वेदों के अनुसार ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति कैसे हुई है?

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आइये जागरूक पर जानते हैं वेदों के अनुसार ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति कैसे हुई है। ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति को लेकर बहुत – सी कहानियां है जो रोचक तो लगती है लेकिन तर्कसंगत नहीं होती हैं और ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के सन्दर्भ में विज्ञान का एक अलग दृष्टिकोण है लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि हमारे वेदों में ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति की बहुत स्पष्ट और सटीक व्याख्या की गयी है। ऐसे में क्यों ना, आज ये जानें कि वेदों में ब्रह्माण्ड के विषय में क्या – क्या बताया गया है। तो चलिए, आज जानते हैं कि वेदों के अनुसार ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति कैसे हुयी।

ये ब्रह्माण्ड अंडाकार है। इसमें जल या बर्फ और उसके बादल घिरे हुए हैं। जल की इस मात्रा से भी दस गुना ज्यादा ये ब्रह्माण्ड अग्नि तत्व से घिरा हुआ है और अग्नि से भी दस गुना ज्यादा ये वायु तत्व से घिरा हुआ माना गया है। वायु से दस गुना ज्यादा आकाश से घिरा ब्रह्माण्ड है और जहाँ तक आकाश प्रकाशित होता है उससे भी दस गुना ज्यादा अंधकार से ब्रह्माण्ड घिरा हुआ है। ये अंधकार अपने से दस गुना ज्यादा महत् से घिरा है और महत् उस असीमित अनंत से घिरा हुआ है और इस तरह ब्रह्माण्ड अनंत में लीन हो जाता है।

ऋग्वेद के अनुसार, ‘सृष्टि के आदिकाल में न सत् था न असत्, न वायु थी न आकाश, न मृत्यु थी न अमरता, न रात थी न दिन, उस समय केवल वही था जो वायुरहित स्थिति में भी अपनी शक्ति से श्वास ले रहा था। उसके अतिरिक्त कुछ भी नहीं था।’

तैत्तिरीय उपनिषद के अनुसार, आकाश के बाद वायु उत्पन्न हुयी, वायु के पश्चात अग्नि, अग्नि के बाद जल, जल के बाद पृथ्वी, पृथ्वी के बाद औषधि, औषधि से अन्न, अन्न से वीर्य और वीर्य से पुरुष यानी शरीर उत्पन्न हुआ।

हम ऐसा मानते हैं कि पांच तत्वों (आकाश, वायु, अग्नि, जल और ग्रह) में से सबसे पहले ग्रह (पृथ्वी / सूर्य) की रचना हुयी होगी और उसके बाद ग्रह पर बाकी चार तत्व उत्पन्न हुए होंगे लेकिन ऐसा नहीं है बल्कि ग्रह की उत्पत्ति तो इन सभी तत्वों में सबसे अंत में हुयी है।

इसी तरह ये जानना भी जरुरी है कि नर और मादा की उत्पत्ति भी सृष्टि की सबसे अंतिम रचना रही है।

दोस्तों, उम्मीद है कि आने वाले समय में विज्ञान वेदों में वर्णित ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति को और अधिक स्पष्ट रुप से समझ सकेगा और हमें भी इससे जुड़ा ज्ञान मिल सकेगा लेकिन इस जानकारी के बाद आपको भी इतना तो स्पष्ट हो ही गया होगा कि ब्रह्माण्ड की रचना किसी चमत्कार से नहीं हुयी है और न ही भगवान यानी ब्रह्म ने इसे 6 दिन में बनाया है बल्कि ब्रह्माण्ड की रचना अनंतकाल के अँधेरे के बाद अरबों वर्षों के विकास का परिणाम है।

जागरूक टीम को उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए उपयोगी भी साबित होगी।

आयुर्वेद के नियम

अधिक जानकारी के लिए ये भी देखें:

हिंदू धर्म : सृष्टि उत्पत्ति का क्रम