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भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति कौन बनी थी?

आइये जानते हैं भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति कौन बनी थी। भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति व बारहवीं राष्ट्रपति बनने का गौरव माननीय प्रतिभा पाटिल जी को प्राप्त हुआ। एक महिला का देश के सबसे बड़े पद के लिए चयन होना और देश की सर्वोच्च संवैधानिक कार्यालय में नियुक्त पहली महिला होना, यह देश के लिए गौरव की बात हैं।

इनका जन्म 19 दिसंबर 1934 महाराष्ट्र के जलगांव जिले में हुआ। प्राथमिक शिक्षा जलगांव से और कानून में बैचलर की डिग्री मुंबई से प्राप्त की। फिर जलगांव से राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल की। 1965 में देवसिंह रामसिंघ शेखावत से प्रतिभा जी ने शादी की और इनके एक बेटा और एक बेटी है। प्रतिभा जी का पूरा नाम श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल है।

भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति

कैरियर की शुरुआत – प्रतिभा जी ने अपने कैरियर का आरंभ जलगांव के जिला कोर्ट में एक वकील के रूप में किया। जलगांव विधानसभा क्षेत्र से महाराष्ट्र विधानसभा के लिए सिर्फ 27 वर्ष की अवधि में इनको चुना गया। सरकार और महाराष्ट्र विधानसभा में कई पदों पर इन्होंने कार्य किया।

महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्षी के रूप में कार्य किया। 1967-1972 तक शिक्षा के उप मंत्री के पद पर कार्य किया। प्रतिभा पाटिल जी 2004-2007 राजस्थान की राज्यपाल भी रही। इतना ही नहीं प्रतिभा जी विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष, राज्यसभा के सदस्य और व्यापार सलाहकार समिति के सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं प्रदान की।

प्रतिभा पाटिल जी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी से जुड़ी हुई है। 1989-1990 में वे महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस की प्रमुख बनीं। अपने राजनीतिक जीवन में इन्होंने कई पदभार को संभाला जैसे सामाजिक कल्याण मंत्री, शिक्षा उप मंत्री, आवास मंत्री, पर्यटन मंत्री, अध्‍यक्षा, सदन समिति, लोक सभा के साथ ओर भी कई प्रभावशाली पद पर कार्य किया।

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इनका विशेष राजनीतिक जीवन ही इनको राष्ट्रपति पद तक लेकर गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में ”महिला की स्थिति” का आयोजन ऑस्ट्रिया में हुआ और इस सम्मेलन का पूरा नेतृत्व प्रतिभा पाटिल ने किया। इस सम्मेलन के पश्चात 1995 में उन्हें ”विश्व महिला सम्मेलन” चीन में प्रतिनिधि के तौर पर चुना गया।

उपेक्षित वर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए प्रतिभा जी समाज कल्याण और विकास हेतु बहुत से कार्य में अपनी अहम भूमिका निभाई। इनके विकास के लिए कई संस्थानों की स्थापना की। दिल्ली-मुंबई में कामकाजी महिलाओं का होस्टल, जलगांव में ग्रामीण युवाओं के लिए इंजीनियरिंग कॉलेज, श्रम साधना ट्रस्ट (महिलाओं की उन्नति में), नेत्रहीन व दिव्यांगों के लिए जलगांव में औद्योगिक प्रशिक्षण स्कूल, पिछड़े वर्ग के लिए स्कूल, अमरावती में कृषकों के लिए किसान प्रशिक्षण केंद्र आदि की स्थापना की।

इसके अलावा अमरावती में लाचार व गरीब महिलाओं के लिए संगीत, सिलाई, कंप्यूटर व किसानों को फसल उगाने की नई एवं वैज्ञानिक तकनीकें सिखाने की कक्षा के आयोजन में भी अहम भूमिका प्रदान की। इतने कार्य के पीछे उनका एक ही मकसद था और वो था ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विकास व कल्याण।

प्रतिभा जी ने महिलाओं की नींव को मजबूत बनाने व विकास की ओर ले जाने में एक क्रांतिकारी भूमिका अदा की। राजनीति में आने की प्रेरणा इन्हें अपने पिता नारायण राव पाटिल जी से मिली। अच्छे कर्म, सच्ची सेवाभाव व दृढ़ संकल्प के कारण भारतीय इतिहास के पन्नों पर अद्वतीय छाप छोड़ी है। जिसे आने वाली पीढ़ी सदा शिक्षा के रूप में याद रखेगी की एक महिला भी समाज के लिए वो सब कुछ कर सकती है जिसकी कल्पना महिलाएँ अपने जीवन में करती है।

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अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान 35 कैदियों की फांसी को उम्रकैद में तबदील किया। 25 जुलाई 2012 में इनका राष्ट्रपति पद का कार्यकाल पूरा हुआ और अब प्रतिभा जी पूर्णरूप से सामाजिक कार्यकर्ता का जीवन जी रही है। राष्ट्रपति बनने के उपरांत इन्होंने महिला व बाल विकास पर विशेष ध्यान दिया और कई नियमों का उल्लेख करवाया। समय-समय पर प्रतिभा जी महिलाओं व बच्चों से मिलती थी और उनकी समस्या निवारण हेतु तुरंत कदम उठाती थी।

उम्मीद है जागरूक पर भारत की प्रथम महिला राष्ट्रपति कौन बनी थी कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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