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प्राचीन भारत के धार्मिक साहित्य

आइये जागरूक पर आज प्राचीन भारत के धार्मिक साहित्य के बारे में जानकारी लेते हैं। भारतीय साहित्य समृद्ध और संपन्न साहित्य है और विभिन्न भाषाओं में लिखे जाने के बावजूद भी एक ही है। भारतीय साहित्य धार्मिक, नीतिगत, सामाजिक और ऐतिहासिक साहित्य का भंडार है जो हमारी धरोहर है। ऐसे में क्यों ना आज, प्राचीन भारत के धार्मिक साहित्य को करीब से जानने की कोशिश करें ताकि हम समझ पाएं कि प्राचीन भारत के धर्म का ज्ञान हम तक साहित्य के किस रूप से होकर पहुंचा है।

प्राचीन भारत का समृद्ध धार्मिक साहित्य दो भागों में विभाजित है – ब्राह्मण साहित्य और ब्राह्मणेतर साहित्य। ब्राह्मण साहित्य में वेद, ब्राह्मण ग्रन्थ, आरण्यक, उपनिषद, वेदांग, सूत्र, महाकाव्य, पुराण, स्मृति आदि आते हैं।

आइये, इनके बारे में थोड़ी जानकारी लेते हैं:-

वेद :–

ब्राह्मण साहित्य में सबसे प्राचीन और पवित्रतम ग्रन्थ वेद हैं जिनकी संख्या 4 है और इनके नाम हैं – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। ऋग्वेद में प्राचीन आर्यों के धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक जीवन का परिचय मिलता है। यजुर्वेद में यज्ञ कर्म को गद्य और पद्य रूप में समझाया गया है। सामवेद भारतीय संगीत का मूल है और अथर्ववेद में रोग निवारण, तंत्र-मन्त्र, वशीकरण आदि का वर्णन मिलता है।

ब्राह्मण ग्रन्थ :-

वेदों की गद्य में व्याख्या वाला खण्ड ब्राह्मण ग्रन्थ है जिसमें गद्य रुप में देवताओं और यज्ञ की व्याख्या की गयी है। हर वेद का एक से अधिक ब्राह्मण ग्रन्थ है जैसे – ऋग्वेद के ऐतरेय और कौषीतकि ब्राह्मण ग्रन्थ, यजुर्वेद के शतपथ और तैत्तिरीय ब्राह्मण ग्रन्थ आदि, सामवेद के पंचविश, षडविंश आदि ब्राह्मण ग्रन्थ और अथर्ववेद का गोपथ ब्राह्मण ग्रन्थ।

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आरण्यक :-

इसमें आत्मविद्या और रहस्यात्मक विषयों का विवरण दिया गया है। इनका आध्यात्मिक महत्त्व ब्राह्मण ग्रंथों की तुलना में अधिक है। ऐसा माना जाता है कि इन ग्रंथों की रचना वानप्रस्थियों और संन्यासियों के लिए आत्मतत्व और ब्रह्मविद्या के ज्ञान के लिए हुयी। अथर्ववेद के अतिरिक्त, तीनों वेदों के एक या अधिक आरण्यक हैं –

ऋग्वेद :- ऐतरेय आरण्यक, कौषीतकि आरण्यक या शांखायन आरण्यक

यजुर्वेद :- वृहदारण्यक, तैत्तिरीय, मैत्रायणी आरण्यक

सामवेद :– तावलकर / जैमिनीयोपनिषद् आरण्यक, छान्दोग्य आरण्यक

उपनिषद् :–

हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रन्थ, जिनका ज्ञान गुरु के पास बैठकर ग्रहण किया जाता था, उपनिषद कहलाते हैं। इनमें ईश्वर, परमात्मा – ब्रह्म और आत्मा के स्वभाव और सम्बन्ध का ज्ञानपूर्ण वर्णन मिलता है। उपनिषदों की कुल संख्या 108 है लेकिन मुख्य उपनिषद 13 हैं – ईश, केन, कठ, प्रश्न, मुण्डक, माण्डुक्य, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य, कौषीतकी, वृहदारण्यक, श्वेताश्वतर, मैत्रायणी।

वेदांग :–

वेद के ज्ञान में सहायक शास्त्र वेदांग कहलाते हैं। वेदांगों की संख्या 6 है – शिक्षा, कल्प, व्याकरण, ज्योतिष, छंद और निरुक्त।

सूत्र :–

सूत्र साहित्य का विशेष महत्त्व है क्योंकि इनमें सूत्र बहुत संक्षिप्त हुआ करते थे और किसी ग्रन्थ को कंठस्थ करने में सूत्र मदद करते थे। अष्टाध्यायी पाणिनि रचित व्याकरण का सूत्र ग्रन्थ है। इसके अलावा योगसूत्र, न्यायसूत्र, कामसूत्र, कल्पसूत्र आदि भी सूत्र के उदाहरण हैं।

महाकाव्य :-

महाकाव्य में देवता या महान क्षत्रिय नायक होता है और इसमें शृंगार, वीर या शांत रस में से कोई एक प्रधान होता है। रामायण, महाभारत, बुद्धचरित, पृथ्वीराज रासो, रामचरितमानस, पद्मावत आदि महाकाव्य हैं जिन्हें अलग – अलग भाषा में लिखा गया है।

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पुराण :–

प्राचीन भक्ति ग्रन्थ के रुप में पुराण का विशेष स्थान है। इनमें देवी – देवताओं को केंद्र मानकर पाप – पुण्य, धर्म – अधर्म, कर्म – अकर्म की गाथाएं कही गयी है। पुराणों की संख्या 18 है – ब्रह्म पुराण, पद्म पुराण, विष्णु पुराण, वायु पुराण, भागवत पुराण, नारद पुराण, मार्कण्डेय पुराण, अग्नि पुराण, भविष्य पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, लिङ्ग पुराण, वाराह पुराण, स्कन्द पुराण, वामन पुराण, कूर्म पुराण, मत्स्य पुराण, गरुड पुराण और ब्रह्माण्ड पुराण।

स्मृति :-

हिन्दू धर्म के ऐसे धर्मग्रंथों का समूह स्मृति कहलाता है जो मानव द्वारा रचित हैं। इन्हें वेदों से नीचे का दर्जा प्राप्त है। स्मृतियों में आसान कहानियां और नैतिक उपदेश हैं जिन्हें समझना वेदों की तुलना में आसान होता है। मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति, अत्रि स्मृति, विष्णु स्मृति, हारीत स्मृति कुछ मुख्य स्मृतियों के नाम हैं।

ब्राह्मणेत्तर साहित्य में बौद्ध साहित्य आदि आते हैं।

दोस्तों, प्राचीन भारत के धार्मिक साहित्य की ये थोड़ी – सी जानकारी लेकर ही आप समझ गए होंगे कि हमारे साहित्य का कितना अधिक विस्तार है और इसमें कितना ज्ञान भरा हुआ है।

जागरुक टीम ये उम्मीद करती है कि ये जानकारी आपको भारत के साहित्य के महत्व से अवगत करा पायी होगी और ये जानकारी आपको पसंद आने के साथ आपके लिए उपयोगी भी साबित होगी।

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