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माइटोकॉन्ड्रिया क्या है?

आइये जानते हैं माइटोकॉन्ड्रिया क्या है (mitochondria kya hai)। जिस तरह बिजली के लिए पावर हाउस की जरुरत होती है वैसे ही कोशिकाओं को जीवित रखने और काम करने की ऊर्जा पावर हाउस से ही मिलती है। प्राणी की हर कोशिका (लाल रक्त कणों के अलावा) में मिलने वाले इस पावर हाउस को माइटोकॉन्ड्रिया कहते हैं।

ऐसे में कोशिकाओं के इस पावर हाउस के बारे में जानना आपके लिए भी फायदेमंद हो सकता है इसलिए क्यों ना आज इसी बारे में बात करें। तो चलिए, जानते हैं माइटोकॉन्ड्रिया के बारे में (mitochondria ke bare me)।

माइटोकॉन्ड्रिया क्या है? (mitochondria kya hai)

बैक्टीरिया और नीली हरी शैवाल को छोड़कर, बाकी सभी सजीव पौधों और जंतु कोशिकाओं के कोशिका द्रव्य में अनियमित रूप से बिखरे हुए अंग को माइटोकॉन्ड्रिया या सूत्रकणिका कहा जाता है जो कोशिका को माइक्रोस्कोप से देखने पर गोल, लम्बे या अंडाकार दिखाई देते हैं।

माइटोकॉन्ड्रिया की खोज 1890 में रिचर्ड ऑल्टमेन (Richard Altmann) ने की और इसका नाम बायोब्लास्ट्स रखा। इसे माइटोकॉन्ड्रिया नाम कार्ल बेंडा (Carl Benda) ने 1898 में दिया।

माइटोकॉन्ड्रिया में आनुवंशिक पदार्थ के रुप में डीएनए पाया जाता है जिसकी रचना और आकार जीवाणुओं के डीएनए के समान होता है।

माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकीय श्वसन में भाग लेता है। ये अंग ऑक्सीजन जलाकर ऊर्जा उत्पन्न करता है और ऊर्जा को एकत्रित करता है। इसमें ऊर्जा का संग्रह ATP के रुप में होता है इसलिए इसे पावर हाउस कहा जाता है।

कोशिका के विभाजन के साथ माइटोकॉन्ड्रिया भी स्वतंत्र रुप से विभाजित होता है और संतति कोशिका में जाता है।

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किसी मामले में पिता की पहचान करने के लिए व्यक्ति के न्यूक्लियर डीएनए का विश्लेषण किया जाता है जबकि माँ की पहचान करने के लिए माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए का विश्लेषण किया जाता है क्योंकि संतान में माता के माइटोकांड्रिया ही पहुँचते हैं, पिता के नहीं।

माइटोकॉन्ड्रिया क्या है

उम्मीद है कि माइटोकांड्रिया किसे कहते हैं, कोशिका के शक्तिगृह कहे जाने वाले माइटोकांड्रिया के बारे में (mitochondria kya hai) ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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