भारत का प्रथम हिन्दी समाचार पत्र

आइये जानते हैं भारत का प्रथम हिन्दी समाचार पत्र कौन सा था। आज हम ”सूचना क्रांति” के युग में जी रहे है जहाँ कोई भी व्यक्ति ताजा खबर से बेखबर नहीं हैं। कारण यह है की 21वी सदी ने हमें कई साधन प्रदान किए है जैसे- इंटरनेट, टेलीविज़न, फोन। इनमें से कोई ना कोई साधन सब के पास होता ही है।

आज खबर को इधर से उधर करने में पलभर की भी देरी नहीं होती। लेकिन क्या आपने कभी उस जमाने के बारे सोचा है जब दुनिया संसाधन हीन थी। लेकिन लोगों में जुनून सर चढ़कर था। तभी तो गुलाम भारत की सारी खबर देश प्रेमियों तक पहुँच पाती थी। माध्यम थोड़ा धीमा जरूर था लेकिन लोगों का मनोबल उच्च था।

आज सूचना क्रांति के युग में भारत अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस बात को तो आप स्वयं भी अनुभव करते होंगे। कही भी सफर कर रहे हो हर जगह आप देश-दुनिया की जानकारी से वाकिफ होंगे। आइए भारत का प्रथम हिन्दी समाचार पत्र कौन सा था। क्या आपने कभी उस दौर की कल्पना की है? नहीं ना, तो चलिए उस जमाने की भी कुछ बातें हो जाए।

भारत का प्रथम हिन्दी समाचार पत्र

30 मई 1826 भारतीय इतिहास की एक ऐसी तारीख जिस दिन भारत का पहला साप्ताहिक हिन्दी अखबार ”उदन्त मार्तण्ड” को प्रकाशित किया गया। भारत का पहला अंग्रेजी भाषीत अखबार ”बंगाल गजट” से ठीक 46 वर्ष बाद ”उदन्त मार्तण्ड” अखबार प्रकाशित हो पाया।

उस जमाने में भारतीयों को अंग्रेज़ी की थोड़ी कम समझ थी इसलिए अंग्रेज़ी अखबार की छवि पढ़े-लिखे लोगों या उँचे पदस्थ लोगों के लिए ही मानी जाती थी। लेकिन जब ”उदन्त मार्तण्ड” को प्रकाशित किया गया तो लोगों को भी अपने देश के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त होने लगी और लोग जागरूक बनने लगे।

इस अखबार में ब्रज और खड़ीबोली दोनों का मिश्रित रूप से प्रयोग होता था इसलिए इसके संचालक इस अखबार की भाषा को “मध्यदेशीय भाषा” कहते थे। लोगों को एक जरिया सा मिल गया था अपनी बात को सामने रखने का। उदन्त मार्तण्ड का हिन्दी अर्थ होता है ”उगता हुआ सूर्य”। इसका प्रकाशन प्रति मंगलवार को कोलकाता से शुरू हुआ था। इस अखबार के संपादक जुगलकिशोर सुकुल ने की थी। वे मूल रूप से कानपुर के वासी थे।

उस वक्त अंग्रेज़ी, फारसी और बांग्ला में तो कई अखबार थे लेकिन हिन्दी में एक भी नहीं था और जहाँ से इस हिन्दी अखबार का प्रकाशन शुरू हुआ वो हिन्दी भाषित क्षेत्र नहीं था। इससे पता चलता है जुगलकिशोर सुकुल हिन्दी का कितना महत्व समझते थे।

उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन बंद करने के पीछे क्या कारण थे? उस जमाने में कोलकाता शहर में हिन्दी पाठक को पाना नामुमकिन कार्य था। इसलिए उदन्त मार्तण्ड के अधिकारियों ने इस अखबार को उत्तर भारत में भेजने की पूरी कोशिश की। लेकिन यह इतना महँगा पड़ने लगा की अखबार की लागत भी नहीं निकल रही थी। दरअसल, उस जमाने में सरकारी सहायता के बिना किसी अखबार को अपने दम पर चलाना नामुमकिन होता था।

ब्रिटिश कंपनी मिशनरियों को तो डाक सुविधा दे रखी थी। लेकिन लाख प्रयास के बाद भी उदन्त मार्तण्ड को यह सुविधा नहीं मिल पाई। उदन्त मार्तण्ड अखबार से आर्थिक जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही थी। 1 वर्ष 6 माह में इस पत्रिका के कुल 79 अंक ही प्रकाशित हो पाए थे और 4 दिसंबर 1827 को इस अखबार को बंद कर दिया गया।

इस अखबार के अंतिम अंक में लिखा गया-

”आज दिवस लौं उग चुक्यौ मार्तण्ड उदन्त
अस्ताचल को जात है दिनकर दिन अब अन्त।”

हर साल 30 मई को भारत में हिन्दी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है। क्योंकि इसी दिन से प्रथम हिन्दी अखबार “उदन्त मार्तण्ड” का प्रकाशन शुरू हुआ था। 1830 में राममोहन राय ने बड़ा हिंदी साप्ताहिक ‘बंगदूत’ का प्रकाशन कोलकाता से आरंभ किया। जो अहिंदी क्षेत्र था। यह समाचार पत्र बहुभाषीय था। उस जमाने में आज की तरह हिन्दी सबकी बोलचाल भाषा नहीं थी। जो जिस क्षेत्र से होता था उसे वही भाषा सहज लगती थी।

संपादकों के लिए उस वक्त सबसे कठिन यह था की पाठकों को शुद्ध भाषा दी जाए या सुलभ। देश को आजाद कराने व समाज-सुधार की भावना को प्रज्वलित करने हेतु समाचार पत्र की अहम भूमिका व जरिया था। इसलिए संपादक अपनी क्षमतानुसार एक ही पत्र कई भाषा में छपवाते थे।

राममोहन राय की तरह राजा शिव प्रसाद द्वारा 1846 में ‘बनारस अख़बार’ का हिंदी में प्रकाशन शुरू किया। इससे पता चलता है की हिन्दी का क्या महत्व था। इस तरह अख़बारों की संख्या तो बढ़ी पर नाममात्र को ही बढ़ी। अधिकांश पत्र जल्द ही बंद हो गये और उन की जगह नये पत्र ने ले ली। प्रायः समाचार-पत्रों का जीवन कुछ महीनों से ले कर दो-तीन साल तक का ही था। 1854 में हिंदी का प्रथम दैनिक ‘समाचार सुधा वर्षण’ निकाला गया।

आज वर्तमान भारत में हिन्दी के कई अखबार है। हिन्दी राजभाषा होने के कारण भारत के सभी राज्यों में अब हिन्दी पाठक का ना होना अब नामुमकिन है। क्योंकि हिन्दी अब सहज बोलचाल की भाषा है। इसलिए गर्व से कहो ”हिन्दी है हम”।

उम्मीद है जागरूक पर भारत का प्रथम हिन्दी समाचार पत्र कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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