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वर्टिगो क्या है?

आइये जानते हैं वर्टिगो क्या है। वर्टिगो का अर्थ होता है- सिर घूमना या चक्कर आना। ये शब्द लैटिन भाषा के ‘वर्टो’ से लिया गया है जिसका मतलब होता है- घूमना।

ऐसे में ये जानना बेहतर होगा कि सिर घूमने या चक्कर आने की कौनसी स्थिति वर्टिगो का रुप ले लेती है और इसे रोकने के लिए क्या किया जाना चाहिए। तो चलिए, आज जागरूक पर बात करते हैं वर्टिगो के बारे में और जानते हैं वर्टिगो क्या है।

वर्टिगो क्या है?

अक्सर सिर घूमने या चक्कर आने की वजह थकान या भागदौड़ को मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लेकिन ये लक्षण वर्टिगो के भी हो सकते हैं और हर उम्र के व्यक्ति इससे ग्रस्त हो सकते हैं।

जिसमें सबकुछ घूमता हुआ नजर आने लगता है और आड़ा या तिरछा देखने पर सब कुछ घूमता हुआ दिखाई देने लगता है। चक्कर आने के साथ-साथ कई बार उल्टी करने का मन भी होने लगता है।

वर्टिगो होने पर असंतुलन का अनुभव होता है जिसमें चलने में अस्थिरता महसूस होने के साथ जी मिचलाना और ज्यादा पसीने आने की स्थिति बन जाती है। सिर हिलाने पर चक्कर बढ़ सकते हैं।

इस स्थिति को ठीक होने में चार से छः दिन लग जाते हैं लेकिन इसके बाद भी अगर चक्कर आना और सिर घूमना ना रुके तो डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरुरी हो जाता है।

वर्टिगो का कारण– वायरल इन्फेक्शन से हमारे इनर कान में रेस्पिरेटरी ट्रैक में इन्फेक्शन से होने वाली तकलीफ वर्टिगो कहलाती है जो कान के अंदर भी हो सकती है और दिमाग में भी हो सकती है।

वर्टिगो कई तरह का होता है–

बिनायन पैरॉक्सीस्मॉल पोजिशनल वर्टिगो (बीपीपीवी) – बीपीपीवी सबसे सामान्य और शॉर्ट पीरियड (एक मिनट से भी कम) का वर्टिगो होता है। इसमें कानों में घंटी जैसी आवाज सुनाई देती है।

मिनियर डिसीज – वर्टिगो का ये प्रकार युवाओं में ज्यादा पाया जाता है। इसमें सीवियर नॉजिया और उल्टी आने के साथ कान में घंटियां सुनाई देती है और दबाव महसूस होता है। कान में मौजूद फ्लूएड की मात्रा ज्यादा हो जाने पर इयर बैलेंस नहीं बन पाता है जिसके कारण ऐसा होता है। ये तकलीफ ज्यादा समय तक रहने पर सुनने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

रिकरेन्ट वैस्टीबुलोपैथी – वर्टिगो का ये प्रकार अपने आप होता है और ठीक भी अपने आप ही होता है, इसके लक्षण मिनियर डिसीज से मिलते-जुलते हैं और कई बार ये मिनियर डिसीज में परिवर्तित भी हो जाता है। जीवनशैली को संतुलित करके वर्टिगो के इस प्रकार को ठीक किया जा सकता है।

वायरल लेबिरिनथाइटिस – नर्व्स के जरिये ही मस्तिष्क और कानों के तार जुड़े होते हैं। कॉक्लियर नर्व्स आवाज और शब्द सुनकर सूचना भेजने का काम करती है और वेस्टबुलर नर्व्स उस सन्देश के अनुसार शारीरिक स्थिति को संतुलित करती है। अगर वायरल इन्फेक्शन के कारण इन दोनों ही नर्व्स में से किसी का भी बैलेंस बिगड़ जाए तो वर्टिगो हो जाता है।

वेस्टीबुलर न्यूरोनिटिस – वेस्टिबुलर नर्व में सूजन आने के कारण वेस्टिबुलर न्यूरोनिटिस वर्टिगो होता है। इसमें सुनने की क्षमता प्रभावित नहीं होती है और ना ही कानों में घंटियों की आवाज या सुगबुगाहट सुनाई देती है।

क्या हर चक्कर वर्टिगो होता है?- नहीं, हर चक्कर वर्टिगो नहीं होता है बल्कि बहुत-सी ऐसी स्थितियां भी होती हैं जिनमें सामान्य रुप से चक्कर आने लगते हैं जैसे-

  • प्रेगनेंसी में
  • ब्रेन सम्बन्धी समस्या होने पर
  • नींद पूरी ना होने पर
  • कोलेस्ट्रॉल लेवल हाई होने पर
  • डायबिटीज सम्बन्धी समस्या होने पर
  • एनीमिया होने पर
  • कैल्शियम की असंतुलित मात्रा होने पर
  • नशे की लत होने पर
  • मेटाबॉलिज्म सम्बन्धी या हार्मोन सम्बन्धी समस्याएं होने पर

वर्टिगो से घबराने की बजाये सतर्क रहने की आवश्यकता होती है यानी लगातार चक्कर आने और नॉजिया का अहसास होते रहने पर इसे सामान्य समझने की बजाए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। नियमित रुप से व्यायाम करने से भी वर्टिगो को कण्ट्रोल करना काफी हद तक आसान हो जाता है।

दोस्तों, वर्टिगो की स्थिति को सामान्य समझने की भूल ना करें और समय रहते इस ओर सतर्क हो जाएँ।

उम्मीद है वर्टिगो क्या है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।

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