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नोबेल पुरस्कार का इतिहास और इससे सम्मानित भारतीय

आइये जानते हैं नोबेल पुरस्कार का इतिहास और इससे सम्मानित भारतीय के बारे में। नोबेल पुरस्कार विश्व का सबसे बड़ा और प्रतिष्ठित पुरस्कारों की प्रथम श्रेणी में आता हैं। इसलिए इसे सर्वश्रेष्ठ व्यक्तियों के उत्कर्ष कार्यों के लिए उन्हें दिया जाता है। इसकी शुरुआत 1901 में हुई। इस पुरस्कार का नाम एल्फ़्रेड नोबेल के नाम पर रखा गया। जो स्वीडन के निवासी और डायनामाईट के आविष्कारक थे।

एल्फ़्रेड नोबेल ने जीवन के अंतिम समय में अपनी वसीयत में लिखा था की- ”मेरी संपत्ति का एक बड़ा हिस्सा एक फण्ड में डाला जाए और उसके ब्याज को हर साल मानवजाति की सेवा करने वाले लोगों को पुरस्कार के रूप में दिया जाए।”

तभी से उनकी मृत्यु के बाद उनकी इच्छानुसार हर साल रसायन, भौतिकी, अर्थशास्त्र, चिकित्सा, साहित्य और शांति के क्षेत्रों में अद्वितीय काम करने वालों को बिना भेद-भाव के पुरस्कृत किया जाता है। अल्फ्रेड नोबेल ऐसा क्यों चाहते थे। इसका कोई स्पष्टीकरण उन्होंने नहीं दिया। लेकिन कहा जाता है उन्हें अपने मन में कहीं ना कहीं यह ग्लानि थी की उनका आविष्कार युद्ध का कारण बनते जा रहा है जिसमें हजारों की तादात में निर्दोषों की मौत होती हैं।

उन्हें इस बात का भी भविष्य में अंदेशा था की कही लोग मुझे ”मौत का सौदागर” के नाम से याद ना रखे और शायद इसी प्रायश्चित स्वरूप अल्फ्रेड नोबेल ने अपने नाम के साथ इस पुरस्कार की नींव रखी।

नोबेल पुरस्कार को पाने के बाद लाखों लोगों को अपने क्षेत्र में ओर अच्छा करने की प्रेरणा तो मिलती ही हैं। साथ ही साथ वे दूसरों के लिए भी प्रेरणास्त्रोत का कारण बनते हैं। भारत में ऐसे कई लोग जन्में, जिनके असाधारण और उत्कर्ष कार्यो ने ऐसी अमिट छाप छोड़ी की भारत देश ”विश्वगुरु” के नाम से भी प्रसिद्ध हुआ।

तो क्या अब आप जानना चाहते है ऐसे भारतीयों के नाम जिन्होंने नोबेल पुरस्कार को प्राप्त करके पूरे देश को गौरवान्वित किया। आइए जानें किसे, कब और क्यों मिला यह सर्वोच्च पुरस्कार।

भारतीय नागरिकता के साथ नोबेल पुरस्कार पाने वालों की सूची-

1. रवीन्द्रनाथ टैगोर – इनका जन्म 7 मई 1861 कोलकाता में हुआ। टैगोर मात्र आठ वर्ष की आयु से ही कविताएँ लिखने लगे थे। टैगोर प्रसिद्ध बंगाली कवि, गीतकार, कहानीकार, चित्रकार, निबंधकार, नाटककार, संगीतकार और साहित्यकार थे। इन्हें गुरुदेव और बर्ड ऑफ बंगाल के नाम से भी प्रसिद्धि मिली।

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रवीन्द्रनाथ टैगोर साहित्य (गीतांजलि) की रचना के लिए 1913 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होने वाले प्रथम भारतीय के साथ प्रथम एशियाई भी थे। इन्होंने कई प्रेमगीत लिखे। गीतांजलि और साधना इनकी महत्वपूर्ण कृतियाँ है। 1901 में टैगोर ने शांतिनिकेतन की नींव रखी। वे एक मात्र ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने भारत और बांग्लादेश दोनों देशों के राष्ट्रगान की रचना की।

2. चंद्रशेखर वेंकटरमन – भौतिकी विज्ञान शास्त्री सी वी रमन का जन्म 1888 तमिलनाडु में हुआ। भौतिक शास्त्र के पहले भारतीय जिन्हें इस क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से 1930 में सम्मानित किया गया। कोलकाता साइंस कॉलेज में भौतिकी के प्राध्यापक बने और वही प्रकाश पर गहन अध्ययन किया। जिसके परिणाम स्वरूप यह खोज हुई की जब प्रकाश किसी पारदर्शी माध्यम से गुजरता है तब उसकी वेवलैंथ (तरंग की लम्बाई) में परिवर्तन नजर आता है।

इस अविष्कार को विज्ञान जगत में रमन-किरण के नाम से जाना जाता है। इसी खोज के कारण सी वी रमन को विश्व का सर्वोच्च सम्मान नोबेल पुरस्कार के रूप में मिला। 1970 यानी 82 वर्ष की उम्र में देश के महान वैज्ञानिक का निधन हो गया।

3. मदर टेरेसा – इनका जन्म 1910 युगोस्लाविया में हुआ और 18 वर्ष की आयु में वे भारत आई। तब इनका नाम एग्नेस था। दीन-दुखियों की दशा से उनका मन व्याकुल हो जाता था। कोलकाता में उन्होंने दो साल कान्वेंट में शिक्षा का काम किया। लेकिन दीन, अनाथ, गरीब व रोगियों की सेवा से उनका मन शांत रहता था। तभी से उन्हें अपने जीवन का प्रयोजन समझ आया और पूर्ण रूप से इसी कार्य में अपने जीवन को समर्पित कर दिया। तभी से इनका नाम टेरेसा पड़ गया।

टेरेसा ने ‘मिशनरीज ऑफ़ चैरेटी’ नामक संस्था की नींव रखी। भारत के अलावा अन्य देशों में 600 सेवाकेंद्रों की स्थापना ओर की। 1948 में उन्हें भारत की नागरिकता प्राप्त हुई। इन्होंने अपना पूरा जीवन दो सादी साड़ी में एक साध्वी के रूप में बिताया। इनकी निस्वार्थ सेवा को देखते हुए विश्वभर के संस्थानों से कई सम्मान पुरस्कार दिए गये। इनकी अतुल्य सेवा भाव को देखते हुए 1979 में ‘नोबेल शांति पुरस्कार’ और 1980 में ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया गया।

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2003 में उन्हें ”धन्य” उपाधि से सम्मानित किया गया। 1997 में परम साध्वी टेरेसा का कोलकाता में निधन हो गया। भारत आने के पश्चात उन्होंने अपना पूरा जीवन कोलकाता में ही व्यतीत किया। आज भी उनकी संस्था उनके दिखाये मार्ग पर कार्यरत है।

हम भारतीयों को इस बात पर सदैव गर्व रहेगा की मदर टेरेसा अपनी सेवा दान के लिए भारत को चुना और भारत आने के बाद ही संपूर्ण विश्व की सेवा का दायरा भारत से ही रखा।

4. डॉ. अमर्त्य सेन – इनका जन्म 1932 कोलकाता शांति निकेतन में हुआ। इनकी प्रारंभिक शिक्षा शांति निकेतन फिर कोलकाता विश्वविद्यालय से स्नातक उपाधि और इंग्लैण्ड कैम्ब्रिज ट्रिनिटी कॉलेज से अर्थशास्त्र में एम.ए. व पी.एच.डी. की डिग्रियाँ हासिल की। विद्वान अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने कल्याण, विकास, भुखमरी, गरीबी जैसे विषयों पर बड़ी गंभीरता से अपनी पुस्तकों में वर्णन किया और कहा की अकाल में अन्न की व्यवस्था कैसे हो इस पर अपनी सोच रखी।

1974 बांग्लादेश पर आए अकाल संकट के बारे में भी लिखा। इस तरह उन्होंने अर्थशास्त्र पर कई खोज की। वे पहले ऐसे भारतीय व एशियाई है जिन्हें अर्थशास्त्र के क्षेत्र में 1998 में ”नोबेल पुरस्कार” से सम्मानित किया गया।

5. कैलाश सत्यार्थी – इनका जन्म 1954 मध्यप्रदेश में हुआ। हजारों लाखों बच्चों के दमन के विरुद्ध और उनके शिक्षा के अधिकारों की रक्षा हेतु 2014 में पाकिस्तान की मलाला युसुफ़जई के साथ संयुक्त रूप से शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया। ”बचपन बचाओ” अभियान के जरिए विश्व भर में हजारों बच्चों के अधिकारों के लिए कार्य किया और 1 लाख से अधिक बच्चों को मानव-तस्करी, गुलामी और बाल-श्रम के कुचक्र से मुक्ति भी दिलाई।

भारतीय मूल के ऐसे भारतीय जो नोबेल पुरस्कार से सम्मानित होते समय अमेरिका के नागरिक थे। उनके नाम, कब नोबेल पुरस्कार मिला, किस क्षेत्र में और किस कार्य के लिए—यह सूची निम्न हैं।

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* हरगोबिंद खुराना (जन्म पंजाब में रायपुर)– 1968, चिकित्सा क्षेत्र में (प्रोटीन संश्लेषण में आनुवांशिक कोड की व्याख्या और उसके कार्य के लिए)

* डॉ. सुब्रह्यण्यम चंद्रशेखर (जन्म लाहौर, तब भारत का हिस्सा)– सर सी.वी. रमन के भतीजे थे चंद्रशेखर। 1983, भौतिकी क्षेत्र में (खगोल भौतिक शास्त्र तथा सौरमंडल से संबंधित विषयों पर अनुसंधान व किताबें लिखने पर)

* वेंकट रामाकृष्णन (जन्म मदुरै में)– 2009, कैमिस्ट्री क्षेत्र में (राइबोसोम की संरचना और कार्य के अध्ययन के लिये)

इनके अलावा कुछ ऐसे नोबेल पुरस्कार विजेता भी जिनका जन्म भारत में हुआ या भारत से किसी ना किसी रूप में संबंध रखते है। लेकिन वे विदेशी नागरिक थे। उनके नामों की सूची नीचे है।

* रोनाल्ड रॉस (जन्म ब्रिटिश-भारत का हिस्सा अल्मोड़ा में)– 1902, चिकित्सा क्षेत्र में (मलेरिया के अध्यन के लिए)

* रूडयार्ड किपलिंग (जन्म ब्रिटिश भारत – मुंबई)– 1907, साहित्य क्षेत्र में (लेखन में)

* दलाई लामा (जन्म तिब्बत)– 1989, शांति के लिए (तिब्बत की आजादी के लिए संघर्ष और शांतिपूर्ण समाधान के प्रयास के लिए)

* वी.एस. नायपॉल (एक हिंदू भारतीय के बेटे थे)– 2001, साहित्य क्षेत्र में (30 अधिक पुस्तकों की रचना)

हमारे भारत देश वासियों की क्षमता और योग्यता के अनुसार यह सूची बहुत छोटी है। लेकिन हम जानते है भावी समय हम भारतीयों का ही है। लेकिन हमें विश्वास है आने वाले वक्त में इस सूची में कई भारतीयों के नाम जोड़ें जाएंगे।

उम्मीद है जागरूक पर नोबेल पुरस्कार का इतिहास कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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