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महाभारत ग्रन्थ किसने और क्यों लिखा?

महाभारत के युद्ध के बारे में तो आप बहुत कुछ जानते होंगे लेकिन क्या आपको ये पता है कि महाभारत ग्रन्थ की रचना किसने की और इस महान ग्रन्थ के लेखक कौन थे? अगर आप इस बारे में जानकारी लेना चाहते हैं तो क्यों ना आज, इसी बारे में बात की जाए।

तो चलिए, आज जानते हैं महाभारत ग्रन्थ के बारे में-

महाभारत हिन्दुओं का एक प्रमुख काव्य ग्रन्थ है जो भारत का धार्मिक, ऐतिहासिक, पौराणिक और दार्शनिक ग्रन्थ माना जाता है। इस ग्रन्थ को पंचम वेद भी कहा गया है। इस ग्रन्थ में तत्कालीन भारत का समग्र इतिहास वर्णित है जिसमें सैकड़ों पात्र, स्थान और घटनाओं का विस्तृत वर्णन है। महाभारत ग्रन्थ में वेदों और हिन्दू ग्रंथों का सार है। इसी ग्रन्थ का एक छोटा-सा हिस्सा गीता है।

महाभारत की रचना महर्षि वेदव्यास जी ने की थी और इसका संभावित रचनाकाल 1000 ईस्वी ईसा पूर्व माना जाता है। इस ग्रन्थ में एक लाख श्लोक हैं।

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा रचित ग्रन्थ का नाम ‘जय महाकाव्य’ था, जिसे बाद में ‘भारत’ और ‘महाभारत’ कहा गया। सम्पूर्ण महाभारत अठारह पर्वों में विभक्त है।

विश्व के इस सबसे लम्बे साहित्यिक ग्रन्थ की रचना करने में वेदव्यास जी को 3 साल का समय लगा और इसकी रचना से जुड़ी कहानी भी दिलचस्प है।

महाभारत की रचना करने के लिए वेदव्यास जी हिमालय की तलहटी में स्थित एक पवित्र गुफा में रहकर तपस्या करने लगे। इस गुफा में रहते हुए उन्होंने ध्यान योग में स्थित होकर महाभारत की घटनाओं का शुरू से अंत तक स्मरण कर लिया और अपने मन में महाभारत की रचना भी कर ली।

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इतना सब करने के बाद, वेदव्यास जी के सामने ये समस्या खड़ी हो गयी कि इस महाकाव्य की जटिलता और लम्बाई बहुत अधिक है। ऐसे में इसे जन साधारण के समझने योग्य बनाने के लिए ये जरुरी है कि कोई इसे बिना ग़लती किये वैसा ही लिख सके, जैसा मैं बोलता जाऊँ लेकिन इतना ज्ञानी व्यक्ति ढूंढ़ना आसान नहीं था।

तब ब्रह्मा जी के कहने पर वेदव्यास जी भगवान गणेश के पास ये प्रस्ताव लेकर गए कि वो महाभारत ग्रन्थ का लेखन बिना त्रुटि कर दें। गणेश जी ये कार्य करने के लिए तैयार हो गए लेकिन उन्होंने एक शर्त रख दी। उन्होंने कहा कि एक बार कलम उठा लेने के बाद काव्य समाप्त होने तक वे बीच में नहीं रुकेंगे। वेदव्यासजी के लिए ये शर्त किसी चुनौती से कम नहीं थी लेकिन उन्होंने इसका हल निकाल लिया और गणेश जी से कहा कि उन्हें ये शर्त मंजूर है लेकिन गणेश जी को भी एक शर्त माननी होगी कि कोई भी श्लोक लिखने से पहले उसका अर्थ समझना होगा। गणेश जी सहमत हो गए।

इसके बाद महाभारत की रचना शुरू हुयी जिसमें वेदव्यास जी बीच-बीच में कुछ कठिन श्लोकों की रचना कर देते। जब भगवान गणेश उन श्लोकों के अर्थ समझने में लीन रहते, उतने समय में वेदव्यास जी कुछ और नए श्लोक बना देते। इस तरह 3 साल के लम्बे समय में महर्षि वेदव्यास और भगवान गणेश ने महाभारत महाकाव्य की रचना की। महाभारत ग्रन्थ की रचना हो जाने के बाद सबसे पहले वेदव्यास जी ने इस ग्रन्थ का अध्ययन अपने पुत्र शुकदेव को कराया।

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ये जानना भी जरुरी है कि वेदव्यास जी को महाभारत की रचना करने की आवश्यकता क्यों महसूस हुयी?

हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार महर्षि व्यास त्रिकालज्ञ थे और उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से ये जान लिया था कि कलयुग में धर्म की हानि होगी जिसके कारण मनुष्य कर्तव्यहीन, नास्तिक और अल्पायु हो जाएगा। ऐसा मनुष्य एक विशाल वेद का अध्ययन नहीं कर पाएगा इसलिए उन्होंने वेद के चार भाग कर दिए ताकि कलयुग का मनुष्य इसका अध्ययन आसानी से कर सके। ये चार वेद थे ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद और सामवेद।

वेदों का इस प्रकार विभाजन करने के कारण ही व्यास जी वेदव्यास के नाम से जाने गए। लेकिन वेदों का ज्ञान बहुत जटिल और गंभीर था इसलिए वेदव्यास जी ने पांचवें वेद के रुप में पुराणों की रचनी की और माना जाता है कि इसी प्रकार कलयुग में जन साधारण को धर्म और नीति का ज्ञान देने के लिए उन्होंने महाभारत की रचना की।

दोस्तों, अब आप जान गए हैं कि महाभारत ग्रन्थ की रचना किसने की, इसके लेखक कौन थे और इस महाकाव्य की रचना का कारण क्या था। जागरुक टीम को उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए उपयोगी भी साबित होगी।

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