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रैम और रोम में क्या अंतर है?

अगर आप कंप्यूटर फ्रैंडली हैं तो रैम और रोम नाम आपने जरुर सुने होंगे और शायद आप इनके यूज के बारे में भी जानते हों लेकिन अगर आप एक से लगने वाले इन दोनों टर्म्स के बीच अंतर नहीं कर पाते हैं तो आज का ये लेख आपके लिए है जिसमें हम रैम और रोम के अंतर को समझेंगे।

तो चलिए, आज रैम और रोम के अंतर को जानते हैं:-

कंप्यूटर मेमोरी 2 टाइप की होती है। प्राइमरी मेमोरी और सेकेंडरी मेमोरी। प्राइमरी मेमोरी में रैम और रोम आते हैं और सेकेंडरी मेमोरी में हार्ड ड्राइव और सीडी आदि आते हैं।

रैम और रोम दोनों का इस्तेमाल कंप्यूटर और टैबलेट आदि में होता है। ये दोनों ही कंप्यूटर की इंटर्नल मेमोरी होती हैं जिसमें डेटा स्टोर किया जाता है।

आइये,पहले रैम के बारे में थोड़ी जानकारी लेते हैं ताकि इनके बीच का अंतर आसानी से समझा जा सके-

  • रैम (RAM) एक तरह की प्राइमरी मेमोरी होती है।
  • इसकी फुल फॉर्म Random Access Memory होती है।
  • इसे Volatile Memory, Main Memory और Physical Memory भी कहा जाता है।
  • इसकी मदद से कंप्यूटर एक ही समय में बहुत से काम एकसाथ कर पाता है।
  • इस मेमोरी में हम कितनी भी बार कुछ लिख सकते हैं, मिटा सकते हैं और देख भी सकते हैं।
  • रैम में डेटा को स्थायी रुप से स्टोर करके नहीं रखा जा सकता क्योंकि ये एक अस्थायी मेमोरी होती है।
  • रैम की प्रोसेसिंग काफी तेज होती है और ये मेमोरी डेटा को केवल उतने समय के लिए स्टोर रखती है जितने समय तक कंप्यूटर का स्विच ऑन रहता है।

रैम के 2 प्रकार होते हैं:-

  • Static (SRAM)
  • Dynamic (DRAM)

अब जानते हैं ROM के बारे में:-

  • ROM की फुल फॉर्म Read Only Memory होती है।
  • ये परमानेंट मेमोरी होती है।
  • इसमें प्रोग्राम्स पहले से ही स्टोर रहते हैं जिन्हें बदला नहीं जा सकता और ना ही हटाया जा सकता है। उन्हें केवल पढ़ा जा सकता है इसलिए इसे रीड ओनली मेमोरी कहते हैं।
  • कंप्यूटर का स्विच ऑफ होने के बाद भी रोम में स्टोर डेटा डिलीट नहीं होता है इसलिए रोम को परमानेंट मेमोरी और नॉन वोलेटाइल मेमोरी कहते हैं।

रोम के 3 प्रकार होते हैं:-

  • PROM (Programmable Read Only Memory)
  • EPROM (Erasable Programmable Read Only Memory)
  • EEPROM (Electrical Programmable Read Only Memory)

आइये, अब RAM और ROM के अंतर को जान लेते हैं:-

  • RAM का इस्तेमाल टेम्पररी स्टोरेज के लिए होता है जबकि ROM परमानेंट स्टोरेज के लिए इस्तेमाल होती है।
  • RAM में बिना पावर के डेटा सेव नहीं रहता जबकि ROM में बिना पावर भी डेटा सेव रहता है।
  • RAM में डेटा स्टोर होने में ज्यादा समय नहीं लगता है जबकि ROM में डेटा स्टोर होने में ज्यादा समय लगता है।
  • RAM डेटा को CPU के जरिये एक्सेस किया जा सकता है जबकि ROM के डेटा को CPU एक्सेस नहीं कर सकता।
  • RAM के बिना मदर बोर्ड काम नहीं कर सकता जबकि ROM का होना मदर बोर्ड के काम करने के लिए कम्पलसरी नहीं है।
  • RAM की प्रोसेसिंग फास्ट होती है जबकि ROM की प्रोसेसिंग स्लो होती है।
  • RAM महँगी मेमोरी होती है जबकि ROM तुलनात्मक रुप से सस्ती होती है।
  • RAM का साइज बहुत बड़ा (64 MB से 16 GB…) हो सकता है जबकि ROM का साइज इससे कम होता है।
  • RAM के डेटा को बहुत बार देखा, पढ़ा और मिटाया जा सकता है जबकि ROM के डेटा को केवल पढ़ा जा सकता है।

दोस्तों, अब आप RAM और ROM के बीच अंतर को समझ गए होंगे। जागरुक टीम को उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आने के साथ – साथ आपके लिए उपयोगी भी साबित होगी।