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pH क्या होता है और कितना होना चाहिए इसका स्तर?

आइये जानते हैं pH क्या होता है (ph in hindi) और इसका स्तर कितना होना चाहिए। ये तो आप सभी अच्छे से जानते हैं कि हमारे शरीर में असंख्य कोशिकाएं मौजूद होती हैं और ये कोशिकाएं और शरीर का हर अंग सही तरीके से अपना कार्य करता रहे इसके लिए शरीर में अम्ल और क्षार का संतुलन बना रहना जरुरी होता है ताकि हर प्रक्रिया संतुलित तरीके से पूर्ण होती रहे।

अम्ल व क्षार के इस संतुलन को सामन्य रूप से pH (पीएच) कहा जाता है लेकिन अभी ये जानना बाकी है कि ये pH क्या है और ये किस तरह कार्य करता है और इसका संतुलन इतना आवश्यक क्यों हैं? तो चलिए, आज आपको बताते हैं pH क्या होता है और pH से जुड़ी कुछ जरुरी और महत्वपूर्ण बातें।

pH क्या होता है? (pH kya hai)

pH का पूरा नाम ‘पावर ऑफ हाइड्रोजन’ है। जैसा की नाम से ही पता चलता है की हाइड्रोजन की क्षमता। इसकी अवधारणा सबसे पहले 1909 में सामने आयी जब कार्ल्सबर्ग लेबोरेट्री के रसायनशास्त्री सॉरेन पेडर लॉरिट्ज़ सॉरेनसेन ने इसकी खोज की थी। सायनशास्त्री सॉरेन पेडर लॉरिट्ज़ सॉरेनसेन का जन्म डेनमार्क के हावरेबर्ग शहर में 9 जनवरी 1868 को हुआ था।

किसी भी वस्तु में हाइड्रोजन के अणु उसकी अम्लीय या क्षारीय प्रवृत्ति को दर्शाते हैं। मान लीजिये की अगर घोल या उत्पाद में पी.एच. का मान 1 या 2 है तो वो अम्लीय प्रकार का होगा और अगर पीएच 13 या 14 है तो वो क्षारीय प्रकार का होगा।

हाइड्रोजन आयन के गतिविधि गुणांक को प्रयोगात्मक रूप से मापा नहीं जा सकता इसलिए सैद्धांतिक रूप से इसकी गणना की जाती है।

पीएच किसी विलयन की अम्लता या क्षारकता का एक माप है यानी किसी सोल्यूशन में कितना एसिड है और कितना बेस, ये जानने के लिए पीएच स्केल (pH scale) काम में लिया जाता है।

रक्त की तरह एक विशेष सोल्यूशन में हाइड्रोजन आयनों की राशि को पीएच कहा जाता है। विलयन में जितने कम हाइड्रोजन आयन होंगे उस विलयन की pH वैल्यू (pH value) उतनी ज़्यादा होगी।

इसे पीएच (pH) स्केल पर 0 से 14 तक के पैमाने पर मापा जाता है जिसमें 7 का पीएच न्यूट्रल माना जाता है।

pH स्केल से पदार्थ की गुणवत्ता को कैसे ज्ञात किया जाता है:- शुद्ध जल को न्यूट्रल माना जाता है और 25 °से. पर शुद्ध जल का पीएच (pH) मान 7 होता है। पीएच स्केल (pH scale) पर किसी सॉल्यूशन का pH मान (pH man) अगर 7 से कम आता है तो वो सोल्यूशन अम्लीय होता है और यदि pH का मान 7 से ज़्यादा हो तो वह सोल्यूशन क्षारीय होता है।

यानी अगर साधारण शब्दों में समझे तो यदि किसी पदार्थ का pH मान (pH man) जितना कम होगा, शरीर उतना ही एसिडिक होगा और pH मान जितना ज़्यादा होगा, शरीर उतना ही एल्कलाइन होगा।

जैसे-जैसे पदार्थ का pH मान 7 से कम होता जाएगा, सॉल्यूशन की अम्लीय प्रकृति बढ़ती जाएगी और यदि pH मान अगर 7 से 14 की तरफ बढ़ता जाएगा तो सॉल्यूशन की क्षारीय प्रकृति ज़्यादा होती जाएगी।

हमारे शरीर में जब ज़्यादा अम्लीय स्थिति बन जाती है तो शरीर में कोशिकीय स्तर पर ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। हमारे शरीर में रक्त द्वारा ऑक्सीजन का संचार 7.4 pH पर किया जाता है। लेकिन जब शरीर में pH लेवल 7.4 (एल्कलाइन) से नीचे गिर जाता है तो हमारे शरीर में रक्त के लिए ऑक्सीजन का सही तरह से संचार कर पाना संभव नहीं हो पाता इससे हमारे शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और शरीर में बैक्टीरिया, वायरस और फंगस इन्फेक्शन जैसी समस्या उत्पन्न होने लगती हैं।

अगर बात करें हमारी त्वचा की तो हमारी त्वचा का पीएच (pH) मान अगर 5 हो तो त्वचा की प्रकृति थोड़ी अम्लीय होगी है और अगर त्वचा का पीएच (pH) मान 5 से कम हो तो हमारी त्वचा में नमी बरकरार रहती है।

आइए अब कुछ ऐसे प्रोडक्ट्स के बारे में जानते है, जिनका पीएच (pH) मान हमारी त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में काफी मददगार होता है और ये प्रोडक्ट्स हमारी दैनिक जीवन में हर रोज़ काम में आते है जैसे की:-

डिओडरेंट (deodorant) का pH मान कितना होना चाहिए:- गर्मी के मौसम में वैसे तो हमारे शरीर के तापमान का संतुलन बनाए रखने के लिए शरीर से पसीना निकलने की स्वाभाविक प्रक्रिया हमारे लिए सही रहती है, लेकिन पसीने में मौज़ूद बैक्टीरिया की वजह से हमारे शरीर से दुर्गंध आने लग जाती है।

पसीने में अगर सीबम (पसीने की ग्रंथियों में तैलीय स्राव) का मिश्रण हो जाता है तो यह हमारी त्वचा पर एक परत बना लेता है इस परत को एसिड मेंटल कहते है। क्योंकि इस परत का पीएच (pH) मान 5 से कम होता है और यह हल्की अम्लीय प्रकृति का होता है। इसलिए डिओडरेंट (Deodorant) हमेशा वो खरीदना चाहिए, जिसका पीएच (pH) मान बहुत ही कम हो, इससे हमारे शरीर में हानिकारक बैक्टीरिया और दुर्गंध नहीं उत्पन्न होंगे।

फेस वॉश (face wash) का pH मान कितना होना चाहिए:- हमारे चेहरे की त्वचा भी हल्की अम्लीय होती है। हमारे चेहरे की त्वचा का पीएच (pH) मान अगर संतुलित होता है तो हमारी त्वचा में नमी बनी रहती है।आपको बता दें की आमतौर पर हम जो साबुन उपयोग करते है वह क्षारीय प्रकृति के होते हैं और उनका पीएच (pH) मान 8 से 11 के बीच में होता है।

इसीलिए साबुन से चेहरा धोने से कई बार हमारी त्वचा की नमी ख़त्म हो जाती है और इसी के कारण हमारी त्वचा में रूखापन, खुजली और मुंहासों जैसी समस्या पैदा हो जाती है। इसलिए इन समस्याओं से बचने के लिए फेसवॉश चुनते समय पीएच (pH) संतुलन का ध्यान रखना जरुरी है, ताकि त्वचा को किसी प्रकार का कोई नुकसान ना पहुंचे। साथ ही साथ हमारी त्वचा में नमी बरकरार रहे।

शैंपू का pH मान कितना होना चाहिए:- हमारे बालों की सेहत शैंपू या साबुन के इस्तेमाल पर ही निर्भर करती है। जिस तरह हमारी त्वचा के लिए पीएच (pH) मान कम होना चाहिए। उसी तरह हमारी सिर की त्वचा के लिए भी पीएच (pH) का मान 5 से कम होना चाहिए। जब हम बालों को पानी या किसी भी क्षारीय उत्पाद से धोते या फिर साफ़ करते है तो वह हमारे सिर की त्वचा की ऊपरी परत (क्यूटिकल) को खोल देता है। इसी वजह से बालों के नाजुक हिस्से को नुक़सान पहुँचता है। इसलिए उसी शैम्पू का उपयोग करे जिसका pH मान 5 से कम हो।

जब कभी रक्त का pH असंतुलित होकर एसिडिक हो जाता है यानी pH मान 7.4 से बहुत नीचे गिर जाता है तो शरीर में कई तरह के असंतुलन होने शुरू हो जाते हैं जैसे-

  • यदि हमारे शरीर का pH मान कम हो जाता है तो हमारी हड्डियों से कैल्शियम जैसा एल्कलाइन खनिज कम होने लगता है जिसके कारण हमारे शरीर से खनिजों का अवशोषण कम होने लगता है और हमे बोन डेंसिटी जैसी समस्याएं होना शुरू हो जाती है।
  • भोज्य पदार्थों के ज़्यादा एसिडिक हो जाने के कारण आंतें इसे पचा नहीं पाती, जिसके कारण पैंक्रियास, गॉल ब्लैडर और लीवर भी प्रभावित होते हैं और शरीर में कमजोर पाचन, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता, थकान और हार्मोन असंतुलन जैसी समस्याएं होना शुरू हो जाती है।
  • pH का मान कम हो जाने के कारण इन्सुलिन का लेवल भी बढ़ जाता है।

डॉक्टरों के अनुसार, ज़्यादा एसिडिक शरीर में ही बीमारियां विकसित होती हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां भी एसिडिक शरीर पर ही हमला करती हैं।

रक्त का पीएच संतुलन कितना ज़रूरी होता है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि रक्त के पीएच मान में 0.2 मान तक परिवर्तन होने की स्थिति में मृत्यु तक हो जाती है।

आपका शरीर एसिडिक है या नहीं, ये जानने के लिए सबसे बेहतरीन तरीका होता है यूरिन टेस्ट करना। हमारे शरीर के संतुलन को जानने में किडनी हमारी मदद कर सकती है।

क्योंकि शरीर जब ज़्यादा एसिडिक हो जाता है तो किडनी यूरिन के ज़रिये ज़्यादा एसिड को बाहर निकाल देती है जिससे रक्त के लिए एल्कलाइन बने रहना आसान हो जाता है और सभी क्रियाएं सही तरीके से चलती रहती हैं इसलिए यूरिन टेस्ट के माध्यम से ये जाना जा सकता है कि हमारे शरीर का पीएच संतुलित है या ज़्यादा एसिडिक है।

यूरिन का मान पीएच स्केल पर 6 से 7 के बीच होता है। अगर इसका मान 6 से कम आता है तो शरीर ज़्यादा एसिडिक है और अगर ये मान 7 से ज़्यादा है तो शरीर एल्कलाइन है।

दोनों ही स्थितियों में पीएच को संतुलित किये जाने की जरुरत होती है जिसके लिए आहार और जीवनशैली में सुधार करने की जरुरत होती है।

आइये, अब जानते हैं कुछ जरुरी पीएच मान

  • शुद्ध जल का पीएच मान – 7
  • आंसू का पीएच मान – 7.4
  • दूध का पीएच मान – 6.4
  • मानव रक्त का पीएच मान – 7.4
  • समुद्री जल का पीएच मान – 8.5
  • मानव लार का पीएच मान – 6.5 – 7.5
  • टमाटर का पीएच मान – 4
  • नींबू का पीएच मान – 2

अब आप जान चुके हैं कि पीएच क्या होता है और इसका संतुलित रहना शरीर की सभी क्रियाओं के सामान्य रूप से चलते रहने के लिए कितना ज़रूरी होता है।

इसके साथ ही आपको अपने शरीर के पीएच लेवल को मापने का तरीका भी पता चल चुका है इसलिए अपने शरीर के पीएच को संतुलित बनाये रखिये ताकि शरीर को स्वस्थ और सेहतमंद बने रहने में किसी तरह की कोई तकलीफ ना उठानी पड़े।

उम्मीद है जागरूक पर pH क्या होता है और कितना होना चाहिए इसका स्तर (pH kya hai, ph in hindi) कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी। ये लेख केवल जानकारी के लिए है और ये चिकित्सा सलाह नहीं है। अपने चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।

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