वेदों को क्यों और किसने लिखा?

आइये जागरूक पर जानते हैं वेदों को क्यों और किसने लिखा। प्राचीन काल से ही भारत में वेदों के अध्ययन की परंपरा रही है। वैदिक काल से ही ऋषि – मुनियों ने वेदों को प्रमाण के रुप में स्वीकारा है और उन्हीं को आधार मानकर अपने ग्रंथों की रचनाएँ की हैं। ब्रह्मा, वेदव्यास और जैमिनी जैसे ऋषि-मुनियों ने वेदों का ही अनुसरण किया है।

ऐसा माना जाता है कि वेदों की उत्पत्ति सृष्टि के आरम्भ के समय हुयी और अवतरण के बाद वेद श्रुति के रूप में रहे और बहुत समय बाद उन्हें लिपिबद्ध किया गया। वेदों को संरक्षित करने के लिए और आसानी से समझने के लिए वेदों से वेदांगों का आविष्कार भी किया गया।

वैदिक परंपरा में ब्रह्म परंपरा और आदित्य परंपरा रही है। इन दोनों ही परम्पराओं में वेदत्रयी परंपरा प्राचीन काल से प्रसिद्ध थी जिसके अनुसार वेदों के मन्त्रों के पद्य, गद्य और गान ये तीन विभाग होते हैं जिन्हें वेद का पद्य भाग ऋग्वेद, वेद का गद्य भाग यजुर्वेद और वेद का गायन भाग सामवेद है।

वेद आरम्भ में एक ही थे या इसके तीन रूप थे या आरम्भ से ही वेद के 4 प्रकार मौजूद थे। इस सम्बन्ध में अलग – अलग मत हैं जिनके अनुसार-

द्वापरयुग के अंत के समय श्री कृष्णद्वैपायन वेदव्यास जी ने एक ही वेद के चार विभाग कर दिए और ये विभाग ही ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के नाम से प्रसिद्ध हुए।

इस मत के विपरीत अनेक विद्वान ये मानते हैं कि वेद आरम्भ से ही चार है जबकि अथर्ववेद की भाषा और स्वरुप के आधार पर बहुत से विद्वान मानते हैं कि उसकी रचना सबसे बाद में हुयी है। वेदों की रचना के सम्बन्ध में ये माना जाता है कि वेदों में हज़ारों मन्त्र और ऋचाएं हैं जो एक ही समय में नहीं रची गयी होगीं और न ही एक ऋषि द्वारा समस्त मन्त्रों और ऋचाओं की रचना की गयी होगी। इनकी रचना अलग – अलग ऋषियों द्वारा समय – समय पर होती रही और वे एकत्रित होते गए।

शतपथ ब्राह्मण के श्लोक के अनुसार, अग्नि, वायु और सूर्य ने घोर तपस्या की और ऋग्वेद , यजुर्वेद और सामवेद को प्राप्त किया। मनुस्मृति के एक श्लोक के अनुसार सनातन ब्रह्म ने यज्ञों की सिद्धि के लिए अग्नि, वायु और सूर्य से ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद को व्यक्त किया।

वेदों की रचना क्यों की गयी, ये प्रश्न भी हमारे ज़ेहन में आता है। वेदों में ब्रह्मांड के अनोखे और अनंत राज शामिल हैं और वेदों में निहित ज्ञान संसार को चलाने और समन्वय बनाये रखने में सहायक सिद्ध हो, इसलिए वेदों की रचना की गयी क्योंकि वेदों में पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय संबंधों को सही तरीके से सही दिशा में चलाने और संतुलन बनाये रखने सम्बन्धी ज्ञान निहित है जो आज भी प्रासंगिक है।

दोस्तों, वेदों की रचना कब हुयी। इस बारे में स्पष्टता से कुछ नहीं कहा जा सकता क्योंकि इतिहास में ऐसे बहुत से तथ्य हैं जो अलग – अलग मत का समर्थन करते हैं और वेदों की रचना क्यों की गयी होगी, इस बारे में तो यही मत स्पष्ट प्रतीत होता है कि संसार को सुचारु रूप से चलाने के लिए उपयोगी ज्ञान सभी को मिल सके इसलिए वेदों की रचना की गयी होगी।

जागरुक टीम को उम्मीद है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और वेदों से जुड़ने और उनके महत्व को समझने के लिए प्रेरित भी कर पायेगी।

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