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प्रोटॉन की खोज किसने की?

आइये जानते हैं प्रोटॉन की खोज किसने की (Proton ki khoj kisne ki)। परमाणु पदार्थ की सबसे छोटी इकाई होते हैं और हर परमाणु नाभिक से बना होता है। न्यूट्रॉन प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉन का सम्बन्ध नाभिक से ही होता है। इलेक्ट्रॉन पर ऋणावेश पाया जाता है, प्रोटॉन पर धनावेश और न्यूट्रॉन पर कोई विद्युत आवेश नहीं पाया जाता है।

1897 में जे.जे.थॉमसन ने इलेक्ट्रॉन की खोज की और ये बताया कि इलेक्ट्रॉन पर ऋणावेश पाया जाता है। इस खोज के बाद वैज्ञानिकों के लिए धनावेश की खोज (प्रोटॉन की खोज) करना भी जरुरी हो गया क्योंकि वैज्ञानिक जानते थे कि परमाणु उदासीन होता है।

ऐसे में इलेक्ट्रॉन के ऋणात्मक आवेश को संतुलित करने के लिए निश्चित रूप से उतना ही धनावेश भी उपस्थित होता होगा जो इलेक्ट्रान के ऋण आवेश को संतुलित कर सके ताकि परमाणु उदासीन रह सके।

प्रोटॉन की खोज किसने की? (Proton ki khoj kisne ki)

अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने बहुत से प्रयोगों के बाद ये साबित कर दिया कि परमाणु के बीच में एक धनात्मक केंद्र पाया जाता है। परमाणु के इस केंद्र में ही अधिकतम भार होता है। इस केंद्र यानी नाभिक में धनात्मक कण पाए जाते हैं। 1920 में इन धनात्मक कणों को ही रदरफोर्ड ने प्रोटॉन नाम दिया।

1886 में गोल्डस्टीन ने अपने प्रयोगों के दौरान प्रोटॉन की उपस्थिति को ऑब्जर्व किया लेकिन इन्हें प्रोटॉन नाम देने और इनकी उपस्थिति से सम्बंधित स्पष्ट जानकारी देने का श्रेय रदरफोर्ड को जाता है जिन्हें नाभिकीय भौतिकी का जनक भी माना जाता है।

प्रोटॉन ग्रीक भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है- फर्स्ट। रदरफोर्ड के अनुसार प्रोटॉन की संख्या हर परमाणु के नाभिक में अलग-अलग होती है।

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