वेदों का क्या महत्त्व है?

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आइये जागरूक पर जानते हैं वेदों का क्या महत्त्व है। वेदों की पवित्रता और महत्त्व के बारे में आपने हमेशा ही सुना होगा और आप वेदों के महत्त्व को अच्छे तरीके से समझना भी चाहते होंगे इसलिए आज हम आपको बताते हैं कि वेदों का हमारे लिए क्या महत्व है। तो चलिए, आज जानते हैं वेदों का महत्त्व।

वेदों का क्या महत्त्व है?

वेद प्राचीन भारत के पवित्रतम साहित्य हैं जो हिन्दुओं के एकमात्र धर्मग्रन्थ हैं। वेद का अर्थ होता है- ‘ज्ञान’, ‘विदित होना’ यानी वेदों का ज्ञान लेकर ही स्वयं के ज्ञान को पूर्ण किया जा सकता है। वेद वैदिककाल की वाचिक परंपरा की अनुपम और अनमोल कृति है जो छह – सात हजार ईस्वी पूर्व से पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है और आज भी इसका महत्त्व बरकरार है।

वेदों का इतना महत्त्व है कि जीवन सुख और शांति से व्यतीत करने के लिए हमें वेदों की सहायता की आवश्यकता होती है। ऐसा माना जाता है कि वेद का ज्ञान लिए बिना कोई भी व्यक्ति इस संसार में स्वयं और दूसरों के आनंद की व्यवस्था नहीं कर सकता क्योंकि वेदों में हमारे जीवन के लिए आवश्यक सभी घटकों के बारे में सटीक और उत्तम जानकारी दी हुयी है यानी वेदों में व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय – प्रशासनिक व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण विषयों का विस्तृत ज्ञान मौजूद है।

ऐसा माना जाता है कि सृष्टि की शुरुआत में मानव की पहली पीढ़ी को श्रुति के रुप में वेदों का ज्ञान दिया गया। ये ज्ञान ईश्वर ने प्राचीन तपस्वियों को अप्रत्यक्ष रुप से सुनाया जब वे गहरी तपस्या में लीन थे। ईश्वर (ब्रह्म) से ये ज्ञान प्राप्त करने वाले चार ऋषि थे- अग्नि, वायु, अंगिरा और आदित्य ऋषि। तभी से वेदों से जुड़ी श्रवण परंपरा चलती रही और साथ ही साथ भोजपत्र और ताम्रपत्रों के बाद पुस्तक के रूप में हमें उपलब्ध हुयी। वेदों का दायरा असीमित है और वेदों का ये ज्ञान समस्त सृष्टि के पोषण और कल्याण के लिए है।

भगवान मनु ने वेद का ज्ञान रखने वाले विद्वान की प्रशंसा में कहा है कि ‘वेदशास्त्र तत्व को जानने वाला व्यक्ति किसी भी आश्रम में रहे, वह इसी लोक में रहते हुए ब्रह्म का साक्षात्कार करता है।’

वेद मन्त्रों को समझने के लिए हमें उपनिषद और आरण्यकों का अध्ययन करना चाहिए। उपनिषद को वेद का शीर्ष भाग कहा गया है और यही वेदों का अंतिम सर्वश्रेष्ठ भाग होने के कारण वेदांत कहलाये। इन उपनिषदों में ईश्वर, सृष्टि और आत्मा के सम्बन्ध में गहन दार्शनिक और वैज्ञानिक वर्णन मौजूद है। वही आरण्यक का अर्थ अरण्य यानी वन में उत्पन्न हुए ग्रंथों से है।

इनका स्वाध्याय और जिज्ञासा से किया गया अध्ययन ही वेदों के रहस्य और ज्ञान को समझने में सहायक हो सकता है और तभी समाज में फैले अज्ञान और संकुचित ज्ञान को विस्तृत रुप दिया जा सकता है इसलिए हम सभी को वेदों का अध्ययन करना चाहिए क्योंकि आज भी मानव समाज के लिए इनकी महत्ता अतुलनीय है।

दोस्तों, वेद हमारे लिए महत्वपूर्ण धर्मग्रन्थ हैं जिनका ज्ञान पाकर हम स्वयं और समाज के जीवन को संतुलित करने में सहयोगी हो सकते हैं इसलिए वेदों का ज्ञान हमें जरूर प्राप्त करना चाहिए।

जागरूक टीम को उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और वेदों को समझने और उनका ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित भी कर पायेगी।

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