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उपनिषद क्या है और इनका क्या महत्व है?

आइये जागरूक पर जानते हैं उपनिषद क्या है और इनका क्या महत्व है। भारतीय सभ्यता की अमूल्य धरोहर उपनिषद हैं। ये हिन्दू धर्म के महत्वपूर्ण श्रुति धर्मग्रन्थ हैं। वेदों में निहित जटिल ज्ञान को उपनिषदों में सरल तरीके से समझाया गया है इसलिए उपनिषदों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी आपके पास भी होनी चाहिए।

ऐसे में क्यों ना, आज उपनिषद के बारे में जानकारी ली जाये। तो चलिए, आज जानते हैं उपनिषद और उनके महत्त्व के बारे में:-

  • उपनिषद शब्द का अर्थ है – ‘समीप बैठना।’ इसका अर्थ है ब्रह्म विद्या की प्राप्ति के लिए शिष्य का गुरु के पास बैठना।
  • उपनिषद में ऋषि गुरु और शिष्य के बीच गहन संवाद के जरिये वेद का ज्ञान दिया गया है।
  • भारत की दार्शनिक चिंतन धारा का मूल स्रोत उपनिषद साहित्य को ही माना जाता है।
  • उपनिषदों की संख्या लगभग 200 है लेकिन प्रमुख उपनिषद 13 ही हैं। ये संस्कृत में लिखे गए हैं।
  • प्रत्येक उपनिषद किसी न किसी वेद से जुड़ा हुआ है।
  • ऋग्वेद से सम्बंधित उपनिषद ऐतरेयोपनिषद है।
  • यजुर्वेद से सम्बंधित उपनिषद बृहदारण्यकोपनिषद है।
  • सामवेद से सम्बंधित उपनिषद वाष्कल उपनिषद, छान्दोग्य उपनिषद और केनोपनिषद हैं।
  • अथर्ववेद से सम्बंधित उपनिषद माण्डूक्योपनिषद, प्रश्नोपनिषद और मुण्डकोपनिषद हैं।
  • भारत के विभिन्न दर्शनों का सर्वोच्च मान्यता प्राप्त संग्रह उपनिषद हैं।
  • इन्हें वेदांत भी कहा जाता है।
  • उपनिषद का रचनाकाल लगभग 1000 से 300 ई.पू. माना जाता है।
  • उपनिषदों में जन कल्याण की भावना को सर्वोपरि रखा गया है।
  • उपनिषदों में परमेश्वर, परमात्मा – ब्रह्म और आत्मा के सम्बन्ध का दार्शनिक वर्णन किया गया है।
  • उपनिषदों की मूल शिक्षा ब्रह्म, जीव और जगत का ज्ञान पाना है।
  • उपनिषदों में ऋषि – मुनि, देवता – दानव, चर – अचर, पृथ्वी, प्रकृति और पशु – पक्षी के माध्यम से रोचक और प्रेरक कथाओं की रचना की गयी है। इन कथाओं की सहायता से वेदों की व्याख्या की गयी है।
  • उपनिषद की कथाओं के पात्र ब्रह्मा, विष्णु, महेश, सूर्य, इंद्र जैसे देवता और नदी, पर्वत, वृक्ष आदि हैं।
  • उपनिषद आत्मविद्या का मुख्य रूप से प्रतिपादन करते हैं, जिसमें ब्रह्म और आत्मा के स्वरुप, उसकी प्राप्ति के साधन और आवश्यकता की समीक्षा की गयी है।
  • उपनिषदों में समन्वय की भावना है, जिसके अनुसार दोनों पक्षों में जो ग्रहण करने योग्य हो, उसे ग्रहण कर लेना चाहिए।
  • उपनिषद उस काल से सम्बंधित हैं जब विभिन्न वर्णों का उदय हो रहा था।
  • भारत के अनेक ऋषि – मुनियों के गहन चिंतन – मनन का परिणाम उपनिषद हैं, जिन्हें आधार मानकर दुनिया के अनेक धर्मों और विचारधाराओं ने जन्म लिया है।
  • उपनिषद गद्य और पद्य दोनों रूपों में हैं।
  • गद्य उपनिषद प्रश्न, माण्डूक्य, केन, तैत्तिरीय, ऐतरेय, छान्दोग्य, बृहदारण्यक और कौषीतकि हैं।
  • पद्य उपनिषद केन, ईश, कठ और श्वेताश्वतर हैं।
  • शंकराचार्य द्वारा जिन 10 उपनिषदों पर अपना भाष्य लिखा है उन्हीं 10 उपनिषदों (ईश, ऐतरेय, कठ, केन, छान्दोग्य, प्रश्न, तैत्तिरीय, बृहदारण्यक, मांडूक्य और मुण्डक) को प्रमाणिक माना जाता है।
  • उपनिषद में हमारे दार्शनिक ऋषि – मुनियों के अनुभव और ज्ञान का सार निहित है इसलिए साहित्य जगत में उपनिषद सबसे ऊँचा स्थान रखते हैं।
  • उपनिषदों से जो ज्ञान प्राप्त होता है वह सनातन है।
  • जीवन को सही दिशा देने और जन कल्याण को प्रेरित करने की भावना उपनिषद में निहित है। जैसे मुण्डक उपनिषद में ये आदर्श वाक्य लिखा हुआ है – ‘सत्यमेव जयते’ यानी सत्य की हमेशा विजय होती है। इस वाक्य में ही जीवन का गूढ़ ज्ञान छुपा है जो हमें सत्य के मार्ग पर चलने और सभी का हित करने की प्रेरणा देता है।

दोस्तों, उपनिषद वेदों के गहन ज्ञान को तुलनात्मक रूप से सरल तरीके से समझाने वाले साहित्य हैं जिनका भारतीय सभ्यता में महत्वपूर्ण योगदान और स्थान है। जागरुक टीम को उम्मीद है कि उपनिषद से जुड़ी ये ख़ास जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए उपयोगी भी साबित होगी।

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