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वेदों में पर्यावरण संरक्षण के क्या उपाय बताये गए है?

आइये जागरूक पर जानते हैं वेदों में पर्यावरण संरक्षण के क्या उपाय बताये गए है। पर्यावरण जिसमें वायु, जल, भूमि, पेड़-पौधे, जीव-जन्तु और मानव का समावेश होता है, उस पर्यावरण को मानव ने बहुत हानि पहुंचाई है। इस वजह से प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया है। इसके परिणामस्वरुप ही कभी बाढ़, कभी भूस्खलन और कभी भूकंप जैसी स्थिति बनने लगी है और इनसे बचाव के लिए आज पर्यावरण संरक्षण की मुहीम चलाने की नौबत आ गयी है।

क्या आप जानते हैं कि पर्यावरण के संरक्षण के उपाय तो हमारे वेदों में ही स्पष्टता से बताये हुए हैं, जिन्हें हमने अपनाया होता तो ऐसी स्थितियों से बचाव हो सकता था और अगर आज भी वेदों में बताये गए उपायों पर हम गौर करेंगे तो भी प्रकृति का संतुलन बनाने में सहयोगी हो सकते हैं। ऐसे में क्यों ना आज, वेदों में बताये गए पर्यावरण संरक्षण के उपायों के बारे में जानें। तो चलिए, आज जानते हैं कि वेदों में पर्यावरण संरक्षण के क्या-क्या उपाय बताये गए हैं।

वेदों में पर्यावरण संरक्षण के क्या उपाय

  • वेदों में प्रकृति और पर्यावरण का बहुत अधिक महत्त्व बताया गया है। ऋग्वेद से लेकर बृहदारण्यकोपनिषद्, पद्मपुराण और मनुस्मृति में इसके सन्दर्भ मिलते हैं।
  • छान्दोग्यउपनिषद् में कहा गया है कि वृक्ष जीवात्मा से ओतप्रोत हैं और ये मनुष्य की तरह सुख-दुःख का अनुभव करते हैं।
  • हमारे वेदों में प्रकृति को पूजनीय बताया गया है। इसके अनुसार सूर्य, चन्द्रमा, जल, वायु, नदी, सागर, वृक्ष सभी हमारी आस्था के स्रोत हैं।
  • वेदों में पर्यावरण का वर्णन अनेक स्थानों पर किया गया है। अथर्ववेद में बताया गया है कि संसार के समस्त सुखों का स्रोत वृक्ष और वन ही हैं। इन्हीं वनों में रहकर ऋषि-मुनियों ने ज्ञान का विकास और विस्तार किया है।
  • वृहदारण्यकोपनिषद् के अनुसार वृक्षों में जीवनी शक्ति है।
  • वेदों के अनुसार वृक्षों का समय – समय पर पूजन करके हम यश और कीर्ति पाते हैं। इसी भारतीय परंपरा का अनुसरण करके हम तुलसी पूजा, वट पूजा और आंवले जैसे वृक्षों की पूजा करते हैं।
  • वेदों में कहा गया है कि वृक्ष बहुत परोपकारी होते हैं, वन हमारी सम्पदा हैं। इन्हें काटना वैदिक धर्म में अनुचित माना गया है। वृक्ष पर्वतों को रोके रखते हैं, नदियों को अनुशासित रखते हैं, तूफानी वर्षा को दबाते हैं और पक्षियों को पोषण प्रदान करके पर्यावरण को निरोगी, सुखद बनाते हैं।
  • वेदों में दस गुणवान पुत्रों के यश को एक वृक्ष के बराबर बताया गया है।
  • वनों की हरियाली हमारे विकास की प्रतीक है। वनों की हरियाली हमारी आँखों को स्फूर्ति और चेतना प्रदान करती है।
  • वेदों में कहा गया है कि प्राणी अपने विकास और व्यवस्थित जीवन क्रम के लिए एक संतुलित पर्यावरण और वातावरण पर निर्भर होते हैं।
  • पद्मपुराण में बताया गया है कि जो मनुष्य सड़क के किनारे और जलाशयों के तट पर वृक्ष लगाता है, वह मनुष्य स्वर्ग में उतने वर्षों तक फलता-फूलता रहता है जितने वर्षों तक उसका लगाया हुआ वृक्ष फलता-फूलता है।
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इस तरह ये स्पष्ट है कि हमारे वेदों में पर्यावरण के संरक्षण को विशेष महत्त्व दिया गया है और ये अपेक्षा की गयी है कि हम वृक्षों, वनों और प्रकृति के अन्य रूपों को हानि पहुँचायें बिना जीवनयापन करें और पर्यावरण का संतुलन बनाये रखने के लिए वृक्ष लगाने का कार्य भी करें। वेदों में वृक्ष को 10 पुत्रों के बराबर बताया गया है। इसका अर्थ ये है कि वृक्ष हमारे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक होने चाहिए जिनकी देखभाल और संरक्षण का जिम्मा हमारा हो।

पर्यावरण के संरक्षण के प्रति वेदों में क्या नज़रिया बताया गया है, ये तो आपने जान लिया है। अब बारी है प्रकृति और पर्यावरण के प्रति हमारे नज़रिये को सही करने की और पर्यावरण को संरक्षण देने की।

जागरूक टीम को उम्मीद है कि ये जानकारी आपको उपयोगी लगी होगी और पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए, अपने स्तर पर प्रयास करने के लिए प्रेरित भी कर पायी होगी।

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