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तेल पानी से भारी होता है फिर भी ये पानी पर क्यों तैरता है?

आज हम जागरूक पर आपको बतायेंगे की तेल पानी से भारी होता है फिर भी ये पानी पर क्यों तैरता है। आपने कभी ना कभी तो ये जरूर देखा होगा की जब भी हम पानी में तेल को डालते है तो वह पानी पर तैरने लग जाता है पर क्या कभी ये विचार किया की आखिर ऐसा होता क्यों है क्योकि तेल तो पानी से भारी होता है।

अक्सर हमने यही सुना है की जो चीज भारी होती है वह आसानी से पानी में डूब जाती है फिर तेल पानी से भारी होने के बावजूद वह तैरता क्यों है। आपके इन्ही सब सवालों के जवाब हम आज जागरूक के माध्यम से देंगे तो आइये जानते है ऐसा क्यों होता है।

आखिर क्यों तैरता है तेल पानी के ऊपर?

आपने कई बार पानी में पत्थर फेंककर देखा होगा और वह पत्थर पानी में डूब जाता है लेकिन अगर हम उसी आकार का कोई लकड़ी का टुकड़ा अगर पानी में फेंकते है तो वह नहीं डूबता और पानी के ऊपर तैरता है।

ये इसलिए होता है क्योकि लकड़ी का घनत्व पानी के घनत्व से कम होता है जब भी कोई वस्तु पानी के ऊपर तैरती है तो उसका घनत्व पानी के घनत्व से कम होता है। जब भी किसी वस्तु का घनत्व पानी के घनत्व से कम होगा वह वस्तु हमेशा पानी के ऊपर ही तैरेगी कभी पानी में नहीं डूबेगी।

तेल के पानी के ऊपर तैरने की भी दो वजह है – पहली वजह तो यह है की तेल का घनत्व पानी के घनत्व से कम होता है इसलिए तेल पानी के ऊपर तैरता है। पानी के अणुओ की सघनता तेल के अणुओं की सघनता के मुकाबले अधिक होती है और तेल के अणुओं की सघनता कम होने के कारण वह पानी पर तैरता है।

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अगर इसको हम एक उदाहरण की सहायता से समझे तो मान लीजिये की एक गैस का गुब्बारा आपने छोड़ा तो वह ऊपर की और उड़ने लग जाता है ऐसा इसलिए होता है क्योकि उस गुब्बारे में जो गैस भरी होती है वह हीलियम गैस होती है और हीलियम गैस का घनत्व हमारे वातावरण में मौजूद गैस के घनत्व से कहीं ज्यादा कम होता है।

दूसरी वजह यह है की पानी और तेल ये दोनों अविलेय प्रकार के होते है अथार्त पानी और तेल कभी भी आपस में नहीं मिल सकते। अगर आप इन दोनों को जोर-जोर से हिलाकर मिलाने की कोशिश भी करेंगे तो भी यह कभी भी आपस में मिल नहीं सकते। कुछ समय पश्चात ये दोनों फिर से एक दूसरे से अलग हो जायेंगे और आप देखंगे की तेल फिर से पानी के ऊपर तैर रहा होगा।

इसके अलावा तेल में जो अणु उपस्थित होते है वह गैर धुर्वीय प्रकार के होते है और जो पानी में अणु उपस्थित होते है वह धुर्वीय प्रकार के होते है। पानी में उपस्थित अणु एक सिरे पर ऋणात्मक आवेश व दूसरे सिरे पर धनात्मक आवेश के होते है जिसके कारण ये आपस में एक दूसरे से चिपक नहीं पाते है और इसी कारण तेल और पानी के अणु एक-दूसरे की तरफ आकर्षित नहीं हो पाते है।

अब आप सोच रहे होंगे की ये घनत्व क्या है? किसी पदार्थ के इकाई आयतन में निहित द्रव्यमान को उस पदार्थ का घनत्व कहते हैं। घनत्व किसी पदार्थ के घनेपन की माप है।

उम्मीद है अब तो आप इस पोस्ट के माध्यम से समझ गए होंगे की तेल भारी होने के बावजूद भी पानी पर क्यों तैरता है। आगे भी आपके बीच इसी प्रकार की रोचक जानकारी जागरूक के माध्यम से लाते रहेंगे।

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