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मन पर नियंत्रण कैसे करें?

आइये जानते हैं मन पर नियंत्रण कैसे करें (man ko niyantran kaise kare)। मन के हारे हार है, मन के जीते जीत.. ये तो आप ने सुना ही होगा लेकिन क्या इस बात का ये अर्थ लगाया जाए कि हमारे जीवन के सभी अहम फैसलों में मन का ही हाथ होता है?

कई बार आपने अपने आसपास के लोगो को ये कहते सुना भी होगा और आप खुद भी अक्सर यही कहा करते होंगे कि आज मन नहीं है, आज मन खुश है और कभी महसूस करते होंगे कि आज मन उदास है।

कई बार ये सवाल आपको भी बेचैन करता होगा कि आखिर मन है क्या? दरअसल मन हमारे विचारों की श्रृंखला है जो हमारे अंदर, बिना रुके लगातार चलते ही रहते है।

ये विचार ही है, जो हमारे हर अच्छे-बुरे फैसले के लिए ज़िम्मेदार होते है और देखते ही देखते मन हमारे पूरे व्यक्तित्व पर अधिकार कर लेता है। हम इस बात से अनजान रहते हैं कि हमें मन द्वारा नियंत्रित नहीं होना है बल्कि स्वयं के मन पर नियंत्रण रखने की जरुरत है।

आप ये भी जानते हैं कि जब किसी भी चीज़ का दमन किया जाता है तो वो कुछ समय के लिए ज़रूर थम जाती है लेकिन कुछ वक़्त बात तेज़ी से वापिस भी आ जाती है। बिलकुल ऐसा ही मन के मामले में भी होता है।

हमेशा के लिए मन पर नियंत्रण कर पाना संभव नहीं हो सकता, इसलिए बेहतर ये है कि हम अपने मन को सही दिशा में लगाए ताकि हम मन के नियंत्रण से बाहर निकल सके।

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तो चलिए, आज आपको बताते हैं कि अपने इस मन पर नियंत्रण (man par niyantran) के लिए आपको क्या करने की जरुरत है।

मन पर नियंत्रण कैसे करें? (man ko niyantran kaise kare)

अपने अन्न पर ध्यान दीजिये – जैसा खावे अन्न,वैसा होवे मन… ये कहावत आपने कभी ना कभी सुनी ही होगी। जैसी प्रकृति हमारे भोजन की होगी, वैसा ही हमारे मन का स्वभाव होगा।

अगर आप सात्विक और पौष्टिक भोजन करते हैं तो आपके मन की अस्थिरता और चंचलता भी कम ही होगी लेकिन अगर आप तामसिक और पोषण रहित अन्न खाते हैं तो आपका मन ज़्यादा अधीर, चंचल और अनियंत्रित होता जायेगा।

व्यायाम है ज़रूरी – मन को शांत और संयमित बनाने में हमारे शरीर की भी खास भूमिका होती है। निष्क्रिय शरीर में निष्क्रिय मन ही निवास कर सकता है।

लेकिन अगर शरीर चुस्त दुरुस्त और ऊर्जा से भरपूर हो तो मन में भी उल्लास और सकारात्मक भाव विकसित होते हैं। इसलिए शरीर को स्वस्थ और तंदुरुस्त रखने के लिए व्यायाम बेहद ज़रूरी है।

ध्यान की भूमिका अहम है – यूँ तो ध्यान करने से तन और मन के सभी विकार खुद-ब-खुद दूर हो जाते हैं। लेकिन मन पर नियंत्रण के लिए ध्यान करना सबसे बेहतरीन विकल्पों में से एक है।

ध्यान करने से आपका मन यहाँ वहाँ भागना बंद कर देगा और इसे एक सही और निश्चित दिशा में एकाग्र करना आपके लिए काफी आसान हो जायेगा।

मन पर नियंत्रण कैसे करें

अच्छी संगत होगी मददगार – मन में कैसे विचार चलेंगे, ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि हम रोज़ाना किन चीज़ों, लोगों और परिस्थितियों से मिलते हैं।

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अच्छी किताबें पढ़ने से अच्छे और सकारात्मक विचार ही मन में जगह बना पाते है जिससे मन सही दिशा में केंद्रित रहता है और आसपास के माहौल और हमारी संगत अगर अच्छी है तो मन के ग़लत राह पर भटकने का ख़तरा नहीं रहता।

वाणी पर संयम भी है ज़रूरी – तोल मोल के बोल…इसका अर्थ आप जानते है कि बोलने से पहले भली प्रकार से सोच लेना चाहिए। मन और हमारे शब्दों का गहरा सम्बन्ध होता है।

मन जितना अस्थिर उतने ही अनियंत्रित और कड़वे हमारे बोल और मन जितना शांत उतनी ही स्पष्ट और निश्छल हमारी बोली। इसलिए मन पर नियंत्रण के लिए क्यों न बोली पर संयम रखना शुरू किया जाए।

ऐसा कर पाना थोड़ा कठिन लग सकता है लेकिन शुरू में बोली पर रखा गया नियंत्रण बहुत जल्द आपके मन को भी नियंत्रित करने लगेगा।

व्यस्त रहने से हल होगी मुश्किल – खाली दिमाग शैतान का घर होता है। यानि जब आपके पास व्यस्त रहने का कोई विकल्प नहीं होता है, उस समय आपका मन अनियंत्रित विचारों से घिर जाता है। जो अक्सर नकारात्मक ही होते है और ऐसे विचार आपके व्यक्तित्व को काफी नुकसान पहुंचाते है।

इससे बचने के लिए जरुरी है कि खुद को किसी निश्चित कार्य में व्यस्त रखा जाए ताकि मन में आने वाले विचार भी उस कार्य के लक्ष्य को प्राप्त करने में ही व्यस्त बने रहे।

केवल मन की निंदा करने और उसके द्वारा नियंत्रित होते रहने की स्थिति में आप अपने जीवन के खुशनुमा लक्ष्य से काफी दूर रह जाएंगे।

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इससे बेहतर है कि आप मन को संयमित करने और इसके नियंत्रण से स्वयं को मुक्त करने के लिए इन सभी सुझावों पर अमल करने का प्रयास करें। कुछ ही वक़्त में अपने मन को अपनी मनचाही दिशा में मोड़ने में सफलता पा लें।

उम्मीद है जागरूक पर मन पर नियंत्रण कैसे करें (man par niyantran kaise kare, man ko niyantran kaise kare) कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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