रेडिएशन थैरेपी क्या है?

आइये जानते हैं रेडिएशन थैरेपी क्या है। कैंसर एक गंभीर बीमारी है जिसका समय रहते इलाज ना हो तो मरीज की जान भी जा सकती है। ऐसे में कैंसर का पता लगते ही ट्रीटमेंट शुरू कर दिया जाता है और इस ट्रीटमेंट में रेडिएशन थैरेपी भी आती है। ये थैरेपी ट्यूमर को जड़ से समाप्त करने में बहुत सहायक साबित होती है।

ऐसे में इस थैरेपी के बारे में आपको भी जरूर जानना चाहिए इसलिए आज हम आपको रेडिएशन थैरेपी के बारे में जानकारी देते हैं।

रेडिएशन थैरेपी क्या है?

रेडिएशन थैरेपी की मदद से कैंसर का इलाज तो होता ही है, साथ ही कई बार ब्लड डिसऑर्डर और थायरॉइड की समस्या को दूर करने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। इस थैरेपी में रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है और ये तरंगें उच्च ऊर्जा वाली आयनीकरण विकिरणें होती हैं। कैंसर के इलाज में कई बार जरुरत के अनुसार रेडिएशन थैरेपी का उपयोग कीमोथैरेपी के साथ भी किया जाता है।

रेडिएशन थैरेपी के दो रुप होते हैं-

एक्सटर्नल बीम रेडिएशन थैरेपी – इस थैरेपी का ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। इसमें बाहर से किरणों को एक मशीन की मदद से, इलाज करने की जगह पर फोकस किया जाता है।

इंटर्नल रेडिएशन थैरेपी – इस थैरेपी का इस्तेमाल तब किया जाता है जब कैंसर टिशूज के आसपास मौजूद स्वस्थ कोशिकाओं की सुरक्षा करनी होती है। इस प्रक्रिया में एक रेडियोएक्टिव पदार्थ को शरीर के अंदर कैंसर टिशूज के पास एक निश्चित समय के लिए रखा जाता है।

कैसे की जाती है रेडिएशन थैरेपी

कैंसर के मरीज को कितनी मात्रा में रेडिएशन दी जानी है, ये उसके डॉक्टर द्वारा निर्धारित किया जाता है। इस ट्रीटमेंट को शुरू करने से पहले सीटी स्कैन करके मरीज के शरीर में मौजूद कैंसर की जगह पता लगायी जाती है और उस स्थान पर निशान लगा दिया जाता है ताकि ट्रीटमेन्ट के दौरान उसी स्थान पर रेडिएशन दी जा सके।

रेडिएशन थैरेपी के लिए मरीज को एक टेबल पर लिटाया जाता है और जिस हिस्से का ट्रीटमेन्ट किया जाना होता है, उसे छोड़कर शरीर के बाकी सभी हिस्सों को रेडिएशन से बचाने के लिए ढ़क दिया जाता है।

रेडिएशन थैरेपी में सामान्य रुप से 10 से 30 मिनट का समय लगता है और मरीज की जरुरत के अनुसार, रेडिएशन थैरेपी के सेशन रखे जाते हैं जो किसी मरीज के लिए हफ्ते में 5 बार भी हो सकता है और ये सेशंस कई हफ़्तों तक चलते हैं।

रेडिएशन थैरेपी के दोनों रूपों में ट्रीटमेंट कुछ इस तरह किया जाता है-

एक्सटर्नल बीम रेडिएशन थैरेपी में एक लीनियर एक्सेलरेटर (रैखिक त्वरक) मशीन का उपयोग किया जाता है जिसकी मदद से एक्स तरंगें कैंसर वाले निश्चित स्थान पर डाली जाती हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और गामा किरणों जैसी ऊर्जा तरंगों का इस्तेमाल करने के लिए कुछ अन्य मशीनों का इस्तेमाल भी किया जाता है।

इंटरनल थैरेपी में धातु की एक ट्यूब या तार को शरीर के अंदर प्रभावित स्थान के पास डाला जाता है ताकि उस प्रभावित स्थान को रेडिएशन दी जा सके। ये तार या ट्यूब शरीर में प्रवेश करवाने के लिए कई बार सर्जरी की जरुरत पड़ती है और कई बार बिना सर्जरी ही इसे शरीर में प्रवेश कराया जाता है।

रेडिएशन थैरेपी से क्या फायदे होते हैं-

  • कैंसर की ग्रोथ रोकने में ये थैरेपी बहुत कारगर साबित होती है।
  • कैंसर की शुरुआती अवस्था में रेडिएशन थैरेपी की मदद से सर्जरी करना संभव हो पाता है।
  • रेडिएशन थैरेपी के सेशंस अक्सर 10 से 30 मिनट के समय में ही पूरे हो जाते हैं।
  • कैंसर बढ़ जाने की स्थिति में रेडिएशन थैरेपी दर्द से राहत दिलाती है।

रेडिएशन थैरेपी से होने वाले नुकसान-

  • रेडिएशन थैरेपी के कारण कुछ लोगों को जी मिचलाने की समस्या हो सकती है।
  • बार बार यूरिन पास करने की समस्या भी हो सकती है।
  • मुँह और गले में छाले भी हो सकते हैं।
  • बाल झड़ने की समस्या भी हो सकती है।

रेडिएशन थैरेपी से किस तरह के नुकसान हो सकते हैं, ये इस बात पर निर्भर करता है कि शरीर के किस भाग का इलाज किया जा रहा है और किस लेवल की रेडिएशन मरीज के उस अंग को दी जा रही है। इस थैरेपी से होने वाले नुकसान भी मरीज के शरीर की क्षमता के अनुसार अलग अलग हो सकते हैं, जिन्हें डॉक्टर से सुझाव लेकर ठीक किया जा सकता है।

रेडिएशन थैरेपी के दौरान सावधानियां-

रेडिएशन थैरेपी सही तरह से कैंसर सेल्स को मिटा सके और शरीर को कम से कम तकलीफ सहन करनी पड़े, इसके लिए मरीज को डॉक्टर के इन निर्देशों का पूरी तरह पालन करना चाहिए-

  • थैरेपी के दौरान आहार हल्का और संतुलित लेना चाहिए
  • खाने को एक साथ खाने की बजाए कई बार में थोड़ा-थोड़ा करके खाना चाहिए
  • शराब, नशीले पदार्थ और मसालेदार खाने से दूरी रखनी चाहिए
  • ट्रीटमेंट के दौरान ज्यादा से ज्यादा लिक्विड का सेवन करना चाहिए

उम्मीद है जागरूक पर रेडिएशन थैरेपी क्या है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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