भारत के प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त

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आइये जानते हैं भारत के प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त कौन थे (bharat ke pahle mukhya chunav ayukt kaun the)। भारतीय मुख्य निर्वाचन आयुक्त या भारतीय मुख्य चुनाव आयुक्त का अर्थ एक ही होता है। यह भारतीय चुनाव आयोग का प्रधान होता हैं। इस पद का कार्यभार देश में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से राष्ट्र और राज्य के चुनाव को शांति से करवाने की जिम्मेदारी होती हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती हैं। चुनाव आयोग के प्रधान के रूप में वर्तमान में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो चुनाव आयुक्त का प्रावधान हैं।

भारत के प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त (bharat ke pahle mukhya chunav ayukt kaun the)

भारत के प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त ”सुकुमार सेन” को देश आज भी सम्मान से याद करता हैं। 1951-52 और 1957 में देश के प्रथम दो चुनाव सुकुमार सेन के कार्यकाल में सफलतापूर्वक सम्पन हुए थे।

सुकुमार सेन का जन्म 1899 में ब्रिटिश भारत, बंगाल में बंगाली ब्राह्मण परिवार में हुआ था। कोलकाता और लंदन से इन्होंने अपनी शिक्षा पूर्ण की थी। 1921 में भारतीय सिविल सेवा में शामिल हुए। फिर आईसीएस अफसर और एक जज के रूप में कई जिलों में अपनी सेवा प्रदान की।

1947 में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव नियुक्त हुए। जो उस समय का सबसे वरिष्ठ ओहदा माना जाता था। सेन ने प्रथम मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यभार 21 मार्च 1950 से लेकर 19 दिसम्बर 1958 तक संभाला था।

अपनी सर्वश्रेष्ठ सेवाओं के लिए सेन को 1954 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। इस सम्मान को प्राप्त करने वाले वे देश के प्रथम नागरिक की सूची में भी शामिल हुए। सुकुमार सेन भारत के अतिरिक्त सूडान देश के भी प्रथम मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तौर पर भी अपनी सेवा प्रदान की थी।

15 जून 1960 में बर्दमान विश्वविद्यालय के प्रथम वाईस चान्सलर के पद पर भी नियुक्त हुए थे। इनके कार्य व देश के प्रति इनकी सेवा निष्ठा के भाव को देश सदा याद रखेगा। वो कहते है ना समय चला जाता है लेकिन कारनामे यादें बनकर समाज में सदा जीवित रहती है। वर्ष 1961 में देश के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन जी का निधन हो गया।

देश के मुख्य चुनाव आयुक्त को संसद द्वारा महाभियोग के द्वारा ही हटाया जा सकता हैं। नये प्रावधान के अंतर्गत मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल 6 वर्ष या उम्र 65 वर्ष। इनमें से जो भी पहले आए। माना की अगर उम्र पहले आती है और कार्यभार को संभाले हुए कुछ महीने ही हुए है तो आयुक्त को अपना कार्यभार का पद त्यागना होता है।

उम्मीद है जागरूक पर bharat ke pahle mukhya chunav ayukt kaun the कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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