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कालिदास कौन थे और उनका भारतीय साहित्य में क्या योगदान है?

आइये जागरूक पर जानते हैं कालिदास कौन थे और उनका भारतीय साहित्य में क्या योगदान है। महाकवि कालिदास के बारे में आप जरूर जानते होंगे और शायद आपने उनकी महान रचनाओं में से कुछ का अध्ययन भी किया हो लेकिन अगर आप महाकवि कालिदास से जुड़ी बहुत सी महत्वपूर्ण जानकारियां लेना चाहते हैं तो इस लेख में हमारे साथ जुड़े रहें क्योंकि आज हम कवि कालिदास और उनकी महान रचनाओं के बारे में बात करने वाले हैं।

तो चलिए, जानते हैं कालिदास और उनकी रचनाओं के बारे में-

  • महाकवि कालिदास भारत के ऐसे महान कवि और नाटककार थे जिनकी गिनती दुनिया के महानतम साहित्यकारों में की जाती है। संस्कृत भाषा के कवि कालिदास की रचनाएँ भारत की पौराणिक कथाओं और दर्शन पर आधारित हुआ करती थी। कालिदास का जन्म प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व से छठी शताब्दी ईसवी के मध्य का माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि अपने शुरुआती जीवन में कालिदास अनपढ़ और मूर्ख थे लेकिन उनके जीवन को दिशा तब मिली जब उनका विवाह शास्त्रार्थ में महारत रखने वाली राजकुमारी विद्योत्तमा से हुआ। राजकुमारी ने कालिदास को ज्ञानी समझकर उनसे विवाह किया लेकिन जब उसे कालिदास की मूर्खता का बोध हुआ तो उसने कालिदास को घर से बाहर निकाल दिया और विद्वान बने बिना घर वापिस ना लौटने को कहा। कालिदास ने भी विद्वान बनने की ठानी और विद्वान बनने के बाद ही घर वापिस लौटे।
  • उन्होंने विद्योत्तमा को अपनी पथ प्रदर्शक गुरु स्वीकारा और अपने काव्य में भी उसका ज़िक्र किया। आगे चलकर कालिदास विक्रमादित्य के दरबार के नवरत्नों में शामिल हुए।
  • कालिदास जी की रचनाएँ सरल और मधुर भाषा में हैं और उनमें अलंकार का इस्तेमाल बहुत अच्छे से किया गया है। उनकी रचनाओं में शृंगार रस का अद्भुत तरीके से किया गया वर्णन भी है। कालिदास जी के साहित्य की विशेषता उसमें शामिल संगीत भी रहा है। उन्होंने ऋतुओं का बहुत स्पष्ट और मनोरम वर्णन किया है। इसके अलावा उन्होंने आदर्शवादी परम्पराओं और नैतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए ही अपनी रचनाओं को निर्मित किया।
  • कालिदास अपनी रचनाओं में प्रयोग की जाने वाली उपमाओं के लिए विशेष रुप से जाने जाते हैं। उनका प्रकृति वर्णन भी अद्वितीय है और शृंगार रस के वर्णन में भी वो अग्रणी रहे।
  • भारतीय साहित्य में महाकवि कालिदास का बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके द्वारा रचित सात कृतियां विशेष हैं जिनमें तीन नाटक, दो महाकाव्य और दो खंड काव्य शामिल हैं।
  • कालिदास की पहली रचना ‘मालविकाग्निमित्रम्’ नाटक है।
  • उनकी दूसरी रचना ‘अभिज्ञान शाकुन्तलम्’ है जिसने उन्हें विश्व में प्रसिद्धि दिलाई। इस नाटक में राजा दुष्यंत और शकुंतला के प्रेम की कहानी है। इस नाटक में शृंगार रस की प्रधानता है। ये नाटक इतना प्रसिद्ध हुआ कि इसका अनुवाद अंग्रेजी और जर्मन के अलावा दुनिया की कई और भाषाओं में भी हुआ।
  • कालिदास द्वारा रचित तीसरा नाटक ‘विक्रमोर्वशीयम्’ है जो रहस्य से भरपूर नाटक है। इसमें पुरुरवा और उर्वशी के प्रेम की कहानी है।
  • कालिदास द्वारा रचित महाकाव्य ‘कुमारसंभवम्’ और ‘रघुवंशम्’ हैं। कुमारसंभवम् में शिव – पार्वती की प्रेमकथा और कार्तिकेय के जन्म की कहानी है और रघुवंशम् में सम्पूर्ण रघुवंश के राजाओं की गाथाएं हैं।
  • कालिदास द्वारा रचित खंडकाव्य ‘मेघदूतम्’ और ‘ऋतुसंहारम्’ है। ‘मेघदूतम्’ में सभी ऋतुओं में प्रकृति के विभिन्न रूपों का विस्तार से और बहुत मनोरम रुप में वर्णन किया गया है। इस रचना में कवि कालिदास ने प्रकृति का मानवीकरण करने में अद्भुत कल्पनाशक्ति का इस्तेमाल किया है और ‘ऋतुसंहारम्’ गीतिकाव्य है जिसमें यक्ष द्वारा मेघ से सन्देश ले जाने की प्रार्थना और उसे दूत बनाकर अपनी प्रिय के पास भेजने का वर्णन है।

दोस्तों, महाकवि कालिदास का भारतीय साहित्य के विकास में इतना महत्वपूर्ण योगदान रहा है कि उन्हें कविकुलगुरु और कनिष्ठिकाधिष्ठित जैसी प्रशंसात्मक उपाधियाँ दी गयी हैं और उनकी रचनाएँ आज भी साहित्य जगत में अपना ऊँचा और सम्माननीय पद बनाये हुए हैं।

जागरुक टीम को उम्मीद है कि कवि कालिदास के जीवन से जुड़ी ये विशेष जानकारी आपको पसंद भी आयी होगी और महाकवि कालिदास की रचनाओं को पढ़ने के लिए प्रेरित भी कर पायेगी।

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