजेज चार्ज के रूप में और दूसरा लाइसेंसिंग फीस के रूप में और यह चार्ज क्रमश 3-5 प्रतिशत व 8 प्रतिशत तक होता है।

जानते है AGR क्या है:-

24 अक्टूबर 2019 , सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी किया की देश की दूरसंचार कम्पनियों को भारत सरकार को करीब 90 हजार करोड़ रूपये देने होंगे और इस आदेश के बाद बड़ी-बड़ी टेलीकॉम कम्पनियों जैसे एयरटेल, वोडाफोन, आईडिया और जिओ कम्पनियों के अलावा BSNL और MTNL कंपनी को भी पैसे देने होंगे। इस आदेश के चलते सबसे ज्यादा नुकसान एयरटेल कंपनी को उठाना पड़ रहा है और सबसे कम जिओ को।

2019 में दिए गए इस आदेश के तहत लगभग एयरटेल को 21,682 करोड़ रूपये, वोडाफोन को करीब 19,823 करोड़ रूपये, आईडिया को करीब 8,485 करोड़ रूपये और जिओ को करीब 13 करोड़ रूपये भारत सरकार को देने होंगे।

अब सबसे जरूरी और अहम सवाल ये की टेलीकॉम कंपनियों को आखिर ये पैसे सरकार को क्यों देने होंगे तो आपको बता दें की देश की किसी भी दूरसंचार कंपनी को सरकार को हर साल कुछ शुल्क देना होता है जिस प्रक्रिया के तहत दूरसंचार कंपनियां सरकार को ये शुल्क देती है उसे AGR कहा जाता है।

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इसके तहत दूरसंचार मंत्रालय का ये कहना है की अगर फ़ोन सेवाओं से हुई आमदनी के अलावा टेलीकॉम कम्पनियों की और से जमा की गयी सम्पति पर ब्याज व बेचीं गयी सम्पतियों से हुई इनकम भी शामिल होगी और कंपनी को यह शुल्क 3-5 फीसदी स्पेक्ट्रम यूजेज और 8 फीसदी लाइसेंसिंग फीस के रूप में देना होगा।

क्या है AGR विवाद का कारण:-

दरअसल दूरसंचार विभाग का कहना था कि AGR की गणना किसी भी टेलीकॉम कंपनी को होने वाली उसकी संपूर्ण Income या Revenue के आधार पर करनी चाहिए, जिसमें कंपनी द्वारा जमा पूंजी पर ब्याज और बिक्री की गयी सम्पति से होने वाली income भी शामिल होगी और इसके विपरीत टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि AGR की गणना केवल टेलीकॉम सेवाओं से होने वाली income के आधार पर ही करनी चाहिए।

AGR पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश:-

सुप्रीम कोर्ट ने 24 अक्टूबर, 2019 को आदेश दिया की दूरसंचार विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया और टेलीकॉम कंपनियों को आदेश दिया की वह 3 महीनों में अपनी बकाया राशि सरकार को भुगतान करें। जिसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने भुगतान की अंतिम तिथि 23 जनवरी, 2020 तय की। लेकिन टेलीकॉम कंपनियों ने अभी तक अपनी बकाया राशि नहीं चुकाई है जिसके लिए शुक्रवार, 14 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सरकार और टेलीकॉम कंपनियों को जमकर फटकार लगाई।

कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:-

  • एजीआर (AGR) का पूरा नाम “Adjusted Gross Revenue” है।
  • AGR को वर्ष 1999 की नई दूरसंचार नीति के तहत लागु किया गया था।
  • इसके जरिये टेलीकॉम कंपनियों से संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग, डिपार्टमेंट ऑफ़ टेली कम्यूनिकेशन (DoT) द्वारा स्पेक्ट्रम यूजेज और लाइसेंसिग फीस वसूल की जाती है।
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