हिचकी आने का कारण

आइये जानते हैं हिचकी आने का कारण (hichki aane ka karan)। आप भी यही सोचा करते होंगे ना कि किसी के याद करने पर आपको हिचकी आती है लेकिन असल में हिचकी आने के पीछे कुछ वैज्ञानिक कारण होते हैं जिनसे शायद आप अनभिज्ञ हैं।

आइये आज हम आपका ये भ्रम तोड़ देते हैं की किसी के याद करने से हिचकी आती है और बताते हैं हिचकी आने के कारण के बारे में (hichki kyo aati hai)।

हिचकी आने का कारण (hichki aane ka karan)

असल में हिचकी का सम्बन्ध हमारे डायफ्राम से होता है। डायफ्राम एक ऐसी मांसपेशी है जो फेफड़ों को फैलने और सिकुड़ने में मदद करती है और डायफ्राम को कण्ट्रोल करने वाली नाड़ियों में जब उत्तेजना होती है तो डायफ्राम बार-बार सिकुड़ता है और हमारे फेफड़े तेज़ी से हवा को अंदर खिंच लेते हैं जिसके कारण हिचकी आती है।

जल्दी जल्दी खाना खाने, पेट फूलने, ज़ोर ज़ोर से हंसने और तेज़ मसालेदार खाना खाने से हिचकी आने की स्थिति बन जाती है। नाड़ियों में उत्तेजना का कारण हवा होती है जो सामान्य तौर पर डकार के रूप में बाहर आ जाती है लेकिन जब कभी खाने की तहों के बीच हवा फंस जाती है तो इसे बाहर निकालने का उपाय होती है हिचकी।

हिचकी आने के कारणों के सन्दर्भ में सभी विशेषज्ञ एकमत नहीं हैं। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार हिचकी पेट की किसी हल्की गड़बड़ी के कारण आती है तो कुछ का मानना है कि इसके पीछे मनोवैज्ञानिक कारण होते हैं।

कुछ मिनटों से लेकर कुछ घंटों और कभी-कभी कुछ दिनों तक चलने वाली इस हिचकी का सम्बन्ध हवा के अवरोध से होता है। इसलिए हिचकी को रोकने के लिए कार्बन डाइ ऑक्साइड की मात्रा को बढ़ाना ज़रूरी होता है जिसके लिए सांस रोकना और धीरे-धीरे पानी पीना कारगर साबित होता है।

उम्मीद है जागरूक पर क्यों आती है हिचकी (hichki aane ka karan, hichki kyo aati hai) कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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