हाइड्रोपोनिक्स क्या है?

आइये जानते हैं हाइड्रोपोनिक्स क्या है। आज हम जागरूक पर आपको बिना मिट्टी के पौधों और सब्जियों को कैसे उगाएं यह जानकारी देने जा रहे हैं। हमारे भारत देश में कहाँ-कहाँ बिना मिट्टी से पौधे उगाने की तकनीक का उपयोग हो रहा है यह इस लेख के माध्यम से आपके साथ साझा करने जा रहे हैं।

आजकल बाग़वानी और घर में सब्जी उगाने का मन सभी का होता है और क्यों न हो इसका कोई सवाल ही नहीं है। हमारे स्वास्थ्य की सही देखभाल करने के लिए हमारे मन में सब्जियों को घर में ही उगाने का ख्याल आता है।

बाजार में पायी जाने सब्जियों को अत्यधिक मात्रा में रासायनिक पदार्थ को मिला कर तैयार किया जाता है जो कि हमारे शरीर में भयंकर बीमारियों को पैदा करने के लिए जिम्मेदार साबित हो सकती है।

आपके मन में भी कभी पौधों को उगाने का विचार आया होगा परंतु मिट्टी न होने की वजह से आप इस सपने को आगे पूरा नहीं करते हैं। अगर हम आपको बताएं कि आप बिना मिट्टी के पेड़-पौधों को उगा सकते है और उनमें सब्जियों को बो सकते है।

बिना मिट्टी की से पेड़-पौधों को उगाने की तकनीक को हाइड्रोपोनिक्स कहते हैं। आज हम इस लेख में हाइड्रोपोनिक्स क्या है और इस तकनीक से आप अपने घर या फ्लैट में किस प्रकार पौधे और सब्ज़ियाँ को उगा सकते है और इसके क्या फायदे और नुकसान है ये सब आप विस्तार से बताने जा रहे हैं|

हम आपके साथ हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से पूछे गए इन कुछ प्रश्न के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। अगर आपके मन में हाइड्रोपोनिक्स से लेकर और भी प्रश्न है तो आप हमसे पूछिए, हम आपके प्रश्न के बारे उत्तर देने की पूरी-पूरी कोशिश करेंगे।

• हाइड्रोपोनिक्स क्या है?
• हाइड्रोपोनिक्स शब्द की उत्त्पति कैसे हुई?
• हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के लिए घोल कैसे तैयार किया जाता है?
• हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के लिए घोल का छिड़काव क्यों है ज़रूरी?
• हाइड्रोपोनिक खेती के लिए कितने तापमान व आर्दता की की ज़रूरत होती है ?
• हाइड्रोपोनिक्स खेती से होने वाले लाभ क्या क्या हैं?
• वर्तमान में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का उपयोग कहाँ कहाँ हो रहा है ?
• हाइड्रोपोनिक्स खेती में आने वाली समस्याएँ

हाइड्रोपोनिक्स क्या है?

पौधों को बिना मिट्टी के उगाने की प्रकिया को “हाइड्रोपोनिक्स” कहा जाता है। इस तकनीक में पानी में कुछ घोल को तैयार करके उससे पौधों के साथ-साथ सब्जियों को भी उगाया जाता है। पानी में इस तरह आवश्यक खनिज एवं पोषक तत्व मिलाएँ जाते हैं जिससे की पौधों की बढ़वार में सहायक हो सके।

हाइड्रोपोनिक्स शब्द की उत्तपत्ति कैसे हुई?

हाइड्रोपोनिक शब्द दो ग्रीक शब्दों ‘हाइड्रो’ (Hydro) तथा ‘पोनोस (Ponos) से मिलकर बना है।

हाइड्रो का मतलब है- पानी,
पोनोस का अर्थ है- कार्य

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के लिए घोल कैसे तैयार किया जाता है?

बिना मिट्टी के आप पौधों को पानी, कंकड़ों या बालू आदि में उगा सकते हैं। इसके लिए एक विशेष प्रकार के घोल को बनाया जाता है इस घोल में कैल्शियम, सल्फर, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश, मैग्नीशियम, जिंक और आयरन आदि तत्वों को सही अनुपात में डाल कर तैयार किया जाता है और पौधों पर एक महीने में एक-दो बार केवल कुछ बूँदें छिड़की जाती है।

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के लिए घोल का छिड़काव क्यों है ज़रूरी?

यदि आप बिना मिट्टी के पौधों को उगाना चाहते है तो आपको पौधों के विकास और वृद्धि के लिए कुछ पोषक तत्व को मिलाना पड़ता हैं ताकि आपके द्वारा उगाए हुए पौधों का विकास हो सके। आपके द्वारा सही अनुपात में तैयार किया गया घोल पौधों के बढ़ोत्तरी के लिए सहायक होता है।

हाइड्रोपोनिक खेती के लिए कितने तापमान व आर्दता की ज़रूरत होती है?

हाइड्रोपोनिक्स में पौधों को 15 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर लगभग 80 से 85 प्रतिशत (नमी) आर्द्रता में उगाया जाता है।

हाइड्रोपोनिक्स खेती से होने वाले लाभ क्या-क्या हैं?

1. हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के लाभ से उन जगह भी पौधे उगाएं जा सकते हैं जहां मिट्टी की कमी के साथ ज़मीन की भी कमी पायी जाती है|

2. अगर आप कम खर्च में अपने घर में ही बाग़वानी करने के शौक को पूरा करना चाहते हैं तो आप हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से बेहद कम खर्चे में पेड़-पौधों और सब्जियों की उगाई कर पाएँगे।

3. आपको पौधों की वृद्धि के लिए आवश्यक घोल की बुँदे की जरूरत 1 महीने में 2 से 3 बार ही होती है इसके लिए आपको महंगे मात्रा में बाजार में उपलब्ध खनिज पदार्थ की जरूरत नहीं पड़ती है, इससे आपके पैसों की भी बचत होती है।

4. हाइड्रोपोनिक्स तकनीक से पौधों और सब्जियों के लिए पानी का 20 प्रतिशत भाग ही पर्याप्त है।

5. आपको हाइड्रोपोनिक्स तकनीक में कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं करना पड़ता है क्योंकि इस विधि में पौधों का ज़मीन और मिट्टी से कोई संबंध नहीं होता, ज्यादातर इस तकनीक से पौधों का उत्पादन पाइप के अंदर ही किया जाता है।

6. इस तकनीक में रासायनिक पदार्थों की बहुत ही कम मात्रा उपयोग में ली जाती है इससे पर्यावरण में प्रदूषण को कुछ हद तक नियंत्रण में किया जा सकता है।

7. हाइड्रोपोनिक्स विधि से आप अपने घरों एवं फ्लैटों में पौधे उगाने के साथ-साथ बाहर खेतों में भी फ़सलों को बो सकते है| यह तकनीक दोनों में ही सहायक होती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की आपको इस तकनीक में ज्यादा स्थान की जगह बहुत कम स्थान की आवश्यकता होती है।

8. हाइड्रोपोनिक्स से आप अगर अनाज को बोना चाहते है तो यह तकनीक आपके लिए वरदान साबित हो सकती है इससे आप गेहूँ और अनाज जैसे पौधे 7 से 8 दिन में तैयार कर सकते हैं जबकि सामान्यतः इनके पौधों को तैयार होने में 28 से 30 दिन लगते है।

वर्तमान में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का उपयोग कहाँ कहाँ हो रहा है?

हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का उपयोग हमारे भारत में वहां ज्यादातर किया जा रहा है जहाँ मिट्टी की कमी है। राजस्थान जैसे शुष्क क्षेत्रों में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के उपयोग से पौधे और सब्जियों को उगाना एक वरदान के रूप में साबित हुआ है। पंजाब में सब्जियों जैसे आलू को उगाने में हाइड्रोपोनिक्स तकनीक का बहुत सहयोग बताया जा रहा है।

हाइड्रोपोनिक्स खेती में आने वाली समस्याएं

ज्यादा खर्चे की आवश्यकता– हाइड्रोपोनिक्स तरीके से खेती करने में आपको परंपरागत विधि की अपेक्षा ज्यादा खर्चे की आवश्यकता पड़ सकती है।

उम्मीद है जागरूक पर हाइड्रोपोनिक्स क्या है ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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