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पैरों में दर्द और कमजोरी के मुख्य कारण और लक्षण

आइये जानते हैं पैरों में दर्द और कमजोरी के मुख्य कारण और लक्षण (pairo me kamjori)। पहले के समय में जब नीचे बैठना-उठना आदत हुआ करती थी और पैदल चलना और शारीरिक श्रम करना एक सामान्य सी बात होती थी तो लोग ज़्यादा फिट और तंदुरुस्त हुआ करते थे। ये उनकी जीवनशैली का अंग था लेकिन समय के साथ जैसे-जैसे सुविधाएं बढ़ती गयी हैं, हमारी आदतें भी बदल गयी हैं।

आज हम पैदल चलना या शारीरिक रूप से सक्रिय रहना जैसे भूल ही गए हैं और इन्हीं आदतों और बदली लाइफस्टाइल की वजह से आजकल हम अपने शरीर में अक्सर थकान का अनुभव करते हैं।

विशेषकर पैरों में दर्द और कमजोरी महसूस करने वालों की संख्या आज काफी बढ़ गयी है। ऐसे में ये जान लेना ज़रूरी है कि आखिर किन कारणों से पैरों में दर्द और कमजोरी रहने लगा है। तो चलिए, आज इसी बारे में बात करते हैं।

पैरों में दर्द और कमजोरी का कारण – सायटिका (pairo me kamjori)

आज के समय में दौड़ते-भागते दिन निकालने के प्रयास में हमारी नसों को आराम नहीं मिल पाता है, खासकर कमर से पैर तक की नसों में ज़्यादा तकलीफ रहने लगती है और कमर से सम्बंधित नसों में दर्द रहने की इस स्थिति का नाम है सायटिका।

सायटिका क्या है? – सायटिका हमारे शरीर की सबसे लम्बी नस होती है जो कमर से होते हुए पैर के पिछले हिस्से तक जाती है और जब कभी इस नस में कहीं भी दर्द या सूजन आ जाती है तो ये दर्द पूरे पैर के लिए असहनीय हो जाता है।

पैर में होने वाला ये असहनीय दर्द ही सायटिका का दर्द होता है। अक्सर हम समझ लेते हैं कि सायटिका, पैरों से जुड़ी कोई बीमारी है लेकिन असल में ये सायटिका नस में कोई विकार आ जाने की स्थिति है।

पैरों में दर्द और कमजोरी के मुख्य कारण और लक्षण

सायटिका दर्द का कारण – सायटिका का दर्द सामान्य तौर पर तो 50 वर्ष के बाद होने की सम्भावना रहती है क्योंकि इस उम्र में हड्डियां और चिकनी सतह घिसने लगती है।

इसके अलावा ज़्यादा वजन उठाने वाले लोगों में भी ये समस्या देखी जाती है क्योंकि ज्यादा वजन उठाते रहने से चिकनी सतह में मौजूद पदार्थ धीरे-धीरे सूखने लगता है और वो हिस्सा घिस जाता है।

आजकल ये दर्द 30 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों में भी होने लगा है। इसका एक कारण ऑफिस में घंटों कुर्सी पर बैठकर, लगातार काम करना है क्योंकि कुर्सी पर बैठे रहने से पैरों की नसों में तनाव बढ़ता जाता है।

सायटिका नस में किसी भी तरह का दबाव बढ़ने से होने वाला ये दर्द पैर के सबसे निचले हिस्से में होता है।

सायटिका के लक्षण – पैरों का बार-बार सुन्न होना, पैर के अंगूठे और उँगलियाँ सुन्न हो जाना, पैर में झनझनाहट होना, जांघ और पैर के पिछले हिस्से में दर्द होना, पीठ का अकड़ना।

अगर ऐसे लक्षण दिखाई दे तो ये सायटिका नस में तकलीफ के संकेत हो सकते हैं और अगर ये दर्द बढ़ता जाए तो व्यक्ति के लिए खड़े रहना और चलना भी मुश्किल हो जाता है।

सायटिका दर्द का कारण आपने जान लिया है और इसके बाद इस दर्द में राहत पाने का तरीका जानना भी ज़रूरी है। व्यायाम को अपनाकर ही आप इस तकलीफ से राहत पा सकते हैं।

कई शोध बताते हैं कि व्यायाम के जिस प्रकार में नसों में तनाव पैदा किया जाता है, वो काफी लाभदायक सिद्ध होते हैं क्योंकि ऐसे व्यायाम करने से तंत्रिका तंत्र पर उचित दबाव पड़ता है जिससे सायटिका नस को राहत मिलती है।

भुजंगासन, मकरासन, क्रीड़ासन, मत्स्यासन और वज्रासन भी इस दर्द में काफी आराम पहुंचा सकते हैं।

इसके साथ-साथ अपनी लाइफस्टाइल में भी थोड़े सुधार की ज़रूरत है। पैरों में दर्द और कमजोरी की स्थिति में आराम करना ज़रूरी है।

आरामदायक बिस्तरों के अलावा ज़मीन पर भी कुछ समय सोने से आराम मिलता है और ऊँची हील के जूतों की बजाए आरामदायक जूतों का चुनाव करना ज़रूरी है।

इसके अलावा गर्म पानी से पैरों की सिकाई करने से काफी आराम मिल सकता है और इस तकलीफ में अपने डॉक्टर से परामर्श भी ज़रूर लें।

पैरों में दर्द और कमजोरी रहने के कारण और उसमें राहत पाने के तरीकों को आपने जान लिया है। लेकिन इस बात पर गौर करना भी ज़रूरी है कि अगर आपको पैरों में दर्द और कमज़ोरी रहना अभी शुरू ही हुआ है तो इसे बढ़ने से रोकने की ओर भी ध्यान दीजिये।

पैरों से जुड़े योग-व्यायाम को अभी से अपना लीजिये और अपनी आदतों में भी थोड़े से बदलाव करके अपने आप को इस दर्द और तकलीफ से बचा लीजिये।

उम्मीद है पैरों में दर्द और कमजोरी के मुख्य कारण और लक्षण (pairo me kamjori) कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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