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जीवन में सफलता का मूल मंत्र (कहानी)

“सोच को बदलो सितारे बदल जायेंगे, नज़र को बदलो नजारे बदल जायेंगे,

कश्ती को बदलने की जरूरत नही, दिशा को बदलो मंजिल मिल जायेगी.”

एक नगर में एक राजा रहता था लेकिन उस देश का एक विचित्र नियम था। नियम यह था कि वहाँ कोई भी राजा दस सालों से ज़्यादा राज नही कर सकता था और दस साल होते ही वहाँ की प्रजा अपने राजा को नगर के पास समुंद्र के बिचोबिच में स्थित एक वीरान टापू पर छोड़ आते थे जहां अनेकों जंगली जानवरों का वास था। यह सिलसिला कई वर्षो तक चलता रहा, लेकिन कोई भी राजा वहाँ से कभी भी जीवित नही आ पाया।

राजा की शासन अवधि ख़त्म होने से पहले राजा एक हाथी को नगर में भेजता था। फिर हाथी द्वारा जिस व्यक्ति के गले में माला डाली जाती थी वो व्यक्ति आगामी दस सालों के लिए उस नगर का राजा घोषित हो जाता था। लेकिन उस नगर में सभी प्रजाजन को वो टापू वाली बात पता थी कि एक राजा का अंत में क्या हस्र होता है। अतः सभी नगर वासियों ने अपने घर के द्वार बंद कर लिए, कोई भी उस नगर का राजा बनने को तैयार नही था।

लेकिन उसी नगर में एक साहसी युवक रहता था, जो हाथी के सामने आके खड़ा हो गया। फिर क्या था, हाथी ने भी खुशी-खुशी उसे माला पहना दी। हाथी के साथ आये सैनिकों ने उस व्यक्ति से कहा- क्या तुम्हें पता है शासन की वर्ष अवधि समाप्त होते ही तुम्हें उस टापू पे भेज दिया जायेगा?

उस व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए कहा- हाँ मुझे पता है इस नगर का यह नियम, लेकिन दस वर्ष मेरी खुशी के लिए पर्याप्त है।

अतः समय आते ही युवक को उस नगर का राजा बना दिया गया। अपने शासन काल में उस युवक ने नगर में इतना काम करवाया कि सारी प्रजा अपने राजा से बहुत ही प्रसन्न थी। लेकिन समय किसी के लिए नही रुकता, देखते ही देखते राजा के विदाई की घड़ी भी आ गई। सभी नगर वासी बहुत ही दुखी और हताश थे अपने अच्छे राजा को खोने के गम में। राजा को सम्मान सहित समुंद्र तट पर स्थित नाव में बिठाया गया। केवट ने पूछा- राजन चले? तो राजा ने हँसते हुए कहा- हाँ-हाँ क्यों नही, केवट तुम अपना धर्म निभाओ। लेकिन केवट को रह-रह कर एक ही बात सता रही थी कि यह राजा इतना प्रसन्न कैसे है, क्या इन्हें अपनी मौत का भी भय नही? आखिर केवट से रहा नही गया और राजा से पूछ बैठा ”राजन इस विपदा की घड़ी में भी आप इतने प्रसन्न कैसे है? आजतक मैनें कई राजाओं को इस टापू पे छोड़ा और सभी राजाओं ने मुझसे अपनी जान की गुहार लगाई लेकिन आप उन सभी राजाओं से विपरीत है। आपके लिए तो नगर की सारी प्रजा भी बहुत दुखी थी।”

राजा ने हँसते हुए कहा- तुम्हें तुम्हारे सभी प्रश्नों के उत्तर मिलेंगे पहले तुम मुझे मेरी मंज़िल तक तो ले चलो। कुछ ही अंतराल में टापू का किनारा भी आ गया।

टापू को देखते ही केवट की आँखे खुली की खुली रह गई। मानों उसे अपनी आँखों पर यकीन ही नही हो रहा था। केवट ने बड़ी जिज्ञासा भरी नज़रों से राजा को देखा। राजा ने कहा- ”मित्र, मैं अपने दस वर्षो के शासन काल में यह कभी नही भूला कि एक दिन मुझे भी इस टापू पे आना है। इसलिए मैने अपने अच्छे दिनों में ही मेरे आने वाले बुरे दिनों को अच्छा बनाने की ठान ली थी। फिर मैंने अपने कुछ कुशल गुप्तचर सैनिकों को इस टापू पर एक नया राज्य बनाने के कार्य में लगा दिया और यहाँ के सभी जानवरों को दूसरे जंगल में भिजवा दिया गया। यह संपूर्ण कार्य मुश्किल था, पर नामुमकिन नही था।”

तो अब तुम्हीं बताओ मित्र, इस सुंदर और भव्य टापू का भला कौन राजा नही बनना चाहेगा? इसलिए मैं भयभीत नही बल्कि प्रसन्न था।

इस कहानी से हमें यह प्रेरणा मिलती है कि समय कभी एक सा नही रहता। हमें हमारे अच्छे दिनों में ही दूरदर्शिता के साथ जीवन में आने वाले बुरे दिनों को भी अच्छा बनाने हेतु निरंतर प्रयासरत रहना चाहिए क्योकि एक सफल व्यक्ति वही होता है जो भावी दृष्टि रख पाये। हो सकता है हमारा प्रयास एक या दो बार असफल हो लेकिन बार-बार किया गया प्रयास हमें निश्चित ही सफलता की ओर ले जाता है। शुभ संकल्प, अच्छी सोच, सकारात्मक दृष्टिकोण और कड़ी मेहनत के साथ सभी को अपने साथ आगे बढ़ाते रहने से निश्चित ही सफलता हमारे कदम चूमेगी। किसी ने क्या खूब कहा है- ”सफलता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है.”

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