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कैंसर की जाँच कैसे होती है?

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आइये जानते हैं कैंसर की जाँच कैसे होती है। ये तो आप भी बखूबी जानते हैं कि हमारा शरीर कोशिकाओं से बना होता है जो नियंत्रित रूप से विभाजित और विकसित होती रहती है। ये एक सामान्य प्रक्रिया होती है लेकिन जब कोशिकाएं अपना नियंत्रण खो देती हैं और अनियंत्रित रूप से बढ़कर एक समूह बना लेती हैं तो ये समूह ट्यूमर कहलाता है और इस तरह शरीर का कोई अंग कैंसर की चपेट में आ जाता है।

कोशिकाओं के आनुवंशिक पदार्थ में जब परिवर्तन होना शुरू होता है तो ये कैंसर के रुप में दिखाई देता है। कैंसर कोशिकाएं शरीर के किसी भी ऊतक में विकसित हो सकती है और एक अंग से शुरू होकर पूरे शरीर में फैल सकती है।

कैंसर क्या है, ये जानने के बाद अब आपको बताते हैं कि कैंसर की जाँच कैसे की जाती है ताकि आप इस प्रक्रिया को समझ सकें।

कैंसर की जाँच कैसे होती है?

तो चलिए, आज जानते हैं कैंसर की जाँच की प्रक्रिया-

कैंसर का निदान– अगर शुरुआती स्तर पर ही कैंसर का पता चल जाये तो उसका इलाज करना संभव हो पाता है। कैंसर के कई प्रकारों में कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट से कैंसर का पता लगाया जाता है।

फिजिकल टेस्ट– सबसे पहले डॉक्टर द्वारा मरीज का फिजिकल टेस्ट किया जाता है जिसमें शरीर के किसी अंग में होने वाली गांठ या असामान्यता का पता लगाया जाता है। त्वचा का रंग बदलना या किसी अंग का आकार बढ़ने जैसे लक्षण कैंसर का संकेत दे सकते हैं।

लेबोरेटरी टेस्ट– ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट के जरिये भी शरीर में कैंसर की उपस्थिति का पता लगाया जा सकता है।

इमेजिंग टेस्ट– कैंसर की जाँच के लिए किये जाने वाले इमेजिंग टेस्ट में सीटी स्कैन, हड्डी स्कैन, एमआरआई, पीईटी टेस्ट, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे शामिल होता है। इस टेस्ट के जरिये डॉक्टर द्वारा शरीर की हड्डियों और अंदरूनी अंगों की स्थिति का पता लगाया जाता है।

कैंसर के निदान की इन प्रक्रियाओं से डॉक्टर को मरीज के शरीर में कैंसर की उपस्थिति और उसकी वर्तमान स्थिति का पता लगता है। इसके बाद कैंसर की प्रकृति और स्टेज के अनुसार उपचार किया जाता है।

कैंसर का उपचार

कैंसर की प्रकृति के अनुसार कुछ मामलों में एक ही प्रकार की ट्रीटमेंट थेरेपी से कैंसर का इलाज हो जाता है जबकि कई मामलों में एक से ज्यादा ट्रीटमेंट थेरेपीज को मिलाकर ट्रीटमेन्ट किया जाता है। कैंसर का उपचार करने की प्रक्रियाएं ये होती हैं-

सर्जरी– कैंसर के इलाज के दौरान सर्जरी से कैंसर को शरीर से बाहर निकाला जाता है।

रेडिएशन थेरेपी– इस प्रक्रिया का इस्तेमाल कैंसर सेल्स को मारने के लिए किया जाता है। इसके लिए हाई रेडिएशन रेज (किरणें) को शरीर के प्रभावित स्थान पर डाला जाता है।

कीमोथेरेपी– इस प्रक्रिया में मरीज को ऐसी दवाएं दी जाती है जो सीधे शरीर में मौजूद कैंसर सेल्स पर हमला करती हैं।

इम्यूनोथेरेपी– इस प्रक्रिया में शरीर के इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग बनाया जाता है ताकि वो कैंसर सेल्स और ट्यूमर को नष्ट कर सके।

टार्गेटेड थेरेपी– इस प्रक्रिया में कैंसर सेल्स में होने वाले उन बदलावों को टारगेट किया जाता है जो कैंसर सेल्स के बढ़ने और फैलने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

हार्मोन थेरेपी– इस प्रक्रिया से महिलाओं में होने वाले ब्रेस्ट कैंसर और पुरुषों में होने वाले प्रोस्टेट कैंसर की गति को कम किया जाता है।

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट– इस प्रक्रिया में उस स्टेम सेल को फिर से बनाया जाता है जो कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी के दौरान मरीज के शरीर में नष्ट हो चुकी होती है।

प्रेसिजन मेडिसिन– इस प्रकार की मेडिसिन्स की मदद से डॉक्टर मरीज के जेनेटिक्स के आधार पर उसकी बीमारी का पता लगा पाते हैं जिससे उसके सही इलाज में मदद मिलती है।

अब आप कैंसर की जाँच से जुड़ी सामान्य जानकारी ले चुके हैं। जागरूक टीम को उम्मीद है कि ये जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी।

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