कर्फ्यू क्या होता है और क्यों लगाया जाता है ?

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आइये जानते हैं कर्फ्यू (curfew) क्या होता है और इसे कब व क्यों लगया जाता है तो आइये जानते है। कोरोना वायरस (Corona Virus) जो की एक महामारी बन चुकी है और पूरे विश्व में अपनी खतरनाक छाप छोड़ रही है। पूरा विश्व इस बीमारी से लड़ने और बचने का उपाय खोज रहा है। इस महामारी के चलते भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने रविवार, 22 मार्च 2020 को जनता कर्फ्यू (curfew) का ऐलान किया था जो की सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ देश के हर नागकारिक ने इस आदेश का पालन किया और अपना सहयोग दिया।

कभी ना कभी हमने न्यूज़ या अख़बारों में कर्फ्यू (curfew) के बारे में जरूर पढ़ा होगा की किसी राज्य या छेत्र, जिले में सरकार द्वारा कर्फ्यू (curfew) लगा दिया गया है लेकिन इसके बारे में पूर्ण जानकारी प्राप्त नहीं कर पाते है। आज कर्फ्यू से जुड़े आपके सभी सवालों के जवाब जागरूक पर देने की कोशिश करेंगे।

किसी भी राज्य, जिले या शहर व छेत्र के हालात ज्यादा बिगड़ने की स्थिति में कर्फ्यू लगाने के आदेश जारी किये जाते है। जिसके तहत लोगों को एक विशेष समय अवधि के लिए लोगों को अपने घरों में ही रहना होता है। कर्फ्यू के दौरान केवल रोजमर्रा की वस्तुओं के लिए घर से बाहर निकला जा सकता है और वो भी एक निश्चित समय के लिए ही, कर्फ्यू के दौरान दुकानें-स्कूल-कालेज सभी पूर्ण रूप से बंद रहते है।

कर्फ्यू क्या है? (curfew kya hai)

कर्फ्यू जिसका अर्थ होता है एक ऐसा आदेश जिसमें घरों से निकलने पर पाबंदी होती है, लोगों के लिए इस आदेश का पालन करना अनिवार्य होता है। इस तरह के आदेश प्रशासन द्वारा जारी किये जाते है ताकि कानून व्यवस्था पूर्ण रूप से बनी रहे। जैसे दंगों, हिंसक प्रदर्शनों या हिंसा की आशंका को देखते हुए कर्फ्यू लगाया जा सकता है।

कर्फ्यू शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच भाषा के couvre-feu से हुई है। couvre-feu का अर्थ होता है आग को बुझाना या छुपाना। “कर्फ़्यू” का प्रारंभ सर्वप्रथम इग्लैंड में विलियम द कांकरर द्वारा राजनीतिक दमन के लिए किया गया था। यह शब्द सर्वप्रथम 16वीं शताब्दी के आसपास चलन में आया उस समय रात के समय गिरजाघरों में घंटी बजाकर लोगों को सूचित किया जाता था, ताकि लोग सोने से पहले अपने घरों में खाना बनाने या किसी दूसरे काम के लिए जलाई गई आग को बुझा दें, ऐसा इसलिए किया जाता था क्योंकि आग जली रहने पर उसके फैलने का खतरा ज्यादा होता था।

घंटी बजाए जाने से लेकर सुबह उठने तक के समय को couvre-feu कहा जाता था। इस दौरान आग का किसी भी तरह का कोई काम नहीं होता था। इसके पश्चात 18वीं सदी के आसपास कर्फ्यू शब्द का इस्तेमाल लोगों की आवाजाही को रोकने के लिए होने लगा था। अगर साधारण शब्दों में कहें तो कर्फ्यू मतलब पाबंदी।

वर्तमान समय की बात करें तो कर्फ्यू (Curfew) पुलिस द्वारा घोषित एक तरह का ऐसा आदेश या आज्ञा होती है जिसका उपयोग विशेष परिस्थितियों में किया जाता है, जैसे की- दंगा, लूटपाट, आगजनी, हिंसात्मक तथा विध्वंसक कार्यों को रोककर पुन: शांति एवं कानून व्यवस्था स्थापित करने तथा नागरिकों की सुरक्षा को बनाये रखने हेतु किया जाता है। वर्तमान में कर्फ़्यू के आदेश का उल्लंघन दंडनीय अपराध है। भारत में कर्फ्यू (curfew) आदेश दंडविधान संहिता की धारा 144 के अंतर्गत कार्यकारी मैजिस्ट्रेटों द्वारा दिया जाता है।

भारत में कर्फ्यू एक ऐसे आदेश की तरह होता है जिसका पालन करना हर किसी के लिए मान्य होता है और अगर कोई भी व्यक्ति इस आदेश की अवहेलना करता है तो यह दंडनीय अपराध होता है और उस व्यक्ति को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया जाता है।

भारत में कर्फ्यू के आदेश के दौरान एक निश्चित समय बाद कुछ प्रतिबंधों को लागू कर दिया जाता है। जिसके लिए सरकार की ओर से एक आदेश जारी किया जाता है और उसके अनुसार लोगों को एक निश्चित समय अवधि तक अपने घरों में रहने को कहा जाता है। ज्यादातर सा‍माजिक सुरक्षा को निश्चित रूप से बनाए रखने के लिए कर्फ्यू लगाया जाता है।

किस तरह लागू किया जाता है कर्फ्यू?

किसी भी राज्य, जिले, शहर या छेत्र में कर्फ्यू ऐसे ही नहीं लगया जाता है। जब प्रशासन को लगता है कि किसी कारण वहां के हालात बेकाबू या फिर हिंसात्मक हो सकते हैं तब प्रशासन द्वारा सबसे पहले उस छेत्र में कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर-1973 यानी CRPC की धारा 144 लागू की जाती है जिसे लागू करने के आदेश डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए जाते हैं।

धारा 144 लागू होने के बाद 5 या इससे ज्यादा लोग एक साथ समहू के रूप में एकत्रित नहीं हो सकते हैं और इस दौरान किसी भी तरह का धरना प्रदर्शन नहीं कर सकते है और इसके बाद अगर प्रशासन को लगता है कि धारा 144 से हालात नहीं सुधर रहे है और लोगों पर इसका कोई असर नहीं हो रहा है तो प्रशासन द्वारा इसे कर्फ्यू में तब्दील कर दिया जाता है। कर्फ्यू के दौरान पुलिस को यह पूर्ण अधिकार होता है की शक के आधार पर वह किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है।

किसी भी छेत्र में कर्फ्यू वाले हालात तभी बनते है जब दंगों का डर हो, शहर या कस्बे के हालात काफी ज्यादा बिगड़ जाने का डर हो या फिर इमरजेंसी के वक्त ऐसा होता हैं। कर्फ्यू (curfew) लगने के बाद किसी भी व्यक्ति को घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं होती है लोगों के घर से बाहर निकलने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा होता है।

इसके अलावा बाजार, दफ्तर और पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर पूर्ण रूप से सरकार द्वारा प्रतिबंध लगा दिया जाता है जैसे की संशोधित नागरिकता कानून (CAA) लागू होने के बाद उत्तर-पूर्व में कई जगहों पर लोगों द्वारा हिंसात्मक प्रदर्शन किया गया था जिस पर काबू पाने के लिए प्रशासन को वहां पर कर्फ्यू लगाना पड़ा और इसी कर्फ्यू को अब कोरोना वायरस के कारण सरकार द्वारा भारत के कई जगहों पर लगाया गया है।

कर्फ्यू (curfew) लगने के बाद किसी भी मजिस्‍ट्रेट या फिर पुलिस ऑफिसर जिसकी रैंक सब इंस्‍पेक्‍टर से नीचे की ना हो, उसके पास यह पूर्ण अधिकार होता है की वह उस संगठन या फिर उस व्‍यक्ति पर फायरिंग कर सकता है जो कर्फ्यू के दौरान कानून व्‍यवस्‍था को हानि पहुंचाने की कोशिश कर रहा हो। इस दौरान किसी भी पुलिस कर्मी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए राज्‍य सरकार की अनुमति लेना जरूरी होती है।

कर्फ्यू के दौरान लोगों के घर से निकलने पर पूर्ण रूप से पाबंदी लगी होती है। इसके अलावा इंटरनेट और मोबाइल के प्रयोग को भी प्रतिबंधित किया जा सकता है ताकि किसी भी तरह की कोई गलत अफवाह ना फ़ैल सके। हालांकि स्थिति सुधरने के पश्चात डीएम कर्फ्यू में कुछ घंटों की ढील का आदेश दे सकते है। कर्फ्यू तोड़ने पर पुलिस सख्त कदम उठा सकती है क्यों की उनके पास पूर्ण अधिकार होते है।

कानून व्यवस्था को पूर्ण रूप से बनाये रखने की जिम्मेदारी राज्य सरकार की होती है। लोग कानून व्यवस्था का पूर्ण रूप से पालन करें और शांति व्यवस्था बनाए रखें इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार होता है और जब प्रशासन को लगता है कि कानून व्यवस्था बिगड़ सकती है तो वह धारा 144 लागू कर सकते है और यदि अगर पूरे राज्य में यह व्यवस्था खराब होती नजर आती है या होने की आशंका होती है तो फैसला राज्य का गृह मंत्रालय लेता है।

इसके अलावा किसी भी जिले में इस तरह के फैसले लेने का अधिकार केवल डीएम के पास होता है, अगर किसी जिले या छेत्र में एक बार धारा 144 लगा दी जाती है तो यह दो महीने तक जारी रह सकती है और इसकी समय अवधि अधिकतम छह महीने तक भी हो सकती है इससे ज्यादा समय तक इस धारा को जारी रखने के लिए दोबारा से इसे लागू करने के आदेश जारी करने होते है। लेकिन ऐसा बहुत कम होता है क्यों की अगर प्रशासन को लगता है की धारा १४४ का पालन नहीं हो रहा है तो उसे कर्फ्यू में तब्दील कर दिया जाता है।

लेकिन कर्फ्यू जैसे हालात में भी अगर प्रशासन की मंजूरी हो तो छात्रों की परीक्षा, शवयात्रा, शादी जैसी जरूरी चीजों पर थोड़ी बहुत छूट दी जा सकती है लेकिन इसके लिए प्रशासन से मंजूरी लेना अनिवार्य होता है, कर्फ्यू (curfew) के दौरान प्रशासन की मर्जी से मेडिकल स्टोर, अस्पताल खुले रहते हैं।

जनता कर्फ्यू क्या है? (Janta Curfew kya hai)

जनता का, जनता के लिए, जनता के द्वारा होने वाला कर्फ्यू जनता कर्फ्यू कहलाता है। कोरोना वायरस महामारी को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार 22 मार्च 2020 को सुबह 7 बजे से शाम 9 बजे तक ‘जनता कर्फ्यू’ लगाने की बात कही थी।

पीएम मोदी ने कहा था कि हमें 22 मार्च, रविवार को सुबह 7 बजे से शाम 9 बजे तक जनता कर्फ्यू का पालन करना है इसके साथ-साथ उन्होंने लोगों को जनता कर्फ्यू का अर्थ भी बताया था की जनता कर्फ्यू, जनता के लिए, जनता की ओर से खुद पर लगाया गया कर्फ्यू है। जिसके तहत उनको अपने घरों में ही रहना है यह कर्फ्यू जनता द्वारा ही लगाया जायेगा इस पर प्रशासन का किसी तरह का कोई दबाव नहीं होगा।

कर्फ्यू और जनता कर्फ्यू में क्या अंतर है? (Curfew and Janta Curfew me antar)

कर्फ्यू और जनता कर्फ्यू में जो सबसे बड़ा अंतर है वह है- जनता कर्फ्यू, जनता का, जनता के लिए, जनता की ओर से खुद पर लगाया जाने वाला एक कर्फ्यू है। ये एक तरह का अनुरोध होता है। जिसके तहत लोगों को अपनी इच्छा से खुद को घरों तक सीमित रखना है और अगर वे अपने घर से बाहर निकलते हैं तो इस पर कोई कार्यवाही नहीं की जाएगी। इसके ठीक विपरीत होता है कर्फ्यू जिस में अनुरोध की कोई गुंजाइश नहीं होती है ये प्रशासन की तरफ से लगाया जाता है। प्रशासन की ओर से लगाए गए कर्फ्यू में नियम तोड़ने पर कार्यवाही की जा सकती है।

उम्मीद है जागरूक पर आप सभी को कर्फ्यू क्या होता है और क्यों लगाया जाता है (curfew kya hota hai, curfew ka matlab kya hota hai से जुड़ी ये जानकारी पसंद आई होगी। आगे भी आपके लिए ऐसी रोचक जानकारी लाते रहेंगे।

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