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ट्रॉलिंग क्या होती है?

आइये जागरूक पर जानते हैं ट्रॉलिंग क्या होती है। सोशल मीडिया की इस दुनिया में ऐसे बहुत से काम किये जाते हैं जो हमारे लिए बहुत फायदेमंद साबित होते हैं लेकिन इसी प्लेटफॉर्म पर ऐसे काम भी तेजी से बढ़ने लगे हैं जो क्राइम की कैटेगरी में आते हैं। पहले सिर्फ इंटरनेट पर होने वाला साइबर क्राइम एक समस्या था और अब ट्रोलिंग ने भी बहुत विकराल रुप ले लिया है। ऐसे में आपको भी ये जरुर जानना चाहिए कि ट्रॉलिंग क्या होती है इसलिए आज हमें इसी बारे में बात करनी चाहिए।

तो चलिए, आज ट्रॉलिंग के बारे में जानते हैं:-

वैसे तो ट्रॉलिंग के कई अर्थ होते हैं जैसे मछली पकड़ने की प्रक्रिया और एक अलौकिक प्राणी ट्रॉल कहलाते हैं लेकिन स्कैंडेनेविया की लोक कथाओं में मौजूद एक भयानक जीव का नाम भी ट्रोल था। इस जीव से डरकर लोग यात्रा नहीं कर पाते थे।

ऐसा ही कुछ इंटरनेट ट्रॉलिंग में भी होता है। सोशल मीडिया जैसे फेसबुक या ट्विटर पर अपनी बात कहने वाले लोगों को ट्रॉलिंग की वजह से भटकाव महसूस होता है और उनकी बात और विचार अपना सफर सही दिशा में पूरा ही नहीं कर पाते क्योंकि उन्हें ट्रॉलिंग के जरिये गुमराह करने की कोशिश की जाती है इसलिए इंटरनेट की दुनिया ने ये शब्द ट्रॉल अपनाया।

इस तरह ट्रोल की भयावहता को समझा जा सकता है, जैसे वो भयानक प्राणी ट्रोल था वैसे ही बुरे इरादे रखने वाले लोग जब सोशल मीडिया पर विचारों को बाधित करते हैं तो वो ट्रोलर कहलाते हैं।

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इंटरनेट पर जब कोई व्यक्ति जानबूझकर सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफॉर्म पर लोगों को भड़काता है, उकसाता है या किसी मसले पर विवाद पैदा करता है तो ऐसे व्यक्ति का इरादा ट्रॉलिंग करने का होता है।

इंटरनेट पर ट्रॉलिंग की शुरुआत हँसी – मजाक और टांग खिंचाई से शुरू हुयी थी लेकिन धीरे – धीरे इसने इतना डरावना रुप ले लिया कि अब ये किसी भी व्यक्ति की गरिमा भंग करने लगा है। सोशल मीडिया के ये ट्रोल किसी भी मुद्दे पर होने वाली चर्चा का हिस्सा बनकर उसे अपनी आक्रामक बातों से भटका देते हैं और दूसरों को अपशब्द और छींटाकशी करके मानसिक परेशानी देने लगते हैं।

ट्रॉलिंग कई तरह की हो सकती है जैसे कॉर्पोरेट ट्रॉलिंग, पॉलिटिकल ट्रॉलिंग और ऑर्गेनाइज्ड ट्रॉलिंग।

ट्रोलर्स कौन होते हैं, ये तय करना मुश्किल है क्योंकि ये कोई विशेष कंपनी या व्यक्ति तो होते नहीं है बल्कि ये कोई भी हो सकता है जो अपना फेक अकाउंट बनाकर लोगों को परेशान करना और ग़लत सूचनाएं फैलाकर तनाव पैदा करना पसंद करता हो। कई बार ट्रोलर्स का मकसद समाज में अटेंशन पाना और अव्यवस्था से परेशान होना भी होता है।

ट्रोलिंग के शिकार हर तरह के लोग होते हैं, चाहे अभिनेता हो या खिलाड़ी, आम आदमी हो या राजनेता। अभिनेत्री अनुष्का शर्मा को भी ट्रॉलिंग का शिकार होना पड़ा था और दंगल फिल्म की एक्ट्रेस जायरा वसीम को इस कदर ट्रोल किया गया कि उन्हें जान से मारने की धमकी तक दी गई।

अब तो आप समझ ही गए होंगे कि ट्रॉलिंग सिर्फ हँसी – मजाक तक सीमित नहीं रही है बल्कि सोशल मीडिया की एक बीमारी बन गयी है, जिसे दूर करना भी जरुरी है और इससे बचकर रहना भी जरुरी है।

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दोस्तों, ट्रॉलिंग क्या होती है, ये आप जान चुके हैं इसलिए ना तो किसी को ट्रोल करें और ना ही ट्रॉलिंग का शिकार बनें।

जागरुक टीम को उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और सोशल मीडिया का सही तरीके से और सजगता से इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित भी कर पाएगी।

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