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डायलिसिस क्या है?

आइये जानते हैं डायलिसिस क्या है और कब पड़ती है इसकी जरुरत। आपने किडनी के बारे में तो पढ़ा ही होगा और आप यह भी जानते है की किडनी हमारे शरीर का कितना महत्वपूर्ण अंग है। किडनी हमारे शरीर से अपशिस्ट और विषाक्त पदार्थो को बहार निकालने का कार्य करती है। अगर हमारी किडनी सही नहीं होगी और यह सही से कार्य नहीं करेगी तो हमारे शरीर में और रक्त में गन्दगी जमा हो जाएगी।

किडनी हमारे शरीर में पानी और खनिज पदार्थो का सामंजस्य बनाए रखने में मदद करती है। जब किडनी किसी बीमारी या किसी ओर वजह से ठीक से अपना कार्य नहीं करती हैं तो शरीर में यूरिया और क्रिएटिनिन जैसे कई अपशिष्ट पदार्थ जमा हो जाते है जिनके कारण किडनी के साथ-साथ हमारे शरीर के कई अंग भी प्रभावित हो जाते है।

डायलिसिस क्या है?

जब किसी व्यक्ति की किडनी अपना कार्य सही से और सुचारु रूप से नहीं कर पाती है तो उस समय उस व्यक्ति को डायलिसिस की जरूरत होती है और यह प्रक्रिया तब तक कि जाती है जब तक उस व्यक्ति की किडनी अपना कार्य वापस सुचारु रूप से ना शुरू कर दें।

यह प्रक्रिया शरीर से अपशिस्ट पदार्थ के साथ-साथ अतिरिक्त पानी को भी हटा देती है और साथ ही उन्हें हमारे शरीर में जमा होने से भी रोकती है। यह हमारे रक्त में सोडियम, बाईकार्बोनेट और पोटेशियम जैसे कुछ केमिकल्स ऑप्टीमल लेवल के भीतर रखना सुनिश्चित करती है और साथ ही साथ ब्लड प्रेसर को भी नियंत्रित करने में मदद करती है।

क्या आप जानते है की एक स्वस्थ व्यक्ति की किडनी करीब 1500 लीटर ब्लड को साफ़ करने में सहायक होती है यदि हमारी किडनी अपना कार्य सही से नहीं करेगी तो हमारे ब्लड में बहुत सारे अपशिष्ट पदार्थ जमा हो जायेंगे जो की हमारे लिए नुकसानदायक होते है इसके कारण स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं जो की जानलेवा भी साबित हो सकती है।

मूत्र के जरिये हम हमारे शरीर से कई सारे अपशिष्ट पदार्थो को बाहर निकालते है और अगर हमारी किडनी सही से कार्य नहीं करेगी तो हमारे शरीर में मूत्र का निर्माण सही से नहीं हो पायेगा जिसके कारण हमारे शरीर में कई व्यर्थ पदार्थ जमा हो जायेंगे और इसके कारण हमें थकान, सूजन, उलटी और साँस से संबंधी जैसी कई परेशानी हो सकती है।

कब होती है डायलिसिस की जरूरत?

  • जब किसी व्यक्ति को किडनी से सम्बंधित बीमारी हो जाती है या फिर किसी व्यक्ति की किडनी शरीर में मौजूद अपशिष्ट पदार्थो को 15% या उससे भी कम मात्रा में निकालती है तो उस व्यक्ति को डायलिसिस देने की आवश्यकता पड़ती है।
  • कई बार मरीज के किडनी की समस्या के दौरान शरीर में पानी इकट्ठा हो जाता है जिसे फ्लूइड ओवरलोड कहा जाता है इस स्तिथि में भी मरीज को डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है।
  • मरीज के शरीर में पोटैशियम की मात्रा बढ़ने पर भी डायलिसिस की आवश्यकता पड़ती है क्योकि पोटैशियम की मात्रा बढ़ने पर मरीज को दिल से सम्बंधित समस्या होने का खतरा होता है।
  • मरीज के शरीर में एसिड की मात्रा बढ़ने पर भी उसे डायलिसिस देने की आवश्यकता पड़ती है।

डायलिसिस के प्रकार- डायलिसिस दो प्रकार का होता है जिसकी प्रक्रिया निम्न प्रकार से हैं-

1. हीमोडायलिसिस– मरीज के शरीर से दूषित रक्त को और अतिरिक्त केमिकल्स को हटाने के लिए हीमोडायलिसिस का प्रयोग किया जाता है। इसके द्वारा मरीज के शरीर में दूषित रक्त और मौजूद अतिरिक्त केमिकल्स को बहार निकला जाता है।

2. पेरिटोनियल डायलिसिस– इस प्रक्रिया के दौरान मरीज की एक सर्जरी की जाती है जिसमें एक कैथेटर को मरीज के पेट क्षेत्र में प्रत्यारोपित किया जाता है और डायलीसेट नामक एक तरल पदार्थ पेट में प्रवाहित होता है और जिसकी सहायता से मरीज के पेट में मौजूद वेस्ट पदार्थो को बहार निकला जाता है।

डायलिसिस के बाद इन बातों का रखें ख्याल

  • मरीज को हमेसा अपने खाने पीने का ख्याल रखना चाहिए तथा अपने डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए की किन-किन प्रोटीन का सेवन करना है और कितनी मात्रा में नमक और तरल पदार्थ का सेवन करना है।
  • मरीज को शराब व धूम्रपान के सेवन से दूर रहना चाहिए इसके सेवन से किडनी की समस्या हो जाती है।
  • डायलिसिस के दौरान मरीज के जिस जगह पर चीरा लगाया है वहां पर लालिमा, सूजन या मवाद जैसी कुछ समस्या है तो तुरंत डॉक्टर को दिखावें।
  • मरीज को यह ख्याल रखना चाहिए की कैथेटर को ढंकने वाली पट्टी सूखी और साफ है ना।
  • डायलिसिस के दौरान उपचार करने वाले व्यक्ति को अपने हाथ अच्छे से धोना चाहिए।

उम्मीद है जागरूक पर डायलिसिस क्या है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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