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ग्रेगोरियन कैलेंडर का इतिहास

आइये जानते हैं ग्रेगोरियन कैलेंडर का इतिहास (gregorian calendar ka itihas)। साल के ख़ास त्यौहारों, महीने की छुट्टियों और विशेष दिनों के बारे में जानने के लिए आप भी कैलेण्डर का इस्तेमाल जरूर करते होंगे और हो सकता है कि आपके पास कई तरह के कैलेंडर भी हों लेकिन सबसे ज्यादा उपयोग में आने वाला कैलेंडर ग्रेगोरियन कैलेंडर है जिसे दुनिया के लगभग हर कोने में अपनाया गया है।

ऐसे में इस कैलेंडर के बारे में जानकारी लेना आपके लिए रोचक और फायदेमंद हो सकता है इसलिए आज आपको बताते हैं ग्रेगोरियन कैलेंडर के बारे में।

ग्रेगोरियन कैलेंडर का इतिहास (gregorian calendar ka itihas)

ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी को नए साल का पहला दिन होता है और इस कैलेंडर की शुरुआत 1582 में पोप ग्रेगोरी 13वें ने की थी। इससे पहले जूलियन कैलेंडर प्रचलन में हुआ करता था जिसमें बहुत सी ग़लतियाँ मौजूद थी जिन्हें दूर करके पोप ग्रेगोरी ने ग्रेगोरियन कैलेन्डर बनाया।

ग्रेगोरियन कैलेंडर की मूल इकाई दिन होता है और 365 दिनों से मिलकर एक साल बनता है लेकिन हर चौथे साल में दिनों की संख्या 366 होती है और ऐसे साल को लीप ईयर कहा जाता है।

सूर्य पर आधारित ये पंचांग हर 146,097 दिनों बाद दोहराया जाता है। इसे 400 सालों में बांटा गया है और इन 400 सालों में से 303 साल सामान्य वर्ष होते हैं यानी इनमें दिनों की संख्या 365 होती है जबकि 97 लीप ईयर होते हैं जिनमें 366 दिन हुआ करते हैं। हर साल में 365 दिन, 5 घंटे, 49 मिनट और 12 सेकेंड होते हैं।

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इस ग्रेगोरियन कैलेंडर को पूरी दुनिया में एकसाथ नहीं अपनाया गया था बल्कि देशों द्वारा अलग-अलग समय पर इस कैलेंडर को स्वीकारा गया।

इटली, फ्रांस, स्पेन और पुर्तगाल ने 1582 ईस्वी में इस नए कैलेंडर के अनुसार चलना शुरू किया जबकि प्रशिया, स्विट्जरलैंड, हॉलैंड और फ्लैंडर्स ने 1583 ई. में, पोलैंड ने 1586 ई. में, हंगरी ने 1587 ई. में, डेनमार्क ने 1700 ई. में, ब्रिटिश साम्राज्य ने 1752 ई. में, जापान ने 1972 ई. में, चीन ने 1912 ई. में, बुल्गारिया ने 1915 ई. में, तुर्की और सोवियत रूस ने 1917 ई. में और युगोस्लाविया और रोमानिया ने 1919 ई. में स्वीकार किया।

उम्मीद है जागरूक पर ग्रेगोरियन कैलेंडर का इतिहास (gregorian calendar ka itihas) कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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