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बदन दर्द के कारण और उपचार

आज बात करते हैं बदन दर्द के कारण और उपचार के बारे में (badan dard ke karan aur upay)। व्यस्त जीवनशैली में अक्सर आपको भी शरीर के कई हिस्सों में दर्द की शिकायत रहती होगी जिनमें से सिर दर्द, गर्दन और कमर के दर्द को तो हमने सामान्य दर्द ही मान लिया है लेकिन क्या आप जानते हैं कि शरीर में रहने वाले ये दर्द सिर्फ थकान या काम की अधिकता से ही होते हो ये ज़रूरी नहीं हैं।

बदन में रहने वाले इस दर्द के पीछे कुछ गंभीर कारण या रोग भी हो सकते हैं जिनका समय रहते इलाज ना करा जाये तो छोटी सी लगने वाली ये तकलीफ काफी बड़ी भी हो सकती है। ऐसे में आपको बदन दर्द के कारणों की जानकारी होनी चाहिए ताकि समय रहते इनका उपचार किया जा सके।

बदन दर्द के कारण (badan dard ke karan)

लाइम बीमारी – ब्रोरेलिया बर्गडोरफेरी जीवाणु के कारण लाइम बीमारी होती है जो टिक के काटने से होती है। इस रोग में बहुत अधिक थकान, सिर में तेज़ दर्द, जोड़ों में दर्द और अकड़न, हड्डी और मांसपेशियों में तेज़ दर्द, एकाग्रता और याद्दाश्त में कमी और अच्छी नींद नहीं आने के लक्षण दिखाई देते हैं।

लेकिन अगर स्थिति ज़्यादा ख़राब होने लगती है तो धड़कन का अनियमित होना, तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क की क्रियाप्रणाली में समस्या आने लगती है।

इन सभी स्थितियों को सिर्फ बदन दर्द समझकर खुद दवा लेने का प्रयास मत कीजिये बल्कि तुरंत डॉक्टर के पास जाइये। डॉक्टर द्वारा दी गयी एंटीबायोटिक दवा लेने से आपको राहत मिल सकेगी।

क्रोनिक थकान सिंड्रोम – सामान्य माने जाने वाले बदन दर्द जैसे ही लक्षण इस बीमारी में दिखाई देते हैं लेकिन अगर किसी को बहुत अधिक थकान रहती है तो इस रोग की सम्भावना हो सकती है जिससे राहत पाने के लिए डॉक्टर से परामर्श लेना ही सही विकल्प है।

तनाव – तनाव केवल मानसिक स्वास्थ्य को ही प्रभावित नहीं करता है बल्कि शारीरिक सेहत पर भी काफी बुरा प्रभाव डालता है क्योंकि लगातार तनाव की स्थिति में बने रहने से सिरदर्द, थकान, मांसपेशियों में दर्द, पाचन में गड़बड़ी, सीने में दर्द और अच्छी नींद लेने में समस्या आने लगती है। इसका उपचार सबसे पहले आप के हाथ में हैं।

तनाव को सामान्य समझने की बजाए एक बीमारी समझिये जिससे आप जल्द से जल्द छुटकारा पाना चाहते हों। लेकिन अगर इससे निजात पाना आपको आसान ना लगे तो डॉक्टर से सलाह लेकर आप बेहतर महसूस कर सकते हैं।

आयरन की कमी – रक्त में आयरन की कमी होने से एनीमिया रोग हो जाता है जिसके कारण शरीर के सभी अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुँच पाते हैं। ऐसे में थकान, चिड़चिड़ापन, मांसपेशियों में दर्द, अनियमित मासिक धर्म, बेजान त्वचा जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

इस रोग के उपचार के लिए अपने आहार में आयरन युक्त भोज्य पदार्थों को शामिल करना चाहिए और डॉक्टर की सलाह से आयरन की दवाएं लेकर इस रोग से निजात पायी जा सकती है।

तंत्रिका को क्षति पहुंचना – तंत्रिका तंत्र हमारे शरीर का बहुत अहम तंत्र हैं और अगर किसी कारण से तंत्रिका को कोई क्षति पहुंचे तो पूरे शरीर में दर्द रहने लगता है, मांसपेशियों में ऐंठन और दर्द होने लगता है और झनझनाहट का अनुभव होता है। ऐसा होने पर डॉक्टर के पास जाने में ज़रा भी देरी करना ठीक नहीं है।

विटामिन डी की कमी – विटामिन डी के सीधे स्रोत सूरज से दूरी बना लेने के कारण आजकल हर व्यक्ति को विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा नहीं मिल पाती है और इसके कारण बदन दर्द रहने लगता है। शरीर में विटामिन डी की कमी होने का अर्थ है शरीर द्वारा कैल्शियम का बहुत कम अवशोषण कर पाना।

कैल्शियम की कमी होने पर हड्डियों का कमज़ोर होना स्वाभाविक है जिससे हड्डियों में दर्द, कमज़ोरी और थकान महसूस होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

इसका उपचार करने के लिए अपने आहार को पौष्टिक बनाना, सूर्य की किरणों से आवश्यक मात्रा में विटामिन डी लेना ज़रूरी है और विटामिन डी के सप्लीमेंट्स लेकर भी इस कमी को दूर किया जा सकता है।

फाइब्रोमायोजिया – इस रोग में बदन दर्द, मांसपेशियों में अकड़न, तनाव, अवसाद, पाचन में गड़बड़ी, सूजन, मूत्राशय में दर्द, प्रोस्टेट ग्लैंड और पेल्विक में दर्द और माइग्रेन जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

ऐसे लक्षण दिखाई देने पर इन्हें अनदेखा करने की बजाए तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। इसके साथ-साथ संतुलित आहार, व्यायाम और तनाव कम करने वाली मालिश का सहारा लेकर भी राहत पायी जा सकती है।

ऑस्टिओआर्थराइटिस – इस रोग में दो हड्डियों के बीच कार्टिलेज की मात्रा कम हो जाने से हड्डियों में घर्षण होने लगता है। जिससे बहुत ज़्यादा बदन दर्द होने लगता है, जोड़ों में अकड़न और सूजन आ जाती है, पीठ, नितम्ब और हाथ में दर्द रहता है।

सुबह के समय और ज़्यादा मात्रा में काम करने से ये दर्द बहुत ज़्यादा बढ़ जाता है। इसे सिर्फ बदन दर्द समझकर स्वीकार लेने की बजाए तुरंत अपने डॉक्टर से परामर्श लें ताकि जल्द से जल्द राहत मिल सके।

मल्टीपल स्क्लेरोसिस – मस्तिष्क और मेरुदंड को प्रभावित करने वाली इस अवस्था में हर समय दर्द का अनुभव रहता है। मांसपेशियों में अकड़न, मूत्र में समस्या, झनझनाहट जैसे दर्द का अचानक अनुभव, साफ दिखाई ना देना और सन्न रह जाने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। इस स्थिति में अगर तुरंत उपचार ना कराया जाए तो हालत गंभीर भी हो सकती है।

बदन दर्द के कारण और उपचार

बदन दर्द हल्का हो या ज़्यादा, अगर लगातार बना रहे तो इसे सामान्य नहीं मानना चाहिए क्योंकि हल्का दर्द भी अगर रोज़ होता है तो निश्चित रूप से ये किसी आने वाली बीमारी के संकेत हैं जिन्हें पहचान लिया जाए तो सेहत में सुधार तुरंत हो सकता है।

अब आप ये भी तो जान चुके हैं कि सामान्य बदन दर्द की तरह लगने वाले दर्द कौन-कौनसे रोग साथ ला सकते हैं और किस रोग के क्या लक्षण हैं।

इसलिए अगली बार इस बदन दर्द के लक्षणों को पहचानने का प्रयास ज़रूर करें और अपने डॉक्टर से सलाह लेकर इसे जल्द से जल्द दूर कर लें क्योंकि सेहत है तो ही जीवन में खुशियां हैं।

स्थिति गंभीर होने पर अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। किसी भी परिस्थिति में डॉक्टर से अच्छा कोई मार्गदर्शक नहीं होता और उसकी सलाह का कोई विकल्‍प नहीं है।

उम्मीद है जागरूक पर बदन दर्द के कारण और उपचार (badan dard ke karan aur upay) के बारे में ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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