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थायरॉइड कैंसर क्या है?

आइये जानते हैं थायरॉइड कैंसर क्या है। थायरॉइड ग्रंथि के बारे में तो आप जरूर जानते होंगे कि ये ग्रंथि हमारी गर्दन के निचले हिस्से में पायी जाती है और थायरॉइड हार्मोन का असंतुलित स्राव हमारे शरीर के लिए बहुत नुकसानदेह साबित होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि थायरॉइड कैंसर भी पाया जाता है।

ऐसे में आपको थायरॉइड कैंसर से जुड़ी जरुरी जानकारी भी लेनी चाहिए ताकि आप इस ओर जागरूक रह सकें और अपनी सेहत की सुरक्षा कर सकें। तो चलिए, आज आपको बताते हैं थायरॉइड कैंसर के बारे में।

थायरॉइड ग्रंथि एक तितली के आकार जैसी ग्रंथि है जो थायरॉइड हार्मोन स्रावित करती है। ये हार्मोन हमारे शरीर के तापमान, वजन, ब्लड प्रेशर और हार्टबीट को नियंत्रित रखता है।

जब थायरॉइड सेल्स कैंसर सेल्स का निर्माण करने लगती हैं तो इसे थायरॉइड कैंसर कहा जाता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ये कैंसर ज्यादा होता है। इस कैंसर के होने के कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि कैंसर के बाकी प्रकारों की तरह इस कैंसर का प्रमुख कारण भी कोशिकाओं के डीएनए में होने वाला परिवर्तन हो सकता है।

थायरॉइड कैंसर के लक्षण क्या-क्या होते हैं?

  • गर्दन में सूजन आना
  • गर्दन में गांठ बनना
  • गर्दन की गाँठ का कभी-कभी तेजी से बढ़ना
  • साँस लेने में तकलीफ होना
  • निगलने में दिक्कत होना
  • आवाज़ में बदलाव आना
  • लम्बे समय तक खांसी रहना, जिसका कारण ठण्ड ना हो

थायरॉइड कैंसर कितने प्रकार का होता है?

थायरॉइड कैंसर 5 प्रकार का होता है-

  • पैपिलरी थायरॉइड कैंसर – ये कैंसर का सबसे आम रुप है जो 30 -50 साल की उम्र में हो सकता है। ये कैंसर थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन और संचय करने वाली कूपिक कोशिकाओं से पैदा होता है।
  • फॉलिक्युलर थायरॉइड कैंसर – 50 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को प्रभावित करने वाला ये कैंसर भी कूपिक कोशिकाओं से ही उत्पन्न होता है।
  • मेड्यूलरी थायरॉइड कैंसर – कैंसर का ये प्रकार सी कोशिका से शुरू होता है। ये कोशिकाएं कैल्सिटोनिन हार्मोन उत्पन्न करती है इसलिए ब्लड में कैल्सिटोनिन का उच्च स्तर पता करके इस कैंसर का शुरुआती स्तर पर ही पता लगाया जा सकता है।
  • एनाप्लास्टिक थायरॉइड कैंसर – 60 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को प्रभावित करने वाला ये कैंसर दुर्लभ है और बहुत तेजी से बढ़ता है। इसका इलाज बहुत मुश्किल होता है।
  • थायरॉइड लिम्फोमा – कैंसर का ये रूप थायरॉइड की इम्यून सिस्टम सेल्स में शुरू होता है। ये भी एक दुर्लभ कैंसर है जो अधिक उम्र के लोगों में होता है।
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थायरॉइड कैंसर से बचाव कैसे किया जाये?

  • थायरॉइड कैंसर से बचने का कोई निश्चित तरीका नहीं है क्योंकि अभी तक इस कैंसर के होने के स्पष्ट कारण ज्ञात नहीं हो पाए हैं।
  • इस कैंसर के कुछ प्रकार (मेड्युलरी थायरॉइड कैंसर) आनुवंशिक हो सकते हैं यानी परिवार में पहले किसी को थायरॉइड कैंसर हुआ हो या अभी हो, तो इसके होने की सम्भावना काफी बढ़ जाती है।
  • परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के नजदीक रहने वाले लोगों को इसका ख़तरा ज्यादा होता है।

थायरॉइड कैंसर के निदान के लिए कौनसे टेस्ट होते हैं?

  • थायरॉइड फंक्शन टेस्ट
  • थायरोग्लोबुलीन टेस्ट
  • थायरॉइड का स्कैन
  • लैरिंगोस्कोपी
  • थायरॉइड का अल्ट्रासाउंड
  • थायरॉइड बायोप्सी
  • ब्लड में फास्फोरस का पता लगाने के लिए टेस्ट
  • ब्लड में कैल्शियम लेवल का पता लगाने के लिए टेस्ट
  • ब्लड में कैल्सिटोनिन लेवल का पता लगाने के लिए टेस्ट

थायरॉइड कैंसर का इलाज कैसे किया जाता है?

कैंसर सेल्स को ख़त्म करने की प्रक्रिया कैसी होगी, ये मरीज की उम्र, स्वास्थ्य और कैंसर के प्रकार पर निर्भर करता है। जरुरत के अनुसार थायरॉइड ग्रंथि का थोड़ा या पूरा हिस्सा निकालने के लिए सर्जरी की जाती है।

सर्जरी के बाद भी अगर कोई थायरॉइड ऊतक बच गया हो तो उसे समाप्त करने के लिए रेडियोएक्टिव आयोडीन से उपचार करने की जरुरत पड़ सकती है।

थायरॉइड ग्रंथि निकाल दिए जाने की स्थिति में, मरीज को आजीवन थायरॉइड ग्रंथि की दवाएं लेने की जरुरत भी पड़ सकती है।

थायरॉइड कैंसर से जुड़ा सबसे बड़ा ख़तरा ये है कि भले ही थायरॉइड ग्रंथि निकाल दी गयी हो लेकिन फिर भी थायरॉइड कैंसर दोबारा भी हो सकता है। अक्सर ऐसा सर्जरी के बाद अगले 5 सालों में होता है लेकिन सर्जरी के एक लम्बे समय बाद भी ये संभव है।

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अब आप जान चुके हैं कि थायरॉइड कैंसर क्या है और किस तरह फैलता है। इस बीमारी से बचाव का सबसे सामान्य तरीका साल में एक बार हेल्थ चेकअप करवाना है जिससे आपको अपने शरीर से जुड़ी सही जानकारी समय रहते मिल जाये।

उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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