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क्राउड फंडिंग क्या है?

आइये जागरूक पर जानते हैं क्राउड फंडिंग क्या है। अगर आप सोशल मीडिया से जुड़े हुए हैं और अपना कोई स्टार्टअप भी शुरू करना चाहते हैं लेकिन फण्ड की कमी आपके सपने को पूरा होने से रोक रही है तो क्राउड फंडिंग आपकी मदद कर सकती है।

इसी तरह अगर आप किसी प्रोजेक्ट पर काम करना चाहते हैं जिसका उद्देश्य सामाजिक हित हो तो इसके लिए भी आपको फंड की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में इतना सारा फण्ड कहाँ से लिया जाये? इन सभी समस्याओं का हल क्राउड फंडिंग में छुपा है। ऐसे में क्यों ना आज, हम क्राउड फंडिंग के बारे में ही जानकारी लें जो आपके लिए मददगार साबित हो सके। तो चलिए, आज क्राउड फंडिंग के बारे में जानते हैं।

क्राउड फंडिंग क्या है? (Crowd funding kya hai)

क्राउड फंडिंग उस चंदे का ही नया रुप है जो हम अपने आसपास के लोगों से इकट्ठा किया करते थे और उसका इस्तेमाल किसी जनहित के कार्य में किया करते थे। आज वही चंदा क्राउड फंडिंग के रुप में उभर कर सामने आया है जिसमें सोशल मीडिया के जरिये लोग एक – दूसरे से जुड़ते हैं और किसी एक पर्टिकुलर प्रोजेक्ट, सोशल कॉज या बिजनेस वेंचर में मदद करने के लिए फण्ड इन्वेस्ट करते हैं। इस तरह बहुत – सी जगहों से इकट्ठा हुआ फण्ड उस प्रोजेक्ट को पूरा करने में मदद करता है।

क्राउड फंडिंग के तीन इम्पोर्टेन्ट पार्ट होते हैं-

1. प्रोजेक्ट इनिशिएटर
2. सपोर्टर्स
3. प्लेटफॉर्म

प्रोजेक्ट इनिशिएटर अपने प्रोजेक्ट के बारे में लोगों को सोशल मीडिया के जरिये जानकारी देता है। सपोर्टर्स कैम्पेन को अच्छे से समझकर, पर्सनल और सोशल मीडिया नेटवर्क पर प्रमोट करते हैं ताकि उस कैम्पेन को सक्सेसफुल बनाया जा सके और प्लेटफॉर्म वो जगह अवेलेबल करवाता है जहाँ दो लोग मिल सके, एक तरफ प्रोजेक्ट या कैम्पेन का आयडिया रखने वाला पर्सन और दूसरी तरफ उस कैम्पेन या प्रोजेक्ट में फंड इन्वेस्ट करने वाले लोग।

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Milaap, Wishberry funds, Miracle foundation, RangDe, CrowdCube और Seedrs भारत के पॉपुलर क्राउड फंडिंग प्लेटफॉर्म्स (Crowd funding platforms) हैं। क्राउड फंडिंग प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाने वाली वेबसाइट्स अपनी सर्विस देने के लिए फीस लेती हैं।

भारत में क्राउडफंडिंग के कई प्रकार इस्तेमाल होते हैं-

1. इक्विटी बेस्ड क्राउड फंडिंग:- इस तरह की क्राउड फंडिंग में इन्वेस्टर्स बड़ी मात्रा में पैसा इन्वेस्ट करते हैं ताकि उन्हें किसी स्टार्टअप में इक्विटी का ज्यादा हिस्सा मिल सके। इस तरह की क्राउड फंडिंग भारत में गैर कानूनी है।

2. रिवॉर्ड बेस्ड क्राउड फंडिंग:- इस तरह की क्राउड फंडिंग में इन्वेस्टर को फण्ड इन्वेस्टमेंट के बदले में रिवॉर्ड दिया जाता है जो आर्टिस्ट के नए एलबम की कॉपी भी हो सकता है, कोई वॉच या किसी फिल्म के टिकट जैसा कुछ भी हो सकता है। ये भारत में मान्य है।

3. डोनेशन बेस्ड क्राउड फंडिंग:- इस तरह की क्राउड फंडिंग में डोनर्स अपने हिसाब से किसी नोबल कॉज के लिए दान दे सकते हैं और दान की ये राशि कितनी भी हो सकती है।

4. डेट (debt) बेस्ड क्राउड फंडिंग:- इस प्रकार की क्राउड फंडिंग में कंपनी की सिक्योरिटी में इन्वेस्ट किया जाता है। कंपनी की सिक्योरिटी को डेट इंस्ट्रूमेंट भी कहा जाता है। इसमें कंपनी को लोन के रुप में पैसा दिया जाता है और बदले में कम्पनी निश्चित ब्याज दर पर पैसा लौटाती है।

5. पीपीपी:- इक्विटी बेस्ड मॉडल पर आधारित पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) भी भारत में क्राउड फंडिंग में इस्तेमाल होती है। इसकी जरूरत तब पड़ती है, जब सरकार के पास हजारों – करोड़ रुपयों की घोषणाओं को पूरा करने जितना पैसा नहीं होता है तब सरकार प्राइवेट कंपनियों के साथ एग्रीमेंट करके उन प्रोजेक्ट्स को पूरा करती है।

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क्राउड फंडिंग कम समय में ज्यादा पैसा कलेक्ट करके, अपने स्टार्टअप या सोशल कॉज में इस्तेमाल करने में बहुत मदद करता है लेकिन इसमें रिस्क फैक्टर भी बहुत है क्योंकि अगर स्टार्टअप सक्सेसफुल नहीं हो सका तो इन्वेस्टर्स का फंड लौटना बहुत मुश्किल हो जाएगा। हालाँकि सामाजिक हित के लिए डोनेशन के रुप में मिला हुआ फंड और रिवॉर्ड बेस्ड फंड कलेक्ट करना बहुत आसान हो जाता है।

दोस्तों, क्राउड फंडिंग (Crowd funding) से जुड़ी जानकारी अब आपके पास भी आ गयी है। इसका सही तरह से इस्तेमाल करिये। जागरुक टीम को उम्मीद है  क्राउड फंडिंग क्या है कि ये जानकारी आपको पसंद भी आयी होगी और आपके लिए उपयोगी भी साबित होगी।

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