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अथर्ववेद में क्या है और उसका दैनिक जीवन में क्या उपयोग है?

आइये जागरूक पर जानते हैं अथर्ववेद में क्या है और उसका दैनिक जीवन में क्या उपयोग है। अथर्ववेद हिन्दू धर्म के पवित्रतम चार ग्रंथों में से एक है जिसे ब्रह्मवेद भी कहा जाता है। इस वेद की भाषा और स्वरूप के आधार पर ये माना जाता है कि इस वेद की रचना सबसे बाद में हुयी है। ये ग्रन्थ यज्ञ और देवताओं का महिमामंडन नहीं करता है इसलिए इसे वैदिक काल में पुरोहितों द्वारा शेष तीन ग्रंथों के बराबर नहीं समझा जाता था और चार पवित्र ग्रंथों में अथर्ववेद को स्थान काफी बाद में मिल सका।

अथर्ववेद में क्या है? (atharva veda mein kya hai)

अथर्ववेद में क्या बताया गया है और किस तरह का ज्ञान निहित है, ये आपको भी जानना चाहिए इसलिए आज अथर्ववेद के बारे में बात करते हैं ताकि इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां आपको भी मिल सके-

    • धर्म के इतिहास की दृष्टि से ऋग्वेद के साथ-साथ अथर्ववेद का भी बहुत महत्व है।
    • अथर्ववेद का ज्ञान ईश्वर ने महर्षि अंगिरा को दिया था और महर्षि अंगिरा ने बाद में वो ज्ञान ब्रह्मा को दिया।
    • अथर्ववेद में कुल 20 काण्ड, 730 सूक्त और 5987 मन्त्र हैं।
    • वर्तमान में अथर्ववेद की दो शाखाओं की जानकारी मिलती है- पिप्पलाद और शौनक शाखा।
    • इस वेद में ब्रह्मज्ञान, औषधि प्रयोग, रोग निवारण और टोना-टोटका जैसे महत्वपूर्ण विषय समाहित हैं।
    • आयुर्वेद के वर्णन के कारण इसे ‘भैषज्य वेद’ भी कहा जाता है।
    • कुरु देश की समृद्धि का वर्णन इस वेद में किया गया है।
    • इस वेद में औषधियों और जीवाणु विज्ञान के बारे में जानकारी दी गयी है।
    • अथर्ववेद के एक सूक्त में मानव शरीर की रचना का वर्णन भी मिलता है।
    • अथर्ववेद से ज्ञात होता है कि कालांतर में आर्य प्रकृति पूजा की उपेक्षा करने लगे थे और प्रेत आत्माओं और तंत्र-मन्त्र में उनका विश्वास बढ़ गया था।
    • ऐसा माना जाता है कि चिकित्सीय उपचारों को प्रणालीबद्ध और वर्गीकृत करने की शुरुआत अथर्ववेद से ही हुयी होगी।
    • अथर्ववेद में लम्बे जीवन के लिए मंत्र, समृद्धि के लिए प्रार्थना, राजा बनने के लिए मंत्र, पाप का प्रायश्चित करने के मंत्र, प्रेम मंत्र, अंतिम संस्कार के मंत्र और बहुत से अनुष्ठानिक मंत्र एवं जादुई मंत्र निहित हैं।
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आइये, अब जानते हैं कि अथर्ववेद हमारे दैनिक जीवन में किस तरह उपयोगी हो सकता है ?

    • इस वेद में बहुत सी चिकित्सा पध्दतियों का वर्णन किया गया है जो वर्तमान में भी हमारे लिए उपयोगी है जैसे- आयुर्वेद।
    • अथर्ववेद भूगोल, खगोल, अर्थशास्त्र के मौलिक सिद्धांतों और राजनीति के गहन तत्वों का वर्णन भी करता है।
    • इस वेद में राष्ट्रभूमि और राष्ट्रभाषा की महिमा को भी वर्णित किया गया है जिसकी आज के समय में भी प्रासंगिकता है।
    • अथर्ववेद गृहस्थ आश्रम का भी वर्णन करता है जिसमें विवाह के नियमों और पति-पत्नी के कर्तव्यों का बहुत अच्छा विवरण है।

अथर्ववेद के एक श्लोक में कहा गया है कि जिस मनुष्य में सहृदयता और सहानुभूति नहीं है, वो मनुष्य मानव रुप में भेड़िया है। ये श्लोक सन्देश देता है कि सभी मनुष्यों को अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर जन कल्याण की भावना रखनी चाहिए। ऐसा करने पर ही समाज और संसार का कल्याण संभव हो सकेगा। इस सन्देश की वर्तमान जीवन में कितनी उपयोगिता है, ये तो आप भी समझ ही गए होंगे।

दोस्तों, भले ही अथर्ववेद को पवित्र वेद का दर्जा मिलने में समय लगा हो लेकिन जिस प्रकार का ज्ञान और जानकारियां इस वेद से हमें मिलती हैं वो ना केवल महत्वपूर्ण हैं बल्कि वर्तमान में उपयोगी भी हैं।

जागरुक टीम को उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और अथर्ववेद को जानने और समझने में सहायक भी साबित होगी।

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