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एल्युमीनियम के बर्तन में खाना पकाने के नुकसान

आइये जानते हैं एल्युमीनियम के बर्तन में खाना पकाने के नुकसान (aluminium ke bartan me khana banane ke nuksan)। पुराने समय को देखते हुए आज का समय बहुत ही आधुनिक है, ऐसे में जाहिर तौर पर लोगों का रहन-सहन भी बदला है। समय के साथ खुद में बदलाव लाना कोई गलत नहीं लेकिन स्वास्थ्य के मूल्य के आधार पर कुछ बदलाव बहुत ही घातक सिद्ध हो सकते है। जी हाँ, आज हम चर्चा करेंगे की हम जिन बर्तनों का उपयोग खाना बनाने में करते है क्या वो हेल्दी है।

पुराने जमाने में भोजन पकाने का एक मात्र साधन मिट्टी के बर्तन थे लेकिन आज ऐसा नहीं है। आज लोगों के पास अत्याधुनिक साधन उपलब्ध है जल्द से जल्द काम को पूरा करने का। फिर चाहे वो खाना बनाने का हो या और कुछ।

भोजन पकाने में आज सबसे ज्यादा पीतल, काँसा, चाँदी, लोहा, एल्युमीनियम, स्टील और नॉन-स्टिक कुकवेयर का उपयोग होता है। इन सभी बर्तनों में भोजन पकाने के कुछ अपने फायदे और नुकसान है लेकिन एल्युमीनियम के बर्तन में खाना पकाना स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।इसमें बना भोजन किसी भी लिहाज से स्वास्थ्यवर्धक नहीं हैं बल्कि नुकसानदायक ही है।

चौका देने वाली बात यह है की इतने नुकसानदायक बर्तन की पहुँच आज सभी रसोई घरों में अधिक मात्रा में है। एल्युमीनियम बर्तन का उपयोग सबसे अधिक इन दो कारणों की वजह से होता है पहला- इनमें भोजन जल्दी पकता है और दूसरा- यह बर्तन अन्य बर्तनों की तुलना में सस्ते होते है। अब प्रश्न यह उठता है की क्या सस्ते के चक्कर में स्वास्थ्य के साथ समझौता करना सही है।

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एल्युमीनियम के बर्तन में खाना पकाने के नुकसान (aluminium ke bartan me khana banane ke nuksan)

एल्युमीनियम के बर्तन में बने खाने के माध्यम से हमारे शरीर में धीमी गति से जहर पहुँचता है जिसका असर एक लंबे अंतराल के बाद अवश्य दिखता है। इन बर्तनों में बने खाने का स्वाद और रंग दोनों बदल जाता है क्योंकि 4 से 5 मिली ग्राम एल्युमीनियम की मात्रा प्रतिदिन हमारे भोजन में मिल जाती है जिससे भोजन के प्राकृतिक गुण नष्ट हो जाते है।

सबसे बड़ी बात तो यह है की यह एक ऐसा धातु है जिसे हमारा शरीर बाहर निकालने में भी असमर्थ है और धीरे-धीरे यह धातु हमारे शरीर में जमा होने लगता है और कई गंभीर समस्या का कारण भी बनता है। इन बर्तन में बना खाना हो या पेय पदार्थ दोनों के द्वारा ही एल्युमीनियम शरीर में पहुँचता है और धीमे जहर का काम शुरू कर देता है।

एल्युमीनियम एक प्रकार का भारी धातु होता है जो बाक्साइट धातु से बनता है। जिस तरह शरीर से दूसरे विषाक्त पदार्थ मल-मूत्र के द्वारा निकल जाते है उस तरह एल्युमीनियम के कण शरीर से निकलते नहीं हैं बल्कि पेट में इस तरह से जमा होने लगते है की शरीर की कार्य प्रणाली को ही बिगाड़ देते है।

लंबे समय तक अगर इन बर्तनों में बना खाना खाया जाए तो यह धातु लीवर और नर्वस सिस्टम में इस तरह से समा जाता है की लोगों को बीमारियाँ सौगात में मिलने लगती है लेकिन अधिकांश लोगों को तब भी पता नहीं चल पाता की यह सब कैसे हुआ। लोग यह कह कर खुद को तसल्ली देते है की उम्र के साथ रोग तो आएँगे ही।

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एक बात हमेशा ध्यान देने योग्य है स्वास्थ्य के साथ लापरवाही ही बीमारियों का मुख्य कारण हैं। इसके अलावा इस धातु से अस्थमा, पेट दर्द, तपेदिक, अल्जाइमर रोग, वात रोग, मानसिक रोग, टीवी, हड्डियों के रोग भी होते है। यहाँ तक की यह धातु किडनी और ब्रेन सेल्स को डैमेज करने की क्षमता भी रखता है।

कैसे घुलता है एल्युमीनियम भोजन में

एल्युमीनियम नमक और एसिड के संपर्क में आते ही पिघलने लगता है और इसके कण भोजन में बड़ी सरलता से मिल जाते है क्योंकि एल्युमीनियम एसीडिक फुड के साथ रिएक्शन करता है और अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होने के कारण यह भोजन के द्वारा शरीर में प्रवेश कर लेता है।

भोजन में जो भी आयरन और कैल्शियम की मात्रा होती है उसे एल्युमीनियम बड़ी आसानी से अब्जॉर्ब कर लेता है जो हड्डियों की सभी बीमारी का मुख्य कारण बनता है। इन बर्तनों में बने भोजन को खाने से सिर्फ बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी प्रभावित होते है, बच्चों पर इसका असर बहुत जल्द पड़ता है।

रिसर्च के अनुसार बच्चों के मानसिक विकास में रुकावट आती है, आईक्यू लेवल कम हो जाता है जिससे बच्चे अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। बचपन से ही बच्चों की याददाश्ती पर भी बहुत बुरा असर पड़ने लग जाता है। बच्चे मानसिक रूप से जल्दी थकने लगते है और खेलने-कूदने व अन्य कार्यो में भी अरुचि पैदा होने लगती है।

वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार एल्युमीनियम बर्तनों के रोजाना इस्तेमाल से लैड और कैडमियम एक्सपोजर होता है जिससे बच्चों का आईक्यू लेवल कम होता है परफॉर्मेंस घटती जाती है और कई दिमागी रोग का खतरा भी बन जाता है।

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एल्युमीनियम के बर्तन में खाना पकाने से अच्छा है आप लौहे के बर्तन में खाना बनाए जो आयरन से भरपूर भोजन होगा। लौहे के बर्तन में भोजन बनाते वक्त किसी भी तरह की खट्टाई का प्रयोग ना करे। लेकिन हाँ सफाई सभी बर्तनों की प्राथमिकता है। स्टेनलेस स्टील या स्टील के बर्तनों का चुनाव भी सुरक्षित है।

भोजन सिर्फ पेट भरने की मंशा से नही बल्कि सेहत को हेल्दी रखने की इच्छा से भी पकाना चाहिए। जब आपके और आपके परिवार का स्वास्थ्य अच्छा होगा तभी तो आप एक स्वस्थ समाज की कल्पना कर सकते है।

एल्युमीनियम के बर्तनों के घातक परिणामों को जानने के बाद जहाँ तक संभव हो इन बर्तनों से परहेज कर लें। एल्युमीनियम के बर्तनों से जुड़ी अहम जानकारी अपने आहार चिकित्सक से जरूर ले।

एल्युमीनियम के बर्तन में खाना पकाने के नुकसान

उम्मीद है जागरूक पर एल्युमीनियम के बर्तन में खाना पकाने के नुकसान (aluminium ke bartan me khana banane ke nuksan) कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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