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राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर क्या है?

आइये जानते हैं राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर अर्थात NPR (National Population Register) क्या है। आज सुबह यानि की 24 दिसंबर 2019 को 10.30 बजे कैबिनेट की बैठक की हुई जिसके अन्तर्गत एनपीआर पर चर्चा की गयी और इसे मंजूरी दे दी गयी।

अब हर नागरिक के लिए रजिस्टर में नाम दर्ज कराना जरूरी होगा। अब आप सोच रहे होंगे की ये NPR क्या है और इसका क्या फायदा होगा तो आइये जानते है NPR के बारे में।

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर क्या है?

राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में देश के प्रत्येक नागरिक को अपना नाम दर्ज कराना अनिवार्य होगा। इसमें प्रत्येक नागरिक का लेखा जोखा होगा कि वह नागरिक किस इलाके में रह रहा है और कितने समय से रह रहा है तथा उसकी पहचान से लेकर उसके परिवार की सारी जानकारी इस रजिस्टर में होगी। किसी भी एक जगह पर 6 महीने से रहने वाले शख्स को इस रजिस्टर में अपना नाम दर्ज कराना अनिवार्य होगा।

आज के दिन हुई कैबिनेट की बैठक में एनपीआर के नवीनीकरण को हरी झंडी दे दी गयी है। हालांकि यह एनआरसी से पूरी तरह अलग है और कई जगह एनपीआर का विरोध भी किया गया।

नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (एनपीआर) के अंतर्गत 1 अप्रैल, 2020 से 30 सितंबर, 2020 तक नागरिकों का डेटाबेस तैयार किया जायेगा इसके लिए देशभर में घर-घर जाकर जनगणना की जाएगी।

देश के निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना इस एनपीआर का मुख्य लक्ष्य है इस डेटा में जनसांख्यिंकी के साथ बायोमेट्रिक जानकारी भी होगी।

सर्वप्रथम किसने और कब की थी इसकी शुरआत

आपको बता दे की इस एनपीआर की शुरआत देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार द्वारा 2010 में एनपीआर बनाने की पहल शुरू की गयी थी। इसके पश्चात 2011 में हुई जनगणना के पहले इस पर काम शुरू किया गया था।

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अब देश में फिर से 2021 में जनगणना होनी है ऐसे में एनपीआर पर भी काम शुरू हो रहा है। इस एनपीआर के लिए 2010 में डेटा तभी इकट्ठा किया गया था, जब 2011 की जनगणना के लिए आंकड़े जुटाए गए थे।

उस समय डेटा को 2015 में अपडेट किया गया था और अब अप्रैल से सितंबर 2020 तक जनगणना के लिए आंकड़े जुटाने के दौरान ही एनपीआर डेटा को भी अपडेट किया जाएगा।

एनपीआर और एनआरसी में अंतर

एनआरसी अर्थात राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर जिसके जरिए देश में रह रहे अवैध नागरिकों की पहचान की जाएगी वहीं एनपीआर के तहत 6 महीने या उससे ज्यादा वक्त से एक क्षेत्र में रहने वाले किसी भी निवासी को अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा या फिर ऐसा कोई व्यक्ति जो अगले 6 महीने के लिए किसी जगह रहने की इच्छा रखता है उसे भी एनपीआर के तहत अपनी जानकारी देनी होगी। इस तरह प्रत्येक नागरिक का डेटा तैयार किया जायेगा।

एनपीआर के कुछ प्रमुख बिंदु

  • यह प्रक्रिया सामान्य जनगणना और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर से जुड़ी हुई है।
  • इसका प्रमुख उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक का एक व्यापक पहचान डेटाबेस तैयार करना है तथा इस डेटाबेस में जनसांख्यिकीय के साथ-साथ बॉयोमेट्रिक विवरण भी शामिल होंगे।
  • सर्वप्रथम इस प्रक्रिया को इसके पहले वर्ष 2010 और 2015 में दो चरणों में आयोजित किया गया था।
  • इसके तहत देश के प्रत्येक नागरिक को जो स्थानीय क्षेत्र में छह महीने या उससे अधिक समय के लिये निवास कर रहा हो या जो उस क्षेत्र में अगले छह महीने या उससे अधिक समय तक निवास करने की इच्छा रखता हो अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
  • एनपीआर के तहत असम को छोड़कर देश के अन्य सभी क्षेत्रों के लोगों से संबंधित सूचनाओं का संग्रह किया जाएगा और प्रत्येक नागरिक को इसमें पंजीकृत करवाना अनिवार्य है।
  • नागरिकता पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करने संबंधी नियम 2003 के नियम 3 के उप-नियम (4) के तहत सरकार द्वारा जनसंख्या रजिस्टर तैयार करने और अद्यतन करने का निर्णय लिया है।
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हम आशा करते है की आप जागरूक पर एनपीआर से जुडी जानकारी को जान कर इसके महत्व को समझ पाएं होंगे। हमें उम्मीद है आपको जागरूक पर हमारे द्वारा दी गयी जानकारी पसंद आयी होगी।

References:

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