दोपहर के भोजन के बाद नींद क्यों आती है?

आइये जानते हैं दोपहर के भोजन के बाद नींद क्यों आती है। आपने कई बार महसूस किया होगा की दोपहर के भोजन के तुरंत बाद नींद आने लगती है। आपने यह भी देखा होगा छोटे शिशु तो दूध पीते-पीते ही सोने लग जाते है। भोजन के पश्चात नींद का आना कोई समस्या या बीमारी नहीं है बल्कि यह तो शरीर की सामान्य क्रिया है।

दोपहर के भोजन के बाद नींद की समस्या लगभग हर दूसरे व्यक्ति को है। लेकिन क्या अपने कभी इसपर गौर किया है ना चाहते हुए भी हमारे साथ ऐसा होता क्यों है? आइए जाने की ऐसा होता क्यों है।

दोपहर के भोजन के बाद नींद क्यों आती है?

1. नींद और भोजन का संबंध – नींद और भोजन का अटूट संबंध है। कुछ आहार ऐसे होते है जिनके सेवन से तेज नींद आने लगती है जिन्हें हम स्लीपर्स कहते है। स्लीपर्स आहार में दाल, पनीर, चीज, सी फुड आदि कई चीज़े शामिल है। इनकी पर्याप्त खुराक से शरीर की नसों में खिचाव आता है जो शरीर में भारीपन और आलस पैदा करता है। जिस वजह से तुरंत मीठी नींद आने लगती है।

2. मस्तिष्क में रक्त का संचार हो जाता है कम – भोजन के पश्चात शरीर की पाचन क्रिया अपना काम शुरू कर देती है जिसमें इसे सबसे ज्यादा रक्त की आवश्यकता पड़ती है। साधारणतः हृदय से आने वाला रक्त 28% लीवर, 24% फेफड़े, 15% मांसपेशियाँ, 19% शरीर के अन्य अंगों को और 14% मस्तिष्क को मिलता है।

खाने से लेकर खाने के कुछ समय पश्चात तक मस्तिष्क में रक्त का संचार कम हो जाता है। जिस कारण शारीरिक व दिमागी गतिविधि ढीली पड़ जाती है और सुस्ती व थकान सी आने लगती है। जो नींद आने का मुख्य कारण बनती है।

3. काम का दबाव अधिक होना – मानव शरीर में आंते और दिमाग दो ऐसे महत्वपूर्ण अंग है जो किसी भी कार्य को अच्छी प्रकार से करने के लिए ऊर्जा अधिक लेते हैं। जब व्यक्ति दोपहर के भोजन में अधिक कैलोरी लेता है तो मस्तिष्क उस भोजन से एनर्जी लेकर पाचन क्रिया में लगा देता है।

इसके लिए लाल रक्त कणिकाओं को भोजन से पाचक और पोषक तत्व को ले जाने का निर्देश मस्तिष्क द्वारा ही मिलता है। इतनी क्रिया के दौरान शरीर सुस्ती की चपेट में आने लग जाता है और नींद का सहारा लेता है।

4. गरिष्ठ भोजन – वैज्ञानिको के मतानुसार अधिक गरिष्ठ या कार्बोहाइड्रेट्स युक्त आहार दोपहर में लेने से शरीर भारी हो जाता है और नींद आने लगती है। अधिक भोजन की स्थिति में शरीर में इंसुलिन का स्तर बढ़ जाता है। जिसके परिणाम स्वरूप शरीर में स्लीप हार्मोन्स में बढ़ोतरी होती है और ना चाहते हुए भी नींद आने लगती है।

5. एडेनोसाइन रसायन भी है एक वजह – मस्तिष्क में एक रसायन होता है एडेनोसाइन जो स्लीप ड्राइव को पैदा करता है। इस रसायन के कारण ही सोने की इच्छा जागृत होती है। एडेनोसाइन दोपहर में और रात को ज्यादा सक्रिय होता है। यही कारण है जो भोजन के बाद नींद की इच्छा जागृत करता है।

6. आस-पास का वातावरण – दोपहर में 2 से 3 के बीच वातावरण के तापमान में कुछ गिरावट आती है उस समय शरीर में मेलाटोनिन की छोटी मात्रा जन्म लेती है। यह एक ऐसा हर्मोन है जो आपको किसी भी समय सुलाने में सक्षम है। आस-पास का माहौल जब आरामदायक हो तो भोजन के पश्चात स्वयं ही नींद आने लग जाती है।

यह तो हुए दोपहर के भोजन के बाद नींद आने के कारण। कारण सभी के लिए अलग-अलग हो सकते है। आइए इस समस्या पर नियंत्रण कैसे पाए उसके बारे में संक्षिप्त में जानें।

स्लीपर्स के विपरीत कुछ खाद्य ऐसे भी होते है जो दिमाग को अधिक सक्रिय और क्रियाशील बनाने में सक्षम है। जैसे चाय, कॉफ़ी, स्नैक्स, कोला, चॉकलेट, ग्रीन टी, अधिक चीनी के खाद्य पदार्थ जिन्हें वेकर्स के नाम से जाना जाता है। इनके सेवन से नींद गायब हो जाती है।

दोपहर के भोजन के बाद आने वाली नींद से बचना चाहते है तो दोपहर में हल्का और कम भोजन करे। इससे दोपहर की नींद आपके कार्य में किसी भी तरह से रुकावट पैदा नहीं करेगी। दोपहर के भोजन के पश्चात कुछ देर हल्की सैर या चलना रक्त संचार को बढ़ाता है जिससे थकान दूर होती है।

रात की नींद पूरी ले। पानी में कमी ना लाए। पोष्टिक लेकिन हल्का आहार ले। दोपहर की नींद से ध्यान हटाने के लिए च्युइंग-गम, संगीत, कुछ देर की गप-सप आदि किसी भी चीज का सहारा ले सकते है जो आपको पसंद हो।

उम्मीद है जागरूक पर दोपहर के भोजन के बाद नींद क्यों आती है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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