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भारत की पहली फिल्म

आइये जानते हैं भारत की पहली फिल्म के बारे में। भारतीय सिनेमा जगत आज दुनिया में उतना ही मशहूर है जितना हॉलीवुड। समय के साथ भारतीय सिनेमा में बहुत से बदलाव आए है। लेकिन अगर बात करे पुराने फिल्मी स्वरूप का तो वो बिल्कुल बदल चुका है। अगर कुछ नहीं बदला है तो वो है दर्शकों का मनोरंजन करना।

भारतीय सिनेमा हर साल कई फिल्में लेकर आता है जिसमें दुख-दर्द, रोना-हँसना, हँसी-मजाक, सच-झूठ या किसी की जीवनी जिसे देखकर भावुक होना लाजमी है।

भारत की पहली फिल्म

भारत की पहली फिल्म ”राजा हरिश्चन्द्र” थी जो बिना आवाज की थी। इस फिल्म से ही भारतीय फिल्मों की नींव पड़ी थी। उस जमाने में फिल्म बनाना आज की तरह आसान नहीं था क्योंकि फिल्म में काम करना अच्छा नहीं मानते थे ऊपर से साधन का भी अभाव। लेकिन दादासाहब फालके ने हार नहीं मानी और ”राजा हरिश्चन्द्र” फिल्म के निर्देशक बने।

इशारों में बनी 40 मिनट की यह फिल्म 3 मई 1913 को रिलीज हुई। लोगों ने इस फिल्म को बहुत पसंद किया और इस फिल्म के बाद लोगों की मानसिकता में भी बदलाव आया। इस फिल्म के रिलीज़ होने के बाद भारतीय सिनेमा में चेतना की लहर दौड़ आई और इसके बाद कई फिल्मों का निर्माण हुआ।

दादासाहब फालके ने भारत में फिल्मों की शुरुआत की थी या आप इन्हें भारतीय फिल्मी दुनिया का जनक भी कह सकते है। इसीलिए दादासाहब फालके नाम से एक अवार्ड भी रखा गया। जिसे आज भी दिया जाता है। जो भी फिल्मी सितारा इस अवार्ड को पाता है वो गर्व महसूस करता हैं।

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अब बात करते है भारत की पहली बोलती फिल्म के बारे में! भारत की पहली बोलती फिल्म का नाम है ”आलमआरा”। आलमआरा यानी विश्व की रौशनी! जिसका निर्माण 1931 में और पहला प्रदर्शन 14 मार्च, 1931 मुंबई में हुआ था। इस फिल्म के निर्देशक अर्देशिर ईरानी थे।

इस फिल्म की एक मजेदार बात यह थी की इसकी अधिकांश शूटिंग रात में हुई थी क्योंकि दिन में शोर बहुत होता था। आखिर उस समय फिल्म बनाना कोई आसान तो था नहीं। इस फिल्म के मुख्य कलाकार विट्ठल, जुबैदा, पृथ्वीराज थे। क्या आप जानते है उस समय भी यह फिल्म 39 करोड़ की लागत पर बनी थी जो की एक बहुत बड़ी रकम मानी जाती थी।

इस फिल्म का गाना “दे दे खुदा के नाम पर” जो की भारतीय फिल्मी दुनिया का पहला गाना बना। यह फिल्म एक राजकुमार और एक बंजारन लड़की की प्रेम-कथा पर हैं। जो की एक पारसी नाटक पर आधारित है।

इस फिल्म ने भारतीय फिल्म संगीत की भी नींव रखी थी। क्योंकि उस वक्त पार्श्व गायन का चलन नहीं था इसलिए इस फिल्म के गीतों को हारमोनियम व तबले के संगीत की जुगलबंदी के साथ लाइव रिकॉर्ड किया गया था। यह पहली भारतीय सवाक (बोलती) फिल्म इतनी लोकप्रिय हुई की पुलिस को भी भीड़ पर नियंत्रण पाने के लिए मदद बुलानी पड़ी थी।

आइए कुछ ओर मजेदार फिल्मी बातों को भी जानें की हमारी भारतीय फिल्मी दुनिया कैसी थी।

1. 1943 में बनी फिल्म ”किस्मत” भारत की वो पहली फिल्म थी जिसने एक करोड़ की कमाई का खिताब हासिल किया। इस फिल्म के कलाकार अशोक कुमार और मुमताज थे। यह फिल्म देश-भक्ति की भावना से पूर्णरूप से लिप्त थी। क्योंकि उस वक्त पूरा देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था। ऐसे में इस फिल्म ने लोगों के दिलों में आजादी की एक लहर सी दौड़ा दी थी।

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2. 1937 में 137 मिनट में बनी भारत की पहली रंगीन फिल्म ”किसान कन्या” थी। जो एक नोवल पर आधारित फिल्म थी। इसमें एक निर्धन किसान की बेटी को दर्शाया गया है। इस फिल्म के कलाकार ग़ुलाम मोहम्मद, पद्मा देवी, जिल्लोबाई, निस्सार, सैयद अहमद थे। IMDB के द्वारा 7 पॉइंट को प्राप्त करना उस समय के हिसाब से बहुत बड़ी बात थी।

3. भारतीय फिल्मी जगत ही एकमात्र ऐसी दुनिया है जहाँ बहुभाषित फिल्में बनती है।

4. भारत का सबसे पहला सिनेमा शो 7 जुलाई, 1896 को मुंबई के वाटसन होटल में हुआ था।

5. ज. फ. मदन ने 1907 कोलकाता में “एल्फिंस्टोने पिक्चर पैलेस” नाम से भारत का पहला सिनेमाहॉल बनवाया था।

6. 1897 में बनी सेव दादा भारत की पहली डाक्यूमेंट्री फिल्म थी।

7. लंदन में रीलिज़ होने वाली राजा हरिश्चंद्र भारत की प्रथम फिल्म थी।

8. 1920 में बनी “वत्सला हरण” भारत की पहली फिल्म बनी जिसका प्रचार पोस्टर से किया गया था। यह फिल्म बाबुराओ पेंटर द्वारा बनाई गई थी।

9. 72 गानों की फिल्म ”इंद्रा सभा” 1932 में बनी थी। अभी तक के रिकार्ड में इतने गानों की यह एक मात्र फिल्म हैं।

10. “नीचे नगर” भारत की वो पहली फिल्म बनी जिसे 1946 में अंतर्राष्ट्रीय अवार्ड मिला। यह चेतन आनंद की फिल्म थी।

11. फिल्म सेंसर सेन्ट्रल बोर्ड का गठन 1951 में हुआ था और 1954 में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार का आरंभ हुआ था।

12. भानु अथैया को ”गाँधी” फिल्म के लिए 1982 में ऑस्कर दिया गया था। जो भारत का प्रथम ऑस्कर अवार्ड भी था और भानु अथैया पहली भारतीय भी बनी जिसे ऑस्कर से सम्मानित किया गया।

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13. “हँसते आंसू” 1950 में बनी थी और भारत की पहली फिल्म भी बनी जिसे ”A” प्रमाणपत्र दिया गया था।

भारतीय फिल्मों का इतिहास बहुत ही बड़ा और रोचक है। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को 100 साल से भी ऊपर हो गये। किस तरह इस इंडस्ट्री ने गूंगी फिल्मों से बोलने वाली फिल्मों का सफर तय किया, यह तो आप बहुत हद तक जान ही गये होंगे।

सफर मुश्किल था लेकिन कई लोगों की इच्छाशक्ति ने इसे नामुमकिन में कैद नहीं होने दिया। हमारी तहेदिल से यही शुभकामना है की भारतीय सिनेमा भारत की पहचान को शिखर तक लेकर जायें।

उम्मीद है जागरूक पर भारत की पहली फिल्म कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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