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एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट क्या है?

आइये जानते हैं एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट क्या होता है (antinuclear antibody test kya hota hai)। बॉडीगार्ड मूवी तो आपने जरूर देखी होगी और बॉडीगार्ड के कामों से भी आप अच्छे से परिचित होंगे लेकिन क्या आपको पता है कि हमारे शरीर के अंदर भी एक बॉडीगार्ड रहता है जो हमारी सुरक्षा करता है।

असल में हमारे ब्लड में कुछ एंटीबॉडीज (antibodies) मौजूद होती हैं जो बाहर से हमला करने वाले परजीवियों और इन्फेक्शन्स से हमारे शरीर की सुरक्षा करती हैं।

लेकिन कई बार ये एंटीबॉडीज अजीब व्यवहार भी करने लगती हैं। इसी को जांचने के लिए एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट (antinuclear antibody test) किया जाता है। ऐसे में आप भी जानना चाहेंगे कि ये एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट क्या होता है। तो चलिए, आज आपको बताते हैं एंटीबॉडीज से जुड़े इस टेस्ट के बारे में।

एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट क्या है? (antinuclear antibody test kya hota hai)

शरीर को सुरक्षित रखने वाली एंटीबॉडीज कभी-कभी अपनी ही सेल्स पर हमला कर देती हैं और उन्हें ख़त्म करने लगती है। एंटीबॉडीज के ऐसे व्यवहार का कारण जानने के लिए ब्लड में मौजूद इन एंटीबॉडीज की मात्रा और पैटर्न की जांच की जाती है।

एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट मुख्य रूप से ऑटो इम्यून डिजीज का पता लगाने के लिए किया जाता है। इस ऑटोइम्यून डिजीज में हमारा इम्यून सिस्टम (Immune system) अपनी ही सेल्स को ख़त्म करने लग जाता है।

ये एंटी न्यूक्लियर एंटीबॉडीज (ANA) ऐसी ऑटोएंटीबॉडी होती हैं जो कोशिकाओं के न्यूक्लियस पर हमला करती हैं। ऐसा नहीं है कि ये एंटीबॉडी केवल बीमार लोगों के शरीर में ही मौजूद होती हैं बल्कि स्वस्थ शरीर में भी ऐसी एंटीबॉडीज मौजूद होती है लेकिन उनकी मात्रा काफी कम होती हैं।

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ये एंटीबॉडीज कई प्रकार की होती हैं और हर एंटीबॉडीज सेल्स के न्यूक्लियस (नाभिक) में जाकर अलग-अलग प्रोटीन कॉम्प्लेक्स के साथ जुड़कर उन्हें नष्ट कर देती हैं। ऐसा होने पर शरीर में सूजन आ जाती है। ऐसा मुख्य रूप से ऑटोइम्यून डिजीज में होता है इसलिए इसका पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट किया जाता है।

हर बीमारी में, अलग-अलग प्रकार की एंटीबॉडीज पायी जाती हैं और एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट में एंजाइम-लिंक्ड इम्म्यूनोसॉरबेन्ट ऐसे – Enzyme-linked immune sorbent assay (ELISA) और इनडायरेक्ट इम्म्युनोफ्लुओरेसेंस का इस्तेमाल किया जाता है।

ऑटोइम्यून डिजीज (autoimmune disease) का पता लगाने के लिए ये टेस्ट किया तो जाता है लेकिन कई बार इसके सही परिणाम नहीं मिल पाते क्योंकि कई फैक्टर इसे प्रभावित करते हैं इसलिए टेस्ट कराते समय इन बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  • अगर मरीज ने पहले से कोई दवा ले रखी है तो डॉक्टर को जरूर बताएं।
  • वायरल इन्फेक्शन रहते हुए अगर टेस्ट कराया जाए तो ये टेस्ट पॉजिटिव आ सकता है।

ये जरुरी नहीं है कि केवल एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट से ही ऑटोइम्यून डिजीज के बारे में सटीक जानकारी मिल जाए क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ शरीर में ANA का स्तर बढ़ता है और किसी व्यक्ति के करीबी रिश्तेदार के ऑटोइम्यून डिजीज होने की स्थिति में उस व्यक्ति के शरीर में भी ANA की मात्रा ज्यादा हो सकती है।

ऐसे में मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जाँच और ANA टेस्ट के साथ डॉक्टर द्वारा कुछ और टेस्ट करने के बाद ही ऑटोइम्यून डिजीज की पुष्टि हो सकती है।

अब आप जान चुके हैं कि एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडीज टेस्ट ऑटोइम्यून डिजीज (autoimmune disease) का पता लगाने के लिए किया जाता है और इस टेस्ट को कई कारक प्रभावित भी कर सकते हैं।

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एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट क्या है

उम्मीद है जागरूक पर एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट क्या है (antinuclear antibody test kya hota hai) कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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