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रावण की लिखी हुई प्रमुख रचनाएं कौन सी है?

आइये जागरूक पर जानते हैं रावण की लिखी हुई प्रमुख रचनाएं कौन सी है। लंका का राजा रावण अपने दस सिरों के कारण दशानन कहलाया। रावण सारस्वत ब्राह्मण पुलस्त्य ऋषि का पौत्र था। ब्राह्मण पिता विश्रवा और राक्षसी माता कैकसी का पुत्र रावण विष्णु विरोधी था लेकिन इसके साथ – साथ वो परम वाल्मीकि भक्त, महापराक्रमी, शास्त्रों का प्रखर ज्ञाता और प्रकांड विद्वान पंडित भी था। रावण को मायावी भी कहा जाता था क्योंकि उसे इंद्रजाल तंत्र, जादू और सम्मोहन आता था।

पद्मपुराण, श्रीमद्भागवत पुराण, कूर्मपुराण, रामायण, महाभारत, आनन्द रामायण, दशावतारचरित जैसे ग्रंथों में रावण का उल्लेख मिलता है। शास्त्रों के ज्ञाता रावण ने बहुत से शास्त्रों की रचना की है। आइये, रावण द्वारा रचित प्रमुख शास्त्रों की जानकारी लेते हैं।

रावण की लिखी हुई प्रमुख रचनाएं

शिव तांडव स्रोत

मान्यता है कि एक बार रावण ने कैलाश पर्वत को ही उठा लिया था और जब पूरे पर्वत को रावण लंका ले जाने लगा तो भगवान शिव ने अपने अंगूठे से थोड़ा दबाव डालकर कैलाश को फिर से उसकी पूर्व स्थिति में स्थापित कर दिया। इस दौरान रावण का हाथ दब गया और वो शंकर भगवान से क्षमा मांगते हुए उनकी स्तुति करने लगा। रावण की ये क्षमा याचना और स्तुति ही कालांतर में शिव तांडव स्रोत कहलायी।

रावण संहिता

ये रावण द्वारा रचित एक प्राचीन ग्रन्थ है जिसमें रावण के सम्पूर्ण जीवन की जानकारी है। साथ ही ज्योतिष का ज्ञान भी समाहित है। इस संहिता में रावण ने बिल्व पत्र पूजन के विशेष महत्त्व और उससे अपार धन प्राप्ति सम्बन्धी बातों का वर्णन किया है।

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अरुण संहिता

संस्कृत के इस ग्रन्थ में जन्म कुंडली, हस्त रेखा और सामुद्रिक शास्त्र का मिश्रण है। इस मूल ग्रन्थ का अनुवाद कई भाषाओं में हो चुका है। माना जाता है कि इसका ज्ञान रावण को सूर्य के सारथि अरुण ने दिया था।

रावण द्वारा रचित चिकित्सा और तंत्र विधा से जुड़े ये 4 ग्रन्थ प्रमुख हैं:-

  1. दस शतकात्मक अर्कप्रकाश
  2. दस पटलात्मक उड्डीशतंत्र
  3. कुमारतंत्र
  4. नाड़ी परीक्षा

रावण के ये चारों ग्रन्थ जानकारी के भंडार हैं। रावण के अनुसार अंगूठे के मूल में चलने वाली धमनी जीवन नाड़ी होती है। साथ ही रावण द्वारा ये भी बताया गया है कि महिला और पुरुष में नाड़ियों का परीक्षण कैसे किया जाना चाहिए। महिला में वाम हाथ और पांव और पुरुष में दक्षिण हाथ और पांव से नाड़ियों का परीक्षण किया जाना चाहिए।

ऐसा माना जाता है कि इन प्रमुख ग्रंथों के अतिरिक्त इंद्रजाल, कुमारतंत्र, अर्कप्रकाश, प्राकृत कामधेनु , प्राकृत लंकेश्वर, ऋग्वेद भाष्य और रावणीयम आदि पुस्तकों का रचयिता भी रावण ही था।

कुमारतंत्र में चेचक, छोटी माता और बड़ी माता जैसे रोगों के लक्षण और बचाव बताये गए हैं। अर्कप्रकाश शिशु स्वास्थ्य योजना से सम्बंधित ग्रन्थ है जिसमें रावण ने मंदोदरी के प्रश्नों के उत्तर दिए हैं। इसमें गर्भस्थ शिशु को रोग, काल और राक्षस से सुरक्षित रखने के उपाय बताये गए हैं।

जागरूक टीम को उम्मीद है कि रावण द्वारा रचित इन ग्रंथों की जानकारी पाकर आपको अच्छा लगा होगा और ये जानकारी आपको रोचक भी लगी होगी। साथ ही रावण द्वारा रचित ग्रंथों से जुड़ी ये जानकारी आपके लिए उपयोगी भी साबित होगी।

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