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न्यूट्रॉन तारे क्या होते हैं?

आसमान में टिमटिमाते तारे देखना आपको भी अच्छा लगता होगा और ये तो आप भी जानते होंगे कि तारे स्वयं के प्रकाश से ही प्रकाशमान होते हैं लेकिन क्या आप न्यूट्रॉन तारे के बारे में जानते हैं? अगर आप नहीं जानते हैं तो आपको ये रोचक और ख़ास जानकारी जरूर लेनी चाहिए। ऐसे में क्यों ना आज, इसी बारे में बात की जाये। तो चलिए, आज जानते हैं न्यूट्रॉन तारे के बारे में।

न्यूट्रॉन तारे क्या होते हैं?

न्यूट्रॉन तारे की उत्पत्ति सुपरनोवा इवेंट से सम्बंधित होती है। जब 15 – 20 सौर द्रव्यमान का एक तारा पूरी तरह से अपने ईंधन को जला देता है तब वो सुपरनोवा इवेंट में विस्फोट करता है। इसके साथ-साथ विकिरण के रुप में अपने द्रव्यमान को छोड़कर, गुरुत्वाकर्षण के पतन के फलस्वरूप न्यूट्रॉन तारे का निर्माण भी करता है।

इस प्रकार बना न्यूट्रॉन तारा एक तारे का मृत अवशेष होता है और लगभग पूरी तरह न्यूट्रॉन से बना होता है। ये तारा त्रिज्या में बहुत छोटा होता है और इसका वजन सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 1.5 गुना होता है। ये तारा बहुत घना होता है।

न्यूट्रॉन तारे की रचना सरल होती है। इसकी तीन परतें होती हैं। एक ठोस केन्द्रक, एक तरल आवरण और एक पतली बाहरी परत। इस तारे के दो अक्ष होते हैं- चुम्बकीय अक्ष और घूर्णन अक्ष।

न्यूट्रॉन तारों का एक उपवर्ग पल्सर भी होता है। सभी पल्सर न्यूट्रॉन तारे होते हैं लेकिन सभी न्यूट्रॉन तारे पल्सर नहीं होते हैं।

न्यूट्रॉन तारा हमें दिखाई भी दे सकता है क्योंकि इस तारे की सतह घने लोहे से बनी होती है और गर्म लोहा चमकदार होता है इसलिए इसे देखना संभव हो पाता है। ये न्यूट्रॉन तारा आकार में छोटा होता है लेकिन वजन में बहुत भारी होता है और सूर्य से बहुत बड़ा भी होता है। ऐसे में छोटे और भारी न्यूट्रॉन तारे का गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र बहुत बड़ा होता है। ऐसे में अगर ब्रह्माण्ड की सबसे गर्म वस्तुओं में से एक न्यूट्रॉन तारा अगर पृथ्वी के नजदीक आ जाये तो इसका गहन गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र पृथ्वी को नष्ट करने के लिए पर्याप्त होगा।

अब सवाल ये है कि पल्सर क्या है?

पल्सर प्रकाश की गति से कणों का उत्सर्जन करते हुए अत्यधिक घूर्णन करने वाले न्यूट्रॉन तारे होते हैं। घूर्णन से रुकने के बाद की स्थिति में पल्सर एक सामान्य न्यूट्रॉन तारा बन जाता है। ये तारे विद्युत् चुम्बकीय विकिरण की पल्स उत्सर्जित करते रहते हैं इसलिए इन्हें पल्सर कहा जाता है।

पल्सर अंतरिक्ष में दो अत्यधिक ऊर्जा वाली तरंगे उत्सर्जित करता है जो उसकी चुम्बकीय अक्ष के पास सघन होती हैं। ये चुम्बकीय बल पृथ्वी के चुम्बकीय बल से 10 खरब गुना ज्यादा शक्तिशाली होता है।

पल्सर बहुत तेज घूर्णन करते हैं, अधिकतर एक सेकण्ड में एक घूर्णन करते हैं। सबसे तेज पल्सर एक सेकण्ड में 642 घूर्णन करता है और सबसे धीमा पल्सर एक घूर्णन 4.308 सेकंड में करता है। घूर्णन में ये तेजी कोणीय गति के संरक्षण के नियम के कारण होती है।

दोस्तों, जागरुक टीम को उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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न्युट्रान तारे और पल्सर