ल्यूकेमिया क्या है?

आइये जानते हैं ल्यूकेमिया क्या है। रिसर्च बताते हैं कि ल्यूकेमिया कैंसर पुरुषों में ज्यादा देखने को मिलता है। इसके अलावा जो लोग ज्यादा सफेद होते हैं या फिर जिनमें खून की कमी होती है उनमें ल्यूकेमिया होने का ख़तरा ज्यादा होता है।

ऐसे में ब्लड कैंसर या ल्यूकेमिया से जुड़ी जरुरी जानकारी आपको भी जरूर लेनी चाहिए इसलिए आज आपको ल्यूकेमिया से जुड़ी जरुरी जानकारी देते हैं।

ल्यूकेमिया क्या है?

कैंसर के बहुत से रूप होते हैं जिनमें से एक ल्यूकेमिया है। ये ब्लड सेल्स का कैंसर होता है और इसे ब्लड कैंसर भी कहा जाता है। इस कैंसर में अस्थि मज्जा बहुत सी असामान्य सफेद रक्त कोशिकाएं बनाने लगती हैं। ये कोशिकाएं सामान्य कोशिकाओं की तुलना में बहुत तेज गति से बढ़ती जाती हैं और सामान्य कोशिकाओं के लिए घातक साबित होती है।

ल्यूकेमिया के प्रकार

मुख्य रूप से ल्यूकेमिया के चार प्रकार होते हैं-

एक्यूट माइलोजीनस ल्यूकेमिया (AML) – ये ल्यूकेमिया का सबसे आम रूप है और ये ज्यादातर बच्चों और युवाओं में पाया जाता है। अस्थि मज्जा में ब्लास्ट सेल का विकास शुरू होने पर ये ल्यूकेमिया होता है।

एक्यूट लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (ALL) – ल्यूकेमिया का ये प्रकार बच्चों में पाया जाता है। इसमें स्वस्थ कोशिकाओं का निर्माण होने की बजाए ल्यूकेमिया सेल्स का निर्माण होने लगता है। ये कोशिकाएं ब्लड के साथ शरीर के दूसरे अंगों और ऊतकों तक पहुँच जाती हैं और वहीं वृद्धि और विभाजन करने लगती है।

क्रोनिक मायलोजीनस ल्यूकेमिया (CML) – ल्यूकेमिया का ये प्रकार ज्यादातर वयस्कों में पाया जाता है। ये कैंसर अस्थि मज्जा की खून बनाने वाली कोशिकाओं से शुरू होकर रक्त में फैलने लगता है।

क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (CLL) – कैंसर का ये रूप बच्चों में बहुत कम पाया जाता है जबकि 55 साल से ज्यादा की उम्र वाले लोगों में इसका खतरा ज्यादा पाया जाता है। ये कैंसर अस्थि मज्जा के लिम्फोसाइट्स में शुरू होता है और बाद में रक्त में फैलता है। ये धीमी गति से बढ़ने वाला कैंसर होता है।

ल्यूकेमिया के लक्षण

  • रात को सोते समय पसीना आना
  • लगातार लम्बे समय तक बुखार रहना
  • हड्डियों के अंदर दर्द रहना
  • बहुत ज्यादा थकान महसूस करना
  • पेट के बायीं तरफ सूजन और दर्द महसूस होना
  • भूख ना लगना
  • वजन तेजी से कम होता जाना
  • पीरियड के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होना
  • नाक, मसूड़ों और मलाशय से लगातार ब्लीडिंग होना
  • गले, हाथ के नीचे या कमर में गाँठ बनना और उसमें सूजन होना

ल्यूकेमिया का कारण

ल्यूकेमिया का कोई निश्चित और स्पष्ट कारण अभी तक ज्ञात नहीं है लेकिन बहुत से ऐसे फैक्टर्स हैं जो ल्यूकेमिया होने का ख़तरा बढ़ा सकते हैं जैसे-

  • विकिरण के संपर्क में लम्बे समय तक रहना
  • बेंजीन जैसे रसायन के संपर्क में बने रहना
  • धूम्रपान की आदत
  • फैमिली हिस्ट्री

ल्यूकेमिया का इलाज

कीमो थैरेपी – उपचार की इस विधि में ल्यूकेमिया सेल्स को ख़त्म करने के लिए केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। मरीज को किस प्रकार का ल्यूकीमिया है, ये जानकारी लेने के बाद गोली या इंजेक्शन के रूप में दवा दी जाती है।

बायोलॉजिकल थैरेपी – इस थेरेपी में ऐसे ट्रीटमेंट किये जाते हैं जिनसे मरीज का इम्यून सिस्टम ल्यूकीमिया सेल्स को पहचान कर उन्हें खत्म करने में सहायक बनता है।

रेडिएशन थैरेपी – इस थैरेपी में ल्यूकेमिया सेल्स की ग्रोथ को रोकने और इन सेल्स को ख़त्म करने के लिए एक्स रे या दूसरी हाई एनर्जी बीम का इस्तेमाल किया जाता है।

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट – इसमें रोग ग्रस्त अस्थि मज्जा को स्वस्थ अस्थि मज्जा से बदला जाता है।

उम्मीद है जागरूक पर ल्यूकेमिया क्या है और ल्यूकेमिया से जुड़ी ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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