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संस्कृत साहित्य की प्रमुख प्रसिद्ध किताबें

आइये जागरूक पर जानते हैं संस्कृत साहित्य की प्रमुख प्रसिद्ध किताबों के बारे में। विश्व की सबसे प्राचीन भाषा संस्कृत है और इस महान भाषा ने बहुत-सी आधुनिक भाषाओं जैसे हिंदी, बांग्ला, मराठी, पंजाबी और नेपाली को जन्म दिया है। इस भाषा का इतिहास भी बहुत पुराना है और इस भाषा में बहुत-सी महान रचनाएँ की गयी हैं। ऐसे में आज आपको बताते हैं संस्कृत साहित्य की कुछ प्रमुख और प्रसिद्धि प्राप्त पुस्तकों के बारे में।

संस्कृत साहित्य की प्रमुख प्रसिद्ध किताबें

आर्यभटीय:-

ये संस्कृत भाषा में रचित गणित और खगोलशास्त्र का ग्रन्थ है जिसकी रचना आर्यभट्ट प्रथम ने की थी। इस ग्रन्थ में चार अध्यायों में 123 श्लोक हैं और आर्यभट्ट के इस ग्रन्थ की भाषा बहुत ही संक्षिप्त, परिष्कृत और वैज्ञानिक है। इस ग्रन्थ के अध्यायों में खगोलीय अचर, समय विभाजन और ग्रहों की स्थिति की गणना के नियम, ग्रहण की गणना, त्रिकोणमितीय समस्याओं के हल के लिए नियम और गणनाओं के लिये आवश्यक गणित का वर्णन है।

अर्थशास्त्र:-

ये ग्रन्थ प्राचीन भारतीय राजनीति का एक प्रसिद्ध ग्रन्थ है जिसकी रचना कौटिल्य या चाणक्य द्वारा की गयी। राज्य प्रबंधक विषय पर रचित ये प्राचीनतम ग्रन्थ है। इसमें राज्य व्यवस्था, कृषि, न्याय और राजनीति के अनेक पहलुओं पर विचार किया गया है।

मुद्राराक्षस:-

संस्कृत साहित्य का एक ऐतिहासिक नाटक मुद्राराक्षस है जिसकी रचना चौथी शताब्दी में विशाखदत्त ने की थी। इस नाटक में चाणक्य की राजनीतिक सफलताओं का विश्लेषण किया गया है। इसमें नन्दवंश के नाश, चन्द्रगुप्त के राज्यारोहण, राक्षस के सक्रिय विरोध, चाणक्य की राजनीति विषयक सजगता और राक्षस द्वारा चन्द्रगुप्त के प्रभुत्व की स्वीकृति का विवरण मिलता है।

अभिज्ञानशाकुन्तलम्:-

महाकवि कालिदास का विश्वप्रसिद्ध नाटक अभिज्ञानशाकुन्तलम् हैं जिसमें राजा दुष्यंत और शकुंतला के प्रेम की कहानी को सुन्दर तरीके से प्रस्तुत किया गया है। इस नाटक की प्रसिद्धि का अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि इस नाटक का अनुवाद लगभग हर विदेशी भाषा में हो चुका है।

अष्टाध्यायी:-

महर्षि पाणिनि द्वारा रचित संस्कृत व्याकरण का एक प्राचीन ग्रन्थ अष्टाध्यायी है जिसमें आठ अध्याय हैं। पाणिनि ने संस्कृत भाषा के तत्कालीन स्वरुप को नियमित और परिष्कृत करने के उद्देश्य से भाषा के विभिन्न अवयवों और घटकों का समावेश इस ग्रन्थ में किया है।

महाभाष्य:-

इस ग्रन्थ की रचना पतंजलि ने की। संस्कृत के तीन महान वैयाकरणों में पतंजलि भी शामिल हैं। अन्य दो पाणिनि और कात्यायन हैं। इस ग्रन्थ में शिक्षा, व्याकरण और निरुक्त की चर्चा की गयी है।

पंचतंत्र:-

पंचतंत्र संस्कृत नीति कथाओं में पहला स्थान रखती हैं। पंडित विष्णु शर्मा की ये रचना पूरी दुनिया में ख्याति प्राप्त कर चुकी है। इस पुस्तक में जानवरों और इंसानों को आधार बनाकर बहुत ही आसान और रोचक तरीके से शिक्षा दी गयी है। पंचतंत्र की कहानियां मनोविज्ञान, व्यावहारिकता और राजकाज के सिद्धांतों से परिचित कराती हैं।

योगसूत्र:-

महर्षि पतंजलि द्वारा रचित योगसूत्र योग दर्शन का मूल ग्रन्थ है जो छः दर्शनों में से एक शास्त्र है और योगशास्त्र का एक ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में चित्त को एकाग्र करके ईश्वर में लीन करने का विधान है। इस प्राचीन ग्रन्थ का लगभग 40 भारतीय भाषाओं और दो विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ है।

कामसूत्र:-

महर्षि वात्स्यायन द्वारा रचित ये ग्रन्थ भारत का एक प्राचीन कामशास्त्र ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में मुख्य रुप से धर्म, अर्थ और काम की व्याख्या निहित है। ये ग्रन्थ विश्व की पहली यौन संहिता है जिसमें यौन प्रेम के मनोशारीरिक सिद्धांतों और प्रयोग की विस्तृत व्याख्या की गयी है।

राजतरंगिणी:-

कल्हण द्वारा रचित एक संस्कृत ग्रन्थ राजतरंगिणी है जिसका अर्थ होता है ‘राजाओं की नदी।‘ इस ग्रन्थ में राजाओं के इतिहास का विवरण है। इसमें कश्मीर का इतिहास वर्णित है जो महाभारत काल से आरम्भ हुआ था।

दोस्तों, संस्कृत साहित्य अपने ज्ञान, विस्तार और व्यापकता के लिए विख्यात है और आज हमने आपको इस साहित्य की कुछ प्रमुख और प्रसिद्ध पुस्तकों के विषय में जानकारी देने का प्रयास किया है। जागरुक टीम को उम्मीद है कि ये जानकारी पाकर आप संस्कृत भाषा के महत्त्व को बेहतर तरीके से जान पाएंगे और ये जानकारी आपको पसंद भी आएगी।

संस्कृत भाषा का महत्व

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