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मनुस्मृति किसके द्वारा व कब लिखी गयी?

आइये जानते हैं मनुस्मृति किसके द्वारा व कब लिखी गयी (manusmriti ki rachna kisne ki thi)? ऋषि मनु का नाम तो आपने भी जरूर सुना होगा जिन्हें ऋग्वेद में मानव जाति का पिता कहा गया है। ऋषि मनु द्वारा रचित मनुस्मृति हिन्दू धर्म का एक प्राचीन धर्मशास्त्र है जिसे मनु संहिता भी कहा जाता है लेकिन भारतीय साहित्य में 14 मनु का वर्णन है। ऐसे में ये जानना उपयोगी होगा कि कौनसे मनु ने मनुस्मृति जैसे महान धर्मशास्त्र की रचना की थी। तो चलिए, आज मनु और मनुस्मृति से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां लेते हैं।

मनुस्मृति का कितना महत्त्व है, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि भारत में वेदों के बाद सबसे ज्यादा प्रचलित और मान्यता प्राप्त धर्मशास्त्र मनुस्मृति ही है। मनुस्मृति में मानव के जन्म से मृत्यु तक का कार्यक्रम बताया गया है जिसमें चार पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष), तीन ऋण (देव, ऋषि और पितृ),पांच महायज्ञ, चार आश्रम, चार वर्ण और सोलह संस्कारों का वर्णन मिलता है।

मनुस्मृति में आरण्यक, छः वेदांगों और धर्मशास्त्रों की चर्चा भी की गयी है। इसके अलावा राज्य की व्यवस्था, राजा के कर्तव्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर परामर्श भी दिए गए हैं।

मनुस्मृति की रचना किस काल में हुई थी? (manusmriti ki rachna kis kaal mein ki gayi thi)

मनुस्मृति का रचनाकाल ई.पू. एक हज़ार वर्ष से लेकर ई.पू. दूसरी शताब्दी तक माना जाता है और महाभारत, रामायण, तैत्तिरीय संहिता, ऐतरेय ब्राह्मण, शतपथ ब्राह्मण और नारद-संहिता में मनुस्मृति का उल्लेख मिलता है जो इसकी प्राचीनता की पुष्टि करता है।

मनुस्मृति सरल और धाराप्रवाह शैली में रचित है। इसके सिद्धांत गौतम, बौधायन के धर्मसूत्रों से मिलते-जुलते हैं। भाषा और सिद्धांतों में मनुस्मृति और कौटिलीय में बहुत समानता भी पायी जाती है।

नारद स्मृति के अनुसार, ब्रह्मा ने मनु को उत्पन्न किया और मनु को शास्त्राध्ययन कराया। मनु ने वह ज्ञान दस ऋषियों को दिया।

मनुस्मृति किसके द्वारा लिखी गयी? (manusmriti ki rachna kisne ki)

मनुस्मृति के रचयिता स्वायंभुव मनु को माना जाता है। मनु को अपने पूर्व के साहित्य का पूर्ण ज्ञान था और मनुस्मृति की रचना किस प्रकार हुयी होगी, इस सम्बन्ध में ऐसा कहा जाता है कि जब ऋषिगण ने धर्म, वर्ण और आश्रमों के विषय में ज्ञान प्राप्त करना चाहा तो वे स्वायंभुव मनु के पास गए। मनु ने उन्हें कुछ ज्ञान देकर कहा कि ये ज्ञान मुझे ब्रह्मा से प्राप्त हुआ है और भृगु को मैंने इन सभी विषयों का ज्ञान अच्छी तरह से दे दिया है इसलिए अब भृगु आपको शेष ज्ञान देंगे। इसके बाद भृगु ने मनु की उपस्थिति में वो ज्ञान ऋषिगण को दिया। यही ज्ञान गुरु-शिष्य परंपरा में मनुस्मृति या मनु संहिता कहलाया।

भारत में मनुस्मृति का मुद्रण सबसे पहले 1813 ई. में हुआ। इस ग्रन्थ में 12 अध्याय और 2694 श्लोक हैं। इन अध्यायों में वर्णाश्रम की शिक्षा, धर्म की परिभाषा, ब्रह्मचर्य, गृहस्थ जीवन, वानप्रस्थ जीवन, राजधर्म, दान-स्तुति और ब्रह्म की प्राप्ति जैसे विषयों का वर्णन किया गया है।

दोस्तों, मनुस्मृति में जीवन को सही तरीके से जीने और सभी आवश्यक कर्म करने सम्बन्धी पूर्ण जानकारी दी गयी है इसलिए इस धर्मशास्त्र का महत्त्व वर्तमान समय में भी बना हुआ है। जागरूक टीम को उम्मीद है कि मनुस्मृति किसके द्वारा व कब लिखी गयी और मनुस्मृति से जुड़ी (manusmriti ki rachna kisne ki thi, manusmriti ki rachna kis kaal mein ki gayi thi) ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और भारतीय संस्कृति की ऐसी महान और अनूठी देन के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए प्रेरित भी कर पायी होगी।

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