राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश में क्या अंतर है?

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आइये जानते हैं राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश में क्या अंतर है। ये तो आप भी जानते होंगे कि भारत राज्यों का संघ है और इसमें 28 राज्य और 9 केंद्र शासित प्रदेश हैं। लेकिन क्या आप राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के बीच के अंतर को समझते हैं?

अगर नहीं, तो ये लेख पढ़कर आपको राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के बीच का स्पष्ट अंतर आसानी से समझ आ जाएगा इसलिए आज इसी बारे में जानते हैं। तो चलिए, राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के अंतर को जानते हैं।

राज्य और केन्द्र शासित प्रदेश में अंतर

भारत के प्रदेशों को भी ‘राज्य’ कहा जाता है। राज्य ऐसी संगठित इकाई होती है जो एक शासन (सरकार) के अधीन होती है। राज्य संप्रभुता सम्पन्न हो सकते हैं जबकि केंद्र शासित प्रदेश या संघक्षेत्र भारत के संघीय प्रशासनिक ढाँचे की एक उप-राष्ट्रीय प्रशासनिक इकाई होता है।

राज्य की अपनी चुनी हुयी सरकार होती है जबकि केंद्रशासित प्रदेश में सीधे भारत सरकार का शासन होता है।

पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त राज्यों में राज्य सरकार का मुखिया मुख्यमंत्री होता है और इन राज्यों के सभी विकास कार्यों सम्बन्धी फैसले मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल की मदद से लेता है। केंद्र शासित प्रदेश में केंद्र सरकार द्वारा बनाये गए कानून लागू होते हैं और संविधान के अनुसार, इन केंद्र शासित प्रदेशों के कार्य करने का अधिकार सीधे राष्ट्रपति को होता है।

भारत के 9 केंद्र शासित प्रदेशों (दिल्ली, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव, लक्षद्वीप, पुडुचेरी, लद्दाख, जम्मू और कश्मीर) में से दिल्ली, अंडमान-निकोबार और पुडुचेरी का कार्यभार उपराज्यपाल द्वारा संभाला जाता है। उपराज्यपाल राष्ट्रपति द्वारा नामित होता है। इन राज्यों के राज्यपाल को मुख्यमंत्री से ज्यादा अधिकार प्राप्त होते हैं।

राज्य में शक्ति का विभाजन केंद्र और राज्य के बीच होता है जबकि केंद्र शासित प्रदेश में सारी शक्ति केंद्र के हाथ में होती है।

सामान्य तौर पर केंद्र शासित प्रदेशों का आकार राज्य की तुलना में छोटा होता है।

जागरूक टीम को उम्मीद है कि अब राज्य और केंद्र शासित प्रदेश के बीच का अंतर समझना आपके लिए आसान हो गया होगा और ये जानकारी आपके लिए उपयोगी भी साबित होगी।

References:

WikiPedia