Home » समाचार » नागरिकता संशोधन बिल क्या है और क्या है इसके प्रावधान?

नागरिकता संशोधन बिल क्या है और क्या है इसके प्रावधान?

Spread the love

आइये जानते हैं नागरिकता संशोधन बिल क्या है और क्या है इसके प्रावधान। हमारा भारत देश एक ऐसे देश के रूप में जाना जाता हैं जहाँ पर विभिन्न धर्मों के लोग मिल-जुल कर रहते हैं और सभी धर्मों के लोगों को यहाँ की नागरिकता भी दी गई है। लेकिन क्या आप जानते है कुछ ऐसे देश भी है जिनकी नागरिकता लेने के बाद भारत की नागरिकता लेना मुश्किल था।

लेकिन अब लोकसभा में “नागरिकता संशोधन बिल पारित” किया गया है जिसके तहत इस्लामिक देश जैसे- पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश आदि देशों की नागरिकता प्राप्त करने के बाद यदि कोई अल्पसंख्यक गैर-मुस्लिम समुदाय के लोग जो कि हिन्दू, सिख, इसाई, जैन, बौद्ध और पारसी आदि 6 धर्मों से संबंध रखते हैं अगर इन देशों को छोड़कर भारत में प्रवेश करना चाहते है अथार्त भारत की नागरिकता लेना चाहते है तो उन्हें इस बिल के प्रावधान के हिसाब से नागरिकता प्रदान की जाएगी।

अल्पसंख्यक गैर-मुस्लिम समुदाय के लोगों को भारत की नागरिकता प्रदान किये जाने के लिए इस विधेयक को केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा में पेश किया गया हैं। जहां पर इस बिल को मंजूरी दे दी गयी है। आइये जागरूक के माध्यम से इस बिल के बारे में विस्तार से जानें।

नागरिकता संशोधन बिल क्या है?

कुछ ऐसे इस्लामिक देश जहां पर अल्पसंख्यक गैर-मुस्लिम समुदाय के लोग निवास करते है जैसे- पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश आदि। ये अल्पसंख्यक गैर-मुस्लिम समुदाय के लोग जिनका संबंध हिन्दू, सिख, इसाई, जैन, बौद्ध और पारसी आदि 6 धर्मों से है इन इस्लामिक देशों की नागरिकता को त्याग कर भारत देश की नागरिकता हासिल करना चाहते है तो उन्हें नागरिकता संशोधन बिल के प्रावधानों के तहत भारत देश की नागरिकता प्रदान की जाएगी।

इस बिल की पेशकश लोकसभा का शीतकालीन सत्र शुरू होने के बाद केन्द्रीय गृह मंत्री “श्री अमित शाह जी” द्वारा नागरिकता अधिनियम 1955 में कुछ संशोधन कर नया नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 पेश किया गया। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह द्वारा इस विधेयक को संसद में पेश करने के बाद इस बिल पर सभी सांसदों के बीच चर्चाएँ होने के पश्चात इसे पारित करने की प्रक्रिया शुरू की गयी।

नागरिकता संशोधन विधेयक की शुरुआत

नागरिकता संशोधन विधेयक को सबसे पहले लोकसभा में 2016 के जुलाई माह में पेश किया गया था। इसके बाद इस विधेयक को अगस्त में संयुक्त सदस्यों की कमिटी के पास पहुँचाया गया जिसके पश्चात इसे 3 साल बाद यानि इस साल 2019 के जनवरी माह में लोकसभा में पेश किया गया।

जिसे लोकसभा द्वारा पारित किया गया था लेकिन इसके बाद जब इस विधेयक को राज्य सभा में पेश किया गया तो यह कुछ कारणों की वजह से यह राज्य सभा में पारित नहीं हो पाया और जब तक लोकसभा का संसदीय सत्र भी समाप्त हो चुका था जिसके कारण यह बिल प्रभाव में नहीं आ सका।

लेकिन अब इस बिल में कुछ और संसोधन कर दुबारा इसे शीतकालीन सत्र में लोकसभा में पेश किया गया जहां पर इसे मंजूरी दे दी गयी है। अब इस बिल को राज्य सभा में पेश किया जायेगा।

नागरिकता संशोधन बिल के कुछ मुख्य प्रावधान

इस संशोधन बिल के अन्तर्गत कुछ मुख्य प्रावधानों को शामिल किया गया है। तो आइये जानते है इन मुख्य प्रावधानों के बारे में-

नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत अभी तक यह प्रावधान था कि इस्लामिक देश जैसे की पाकिस्तान, अफगानिस्तान एवं बांग्लादेश से आने वाले अल्पसंख्यक गैर-मुस्लिम समुदाय के लोग जो कि हिन्दू, सिख, इसाई, जैन, बौद्ध और पारसी आदि 6 धर्मों से संबंध रखते हैं को भारत की नागरिकता लेने के लिए भारत में 11 साल तक लगातार निवास करना होगा उसके पश्चात ही उन्हें भारत की नागरिकता प्रदान की जाएगी।

लेकिन नागरिकता संशोधन विधेयक पारित होने के पश्चात यह अवधि कम हो जाएगी। इस विधेयक के तहत अब यदि कोई गैर-मुस्लिम नागरिक 1 से 6 साल तक भारत में निवास करता हैं तो उसे भारत की नागरिकता दे दी जाएगी। इसके लिए एक कट-ऑफ डेट भी निर्धारित की जा सकती हैं।

इस विधेयक में यह भी प्रावधान शामिल किया गया है कि इस विधेयक के तहत उन लोगों में आसानी से अंतर किया जा सकेगा जो अवैध रूप से भारत में प्रवेश करते है और जो इन इस्लामिक देशों से अत्याचार सहने के बाद भारत में आ कर बस गए है। आपको बता दें कि जो लोग अवैध रूप से भारत में रह रहे हैं उन्हें सजा के तौर पर जेल हो सकती है या फिर उन्हें उनके देश में दोबारा भेजा जा सकता है।

इस विधेयक के पूरी तरह से पास होने के पश्चात अल्पसंख्यक गैर-मुस्लिम समुदाय के लोग जिनका संबंध हिन्दू, सिख, इसाई, जैन, बौद्ध और पारसी आदि 6 धर्मों से है के नागरिकों को भारत की नागरिकता प्राप्त हो जाएगी और ये नागरिक भारत के किसी भी हिस्से में जाकर रह सकेंगे। क्योकि इस विधेयक को भारत के सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में लागू किया जायेगा। अतः इन अल्पसंख्यक गैर-मुस्लिम समुदाय के नागरिकों को भारत के अन्य निवासियों की तरह पूरी स्वतंत्रता दी जाएगी।

नागरिकता संशोधन बिल का विरोध

इस संशोधन बिल को लेकर देश के कई राज्यों में विरोध भी किया जा रहा हैं। आइये जानते है आखिर इस बिल के पीछे विरोध का क्या कारण है-

इस विधेयक का सबसे ज्यादा विरोध प्रदर्शन असम में हुआ था क्योंकि असम में 1985 में एक समझौता हुआ था, जिस के तहत 1971 के बाद बांग्लादेश से भारत में प्रवेश करने वाले लोगों को राज्य से बाहर कर दिया जायेगा। ऐसे में यदि यह नागरिकता संशोधन विधेयक पारित हो जाता है तो इससे इस समझौते पर एक बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह लग जायेगा इस समझौते के कारण असम में इस विधेयक का बहुत अधिक विरोध किया गया था।

इसके अलावा कई विपक्षी पार्टीयों द्वारा भी इस विधेयक का विरोध किया गया। उनका कहना हैं कि इस विधेयक को पास कर केंद्र सरकार मुस्लिम समुदाय को अपना निशाना बना रही है और इस विधेयक के जरिये आर्टिकल 14 (जो कि समानता का अधिकार हैं) का भी हनन हो रहा है।

इस विधेयक का विरोध पूर्व एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यों में रहने वाले लोगों द्वारा भी किया जा रहा है उनको डर हैं कि इस विधेयक के पास होने से उनकी पहचान एवं उनकी आजीविका में भी बहुत बड़ी परेशानी खड़ी हो सकती है।

अब देखना यह है कि इस बिल को राज्यसभा द्वारा पास किया जायेगा या नहीं।

तो ये थी नागरिकता संशोधन बिल से जुडी कुछ रोचक जानकारी, हमें उम्मीद है आपको जागरूक पर हमारे द्वारा दी गयी जानकारी पसंद आयी होगी। आगे भी आपके बीच इसी प्रकार की रोचक जानकारी जागरूक के माध्यम से लाते रहेंगे।

जागरूक यूट्यूब चैनल


Spread the love