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इनसोम्निया क्या है?

आइये जानते हैं इनसोम्निया क्या है (insomnia kya hai)। ज्यादा सोने की आदत को अच्छा नहीं माना जाता है लेकिन अगर नींद ना आने की बीमारी (neend ki samsya) हो जाये तो इससे निपटना आसान नहीं होता है। इसे अनिद्रा (anidra) या इनसोम्निया (insomnia) कहते हैं।

इसका कारण असंतुलित जीवनशैली है और इसकी वजह से डिप्रेशन, घबराहट, सेल्फ कॉन्फिडेंस में कमी जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं। ऐसे में इनसोम्निया के बारे में जानकारी लेना बेहतर होगा इसलिए आज बात करते हैं इनसोम्निया की।

इनसोम्निया क्या है? (insomnia kya hai)

अनिद्रा के प्रकार (anidra ke prakar)-

टांजिएंट इनसोम्निया – इस प्रकार का इंसोम्निया कुछ दिनों से कुछ हफ्तों तक रहता है।

टांजिएंट इंसोम्निया के कारण – तनाव या अचानक हुए बदलाव। इनके अलावा माहौल में हुए बदलाव, ज्यादा काम करने या ज्यादा घूमने की स्थिति में भी टांजिएंट इनसोम्निया हो जाता है लेकिन इसमें व्यक्ति को किसी तरह की चिकित्सा की जरुरत नहीं पड़ती है।

क्रानिक इनसोम्निया – इंसोम्निया के इस प्रकार में मरीज ये सोच-सोचकर परेशान होता रहता है कि उसकी नींद पूरी नहीं हुयी है।

क्रानिक इंसोम्निया के कारण – लम्बे समय तक नींद ना आना। ऐसे में नींद के लिए दवा लेना जरुरी हो जाता है। हाइपरटेंशन, एलर्जी, हार्ट प्रॉब्लम्स और आर्थराइटिस जैसी बीमारियां भी क्रानिक इंसोम्निया का कारण बनती है।

इनसोम्निया से बचाव के तरीके (anidra ke upay)-

  • रात में तभी सोने जाए, जब आपको पूरी तरह से नींद आ जाए
  • इंसोम्निया से बचाव के लिए व्यायाम करना भी एक बेहतरीन उपाय है

रिलैक्सेशन थैरेपी – इस थैरेपी से शारीरिक तनाव और परेशानी में राहत मिलती है।

कॉग्निटिव बिहेवियरल थैरेपी – इस थैरेपी में व्यक्ति को नेगेटिव विचारों से दूर रखा जाता है और अच्छी नींद लेने के कुछ तरीके बताये जाते हैं।

साइकोलॉजिस्ट की सहायता से इंसोम्निया के भावुक कारणों को कण्ट्रोल करना संभव हो सकता है।

इंसोम्निया की कई स्थितियों में मरीज के लिए दवा लेना भी जरुरी हो जाता है। ऐसे में डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही दवा लेनी चाहिए।

उम्मीद है जागरूक पर इनसोम्निया क्या है (insomnia kya hai) कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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